इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डी.आई.बी.डी) ने नेपाल के काठमांडू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (डीपीआई-एआई) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है।
इस सहयोग के अंतर्गत नेपाली भाषा के डेटासेट, वाक् संग्रह (स्पीच कॉर्पस) तथा वाक्-से-पाठ (स्पीच-टू-टेक्स्ट), पाठ-से-वाक् (टेक्स्ट-टू-स्पीच), मशीन अनुवाद और बहुभाषी संवादात्मक एआई अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक संसाधनों का संयुक्त रूप से विकास किया जाएगा।
भाषिणी के मुक्त एवं अंतरसंचालनीय भाषा प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र का उपयोग करते हुए यह पहल नेपाल में बहुभाषी डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ भाषा एवं साक्षरता संबंधी बाधाओं को कम करने में सहायक होगी, जिससे नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं तक अधिक सुगम पहुँच प्राप्त होगी।
दोनों संस्थान प्राकृतिक भाषा संसाधन (एनएलपी), बहुभाषी एआई तथा डीपीआई के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, प्रायोगिक परियोजनाएँ, प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण संबंधी गतिविधियाँ भी संचालित करेंगे।
इस सहयोग का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य भारत-नेपाल क्षेत्र की अल्प-संसाधन एवं कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं का डिजिटलीकरण एवं संरक्षण भी है। इसके लिए भाषा डेटासेट और एआई आधारित उपकरण विकसित किए जाएंगे, जिससे इन भाषाओं के संरक्षण और डिजिटल उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
भारत के एआई-संचालित बहुभाषी डिजिटल समावेशन मंच भाषिणी पर वर्तमान में 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय वाक् भाषाओं तथा 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन उपलब्ध है। यह मंच 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को भाषाई सेवाएँ प्रदान करता है तथा प्रतिदिन 1.5 करोड़ से अधिक एआई इन्फेरेंस संसाधित करता है।
यह साझेदारी बहुभाषी एआई क्षमताओं के विस्तार, भाषा प्रौद्योगिकी में सीमा-पार सहयोग को सुदृढ़ करने तथा भारत और नेपाल के बीच डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगी।