भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ग्रामीण आंतरिक लेखा परीक्षा पोर्टल लॉन्च किया है। इस पोर्टल का शुभारंभ केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 जून 2026 को नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान किया।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुख्य नियंत्रक लेखा कार्यालय द्वारा परिकल्पित तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के तकनीकी सहयोग से विकसित यह पोर्टल आंतरिक लेखा परीक्षा की संपूर्ण प्रक्रिया—लेखा परीक्षा योजना, क्रियान्वयन, प्रतिवेदन, अनुपालन निगरानी तथा आपत्तियों के निस्तारण—को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराता है।
यह पहल पारंपरिक कागज़-आधारित और बिखरी हुई लेखा परीक्षा प्रणाली के स्थान पर एक एकीकृत डिजिटल व्यवस्था स्थापित करती है, जिससे जोखिम-आधारित और अनुपालन लेखा परीक्षाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। सभी लेखा परीक्षा अभिलेखों, प्रतिवेदनों तथा अनुपालन संबंधी सूचनाओं के केंद्रीकरण से पारदर्शिता बढ़ेगी, निगरानी सुदृढ़ होगी तथा संस्थागत ज्ञान का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
पोर्टल में लेखा परीक्षा की संपूर्ण डिजिटल कार्यप्रणाली उपलब्ध है, जिसमें लेखा परीक्षा की योजना, ऑडिट मेमोरेंडम तैयार करना, प्रतिवेदन तैयार करना, अनुमोदन प्रक्रिया तथा डिजिटल अभिलेख प्रबंधन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह लेखा परीक्षा टिप्पणियों तथा कार्रवाई प्रतिवेदनों का केंद्रीकृत भंडार उपलब्ध कराता है, जिससे भविष्य में संदर्भ और विश्लेषण के लिए सभी अभिलेख सुरक्षित रूप से उपलब्ध रहेंगे।
भूमिका-आधारित अभिगम व्यवस्था के माध्यम से लेखा परीक्षकों, लेखा परीक्षा के अधीन संस्थाओं, कार्यक्रम प्रभागों, राज्य सरकारों, जिला अधिकारियों तथा अनुमोदन प्राधिकरणों को सुरक्षित और नियंत्रित पहुँच प्रदान की गई है। पोर्टल के इंटरैक्टिव डैशबोर्ड वास्तविक समय में लेखा परीक्षा कवरेज, लंबित टिप्पणियों, अनुपालन की स्थिति तथा वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी उपलब्ध कराते हैं। वहीं, जीआईएस-आधारित इंटरफेस उन क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता करता है जहाँ अभी तक लेखा परीक्षा नहीं हुई है, जिससे जोखिम-आधारित प्राथमिकता निर्धारण संभव हो सके।
सरकार के डिजिटल गवर्नेंस मानकों के अनुरूप विकसित इस पोर्टल में भूमिका-आधारित अभिगम नियंत्रण, सुरक्षित एपीआई एकीकरण, ऑडिट लॉगिंग, स्वचालित अपवाद प्रबंधन, नियमित सुरक्षा मूल्यांकन तथा डिजास्टर रिकवरी जैसी उन्नत सुरक्षा सुविधाएँ शामिल की गई हैं, ताकि लेखा परीक्षा संबंधी डेटा की सुरक्षा और उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीण विकास मंत्रालय भविष्य में इस पोर्टल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उन्नत विश्लेषण, पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण, पैटर्न पहचान तथा स्वचालित जोखिम मूल्यांकन जैसी सुविधाओं को भी चरणबद्ध रूप से शामिल करने की योजना बना रहा है। इन सुविधाओं से उच्च जोखिम वाले संस्थानों की पहचान, लेखा परीक्षा की प्राथमिकता तय करने तथा साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
इस पोर्टल को वित्त मंत्रालय के नियंत्रक महालेखा कार्यालय से भी सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जिसके अंतर्गत इसे विभिन्न नागरिक मंत्रालयों एवं विभागों के प्रधान मुख्य नियंत्रक लेखा तथा नियंत्रक लेखा कार्यालयों में लागू करने की दिशा में पहल की जा रही है। इससे यह मंच डिजिटल लेखा परीक्षा प्रशासन के एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित होगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करते हुए ग्रामीण आंतरिक लेखा परीक्षा पोर्टल सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने, विकास कार्यक्रमों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शी, उत्तरदायी और डेटा-संचालित सुशासन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है।