भाभारत और दक्षिण अफ्रीका ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल अवसंरचना तथा उन्नत विनिर्माण को भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित करते हुए उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को और सुदृढ़ बनाने पर सहमति व्यक्त की।
3 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय बैठक के दौरान केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह तथा दक्षिण अफ्रीका की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार उपमंत्री डॉ. नोमालुंगेलो जीना ने डिजिटल प्रौद्योगिकी, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी तथा हाइड्रोजन ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार पर चर्चा की।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी तथा स्टार्टअप-आधारित नवाचार के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अनुसंधान सहयोग को नवाचार, व्यावसायीकरण तथा उद्योग-आधारित परिणामों में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
दोनों देशों ने उन्नत सामग्री एवं विनिर्माण, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने पर सहमति व्यक्त की।
बैठक के दौरान जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स, टीका विकास, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी तथा महामारी तैयारी के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। दक्षिण अफ्रीका ने डिजिटल प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, स्वास्थ्य विज्ञान तथा कौशल विकास के क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाने में विशेष रुचि व्यक्त की।
दोनों पक्षों ने स्क्वायर किलोमीटर एरे (एसकेए) परियोजना सहित खगोल विज्ञान के क्षेत्र में जारी सहयोग की समीक्षा की तथा ब्रिक्स के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उच्च-प्रदर्शन संगणना, जैव प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।
बैठक में दोनों देशों ने नवाचार, स्टार्टअप सहयोग, उत्कृष्ट अनुसंधान तथा डिजिटल परिवर्तन पर आधारित भविष्य उन्मुख प्रौद्योगिकी साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।