यू.एम.पी.एस एक एकल खिड़की डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो उत्तराखंड में पर्वतारोहण अभियानों एवं ट्रेकिंग गतिविधियों के नियमन, सुविधा एवं निगरानी को सुव्यवस्थित बनाता है। अनुमति प्रक्रिया के डिजिटलीकरण तथा सभी हितधारकों को एकीकृत मंच पर जोड़कर यह प्रणाली प्रशासनिक दक्षता, पर्यटकों की सुरक्षा, पारदर्शिता एवं सतत पर्यटन को सुदृढ़ बनाती है। साथ ही, यह साहसिक पर्यटन क्षेत्र में डेटा-आधारित सुशासन को भी बढ़ावा देती है।
उ त्तराखंड, हिमालय की अनेक प्रमुख पर्वत चोटियों एवं ट्रेकिंग मार्गों का केंद्र है, जहाँ प्रतिवर्ष हज़ारों पर्वतारोही और साहसिक पर्यटन के उत्साही आते हैं। किंतु दुर्गम एवं पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में पर्वतारोहण अभियानों के प्रबंधन की पारंपरिक व्यवस्था लंबी मैनुअल प्रक्रियाओं, विभिन्न विभागों से अनुमतियाँ प्राप्त करने की आवश्यकता तथा अभियानों की सीमित निगरानी जैसी चुनौतियों से जुड़ी थी।
इन चुनौतियों के समाधान के लिए उत्तराखंड सरकार ने 26 सितंबर, 2021 को उत्तराखंड एडवेंचर फेस्टिवल के दौरान उत्तराखंड पर्वतारोहण अनुमति प्रणाली (यू.एम.पी.एस) का शुभारंभ किया। यह पोर्टल पर्वतारोहण अनुमति एवं संबंधित सेवाओं के प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच उपलब्ध कराता है। इसके साथ उत्तराखंड पर्वतारोहण प्रशासन का व्यापक डिजिटलीकरण करने वाले भारत के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
पहल की आवश्यकता
साहसिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता ने ऐसी पारदर्शी, दक्ष एवं प्रौद्योगिकी-संचालित प्रणाली की आवश्यकता को रेखांकित किया, जो—
- परमिट अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाना
- विभागों के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करना
- पर्वतारोहियों की सुरक्षा एवं निगरानी को बेहतर बनाना
- पर्यावरणीय अनुपालन को सुदृढ़ करना
- आपातकालीन प्रतिक्रिया को अधिक त्वरित बनाना
- डेटा-आधारित योजना निर्माण एवं नीतिगत निर्णयों को समर्थन प्रदान करना
यू.एम.पी.एस की परिकल्पना विखंडित प्रक्रियाओं को समाप्त कर साहसिक पर्यटन प्रबंधन के लिए एक निर्बाध डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी।
पोर्टल का अवलोकन
यू.एम.पी.एस पर्वतारोहण गतिविधियों से जुड़े सभी प्रमुख हितधारकों, जैसे पर्वतारोही, अभियान दल, भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (आई.एम.एफ), वन विभाग, पर्यटन विभाग तथा जिला प्रशासन, को एक ही मंच पर एकीकृत करता है।
पोर्टल के माध्यम से उपयोगकर्ता—
- पहचान की गई 83 चोटियों के बारे में जानकारी प्राप्त करें
- अभियान की अनुमति के लिए ऑनलाइन आवेदन करें
- ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड करें
- डिजिटल पेमेंट करें
- आवेदन की स्थिति को रियल-टाइम में ट्रैक करें
- इलेक्ट्रॉनिक रूप से सूचनाएं और मंज़ूरी प्राप्त करें
पारंपरिक व्यवस्था की चुनौतियाँ
यू.एम.पी.एस के लागू होने से पहले अभियान आयोजकों को अनुमति प्राप्त करने के लिए लंबी एवं जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
प्रमुख चुनौतियाँ
- सरकारी दफ़्तरों के कई बार चक्कर लगाना
- अलग-अलग अधिकारियों को एक जैसे दस्तावेज़ जमा करना
- मैन्युअल रूप से जाँच और वेरिफिकेशन की प्रक्रियाएं
- काम की मौजूदा स्थिति का तुरंत पता न चल पाना
- अलग-अलग विभागों के बीच बातचीत में देरी
- चल रहे अभियानों की जानकारी ठीक से न मिल पाना
- अभियानों के पुराने रिकॉर्ड को बनाए रखने में मुश्किल
- प्लानिंग और एनालिसिस के लिए सेंट्रलाइज्ड डेटा का न होना
इन चुनौतियों की वजह से अक्सर अभियान आयोजित करने वाले लोग हतोत्साहित होते थे और सरकारी एजेंसियों पर प्रशासनिक बोझ बढ़ जाता था।
चित्र 12.1: यू.एम.पी.एस. (एसडब्ल्यूएस) के ज़रिए डिजिटल वर्कफ़्लो
प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ
ऑनलाइन पंजीकरण एवं उपयोगकर्ता प्रबंधन
पोर्टल विभिन्न श्रेणियों के उपयोगकर्ताओं के लिए भूमिका-आधारित अभिगम उपलब्ध कराता है, जिससे अभियान आयोजक, अधिकारी तथा प्रशासक सुरक्षित एवं नियंत्रित वातावरण में अपनी-अपनी भूमिका के अनुरूप प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं।
डिजिटल अनुमति प्रबंधन
एक पूरी तरह से स्वचालि त परमिट प्रबंधन ढाांचा मानवीय हस्त क्षेप के बि ना आवेदन प्रसंस्करण, सत्यापन, अनुमोदन और जारी करने की सुवि धा प्रदान करता है।
पर्वत चोटियों का सूचना भंडार
पोर्टल में एक केंद्रीकृत डेटाबेस उपलब्ध है, जिसमें अधिसूचित पर्वत चोटियों, पर्वतारोहण के उपयुक्त मौसम, मार्गों, नियमों तथा दिशा-निर्देशों से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
अभियान निगरानी प्रणाली
अधिकारी अभियान की गतिविधियों पर नज़र रख सकते हैं और अपडेटेड रिकॉर्ड बनाए रख सकते हैं, जिससे सुरक्षा प्रबंधन और ऑपरेशनल देखरेख बेहतर होती है।
एकीकृत डिजिटल भुगतान प्रणाली
पोर्टल के माध्यम से अभियान शुल्क, अनुमति शुल्क तथा अन्य लागू करों का सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान किया जा सकता है, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सरल एवं पारदर्शी बनती है।
स्वचालित सूचनाएँ
आवेदकों को आवेदन की स्थिति, मंज़ूरी, कमियों और परमिट जारी होने के बारे में अलर्ट और अपडेट मिलते हैं
प्रशासनिक डैशबोर्ड
व्यापक प्रशासनिक डैशबोर्ड के माध्यम से अधिकारी:
- आवेदनों की समीक्षा कर सकते हैं।
- पर्वतारोहण अभियानों की निगरानी कर सकते हैं।
- विश्लेषणात्मक प्रतिवेदन तैयार कर सकते हैं।
- पर्वत चोटियों के उपयोग का विश्लेषण कर सकते हैं।
- पर्यटन संबंधी प्रवृत्तियों का अध्ययन कर सकते हैं।
- नीति-निर्माण के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
केंद्रीकृत डेटा प्रबंधन
पोर्टल पर्वतारोहण अभियानों से संबंधित सभी सूचनाओं के लिए एकल एवं केंद्रीकृत डेटा भंडार के रूप में कार्य करता है, जिससे आँकड़ों की शुद्धता, एकरूपता तथा उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
प्रौद्योगिकी संरचना
बढ़ती उपयोगकर्ता संख्या तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यू.एम.पी.एस को मापनीय एवं सुदृढ़ प्रौद्योगिकी संरचना पर विकसित किया गया है।
एप्लिकेशन संरचना
- वेब-आधारित केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म
- मॉड्यूलर एवं मापनीय डिज़ाइन
- सेवा-उन्मुख कार्यप्रवाह संरचना
- विभिन्न उपकरणों के लिए रिस्पॉन्सिव यूज़र इंटरफ़ेस
प्रयुक्त प्रौद्योगिकियाँ
फ्रंट एंड
- एएसपी.नेट
- एजैक्स
- जेक्वेरी
- बूटस्ट्रैप
बैक एंड
- पोस्टग्रीएसक्यूएल डेटाबेस
क्लाउड अवसंरचना
- राज्य डेटा केंद्र के क्लाउड पर होस्ट।
- उच्च उपलब्धता वाली संरचना।
- बैकअप एवं आपदा पुनर्प्राप्ति व्यवस्था।
- सुरक्षित होस्टिंग वातावरण।
- केंद्रीकृत निगरानी एवं अनुरक्षण।
दृष्टि एवं उद्देश्य
इस पहल का मकसद उत्तराखंड को टेक्नोलॉजी-आधारित एडवेंचर टूरिज्म गवर्नेंस के लिए एक मॉडल राज्य के तौर पर स्थापित करने का दीर्घकालिक विज़न है।
- यूनिफाइड डिजिटल इकोसिस्टम: एडवेंचर टूरिज्म की पूरी प्रक्रिया के लिए एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म देना।
- ऑपरेशनल एक्सीलेंस: ऑटोमेशन के ज़रिए पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- बेहतर सुरक्षा: अभियान की ट्रैकिंग को बेहतर बनाना और आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मज़बूत करना।
- सस्टेनेबल टूरिज्म: पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना और हिमालय के नाज़ुक इकोसिस्टम को बचाना।
- डेटा-आधारित गवर्नेंस: सही फ़ैसले लेने के लिए एडमिनिस्ट्रेटर और पॉलिसी बनाने वालों को रियल-टाइम जानकारी और एनालिटिकल जानकारी उपलब्ध कराना।
हितधारकों को लाभ
पर्वतारोहियों के लिए
- तेज़ी से मंज़ूरी
- आसान प्रक्रियाएँ
- कम कागज़ी काम
- जानकारी तक ऑनलाइन पहुँच
- ज़्यादा पारदर्शिता
सरकारी विभागों के लिए
- बेहतर तालमेल
- मानक कार्य-प्रक्रियाएँ
- बेहतर निगरानी क्षमताएँ
- प्रशासनिक बोझ में कमी
- बेहतर रिकॉर्ड मैनेजमेंट
स्थानीय समुदायों के लिए
- पर्यटन के ज़्यादा अवसर
- एडवेंचर टूरिज़्म से आर्थिक विकास
- स्थानीय सेवाओं और सहायता प्रणालियों की बेहतर दृश्यता
नीति-निर्माताओं के लिए
- सटीक और रियल-टाइम डेटा तक पहुँच
- बेहतर योजना और संसाधनों का आवंटन
- बेहतर पर्यावरण और पर्यटन प्रबंधन
प्रभाव एवं उपलब्धियाँ
वर्ष 2021 में लॉन्च होने के बाद से, इस पोर्टल ने उत्तराखंड में पर्वतारोहण गतिविधियों के मैनेजमेंट में काफी सुधार किया है।
मुख्य नतीजे
- अभियान की मंज़ूरी के लिए स्टैंडर्ड प्रोसेस
- अलग-अलग मंज़ूरी प्रक्रियाओं का खात्मा
- बेहतर पारदर्शिता और जवाबदेही
- पर्यटकों की सुरक्षा और अभियान की ट्रैकिंग में सुधार
- पर्वतारोहण की जानकारी का सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस
- विभागों के बीच बेहतर कामकाज की क्षमता
- पर्यावरण की निगरानी और नियमों का पालन मज़बूत हुआ
सफलता के पैमाने
- 2021 से सफलतापूर्वक चल रहा है
- 100 से ज़्यादा अभियान परमिट जारी किए गए
- 500 से ज़्यादा पर्वतारोहियों को सुविधा दी गई
- 83 चिन्हित पर्वतारोहण चोटियाँ पूरी तरह से कवर की गयीं।
निष्कर्ष
यू.एम.पी.एस एक नई तरह की ई-गवर्नेंस पहल है, जिसने एक पारदर्शी, कुशल और इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए पर्वतारोहण के मैनेजमेंट को आसान और बेहतर बनाया है। परमिट से जुड़े कामों को डिजिटल बनाकर और सभी संबंधित लोगों को जोड़कर, यह ऑपरेशन की क्षमता, पर्यटकों की सुरक्षा, नियमों की निगरानी और टिकाऊ पर्यटन को बेहतर बनाता है। इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने के हिसाब से बनाया गया है; इस प्लेटफॉर्म को एडवांस्ड ट्रैकिंग और एनालिटिक्स क्षमताओं के साथ और बेहतर बनाया जा सकता है और इसे अन्य हिमालयी राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। इस तरह, यह भारत में टेक्नोलॉजी पर आधारित एडवेंचर टूरिज़्म गवर्नेंस के लिए एक मॉडल बन गया है।
द्वारा संपादित: विनोद कुमार गर्ग
लेखक / योगदानकर्ता
अरुण शर्मा तकनीकी निदेशक sharma.arun[at]nic[dot]in
शक्ति प्रसाद रतूरी वैज्ञानिक – डी shakti.raturi[at]nic[dot]in
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