भाभारत और नॉर्डिक देशों ने अपने द्विपक्षीय सहयोग को हरित प्रौद्योगिकी एवं नवाचार रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक विस्तारित करते हुए डिजिटल नवाचार, उन्नत प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान सहयोग तथा सतत प्रौद्योगिकी विकास को भविष्य के सहयोग का प्रमुख आधार बनाया है। इस संबंध में निर्णय 19 मई 2026 को ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान लिया गया।
इस साझेदारी का उद्देश्य नॉर्डिक देशों की तकनीकी विशेषज्ञता को भारत की विनिर्माण क्षमता, प्रतिभा संसाधन और बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन की क्षमता के साथ जोड़कर नवाचार-आधारित विकास को गति देना है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में डिजिटल प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण, अनुसंधान एवं नवाचार तथा अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।
शिखर सम्मेलन की एक प्रमुख उपलब्धि भारत-नॉर्डिक हरित प्रौद्योगिकी एवं नवाचार रणनीतिक साझेदारी का शुभारंभ रही। इस पहल का उद्देश्य सतत प्रौद्योगिकियों को अपनाने, डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने तथा डेटा-संचालित शासन एवं सेवा वितरण को बढ़ावा देना है। इससे नवाचार को प्रोत्साहन मिलने, संसाधनों के बेहतर उपयोग, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने तथा प्रौद्योगिकी आधारित आर्थिक विकास के नए अवसर सृजित होने की अपेक्षा है।
दोनों पक्षों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित (एस.टी.ई.एम) के क्षेत्र में अनुसंधान सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति व्यक्त की। इसके अंतर्गत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों तथा शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। विशेष रूप से 6जी संचार जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान से सुदृढ़ डिजिटल अवसंरचना के विकास तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।
नॉर्डिक देशों के साथ भारत का प्रौद्योगिकी सहयोग पहले से ही व्यापक है। डेनमार्क में सूचना प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में लगभग 40 भारतीय कंपनियाँ कार्यरत हैं। वहीं फिनलैंड ने अपने प्रौद्योगिकी एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में भारतीय पेशेवरों के बढ़ते योगदान की सराहना की है। फिनलैंड में भारतीय समुदाय की सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपस्थिति दोनों पक्षों के बीच प्रतिभा आधारित सहयोग को और सुदृढ़ बना रही है।
शिखर सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, आर्कटिक एवं ध्रुवीय अनुसंधान, लचीली आपूर्ति शृंखलाओं तथा डिजिटल नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया गया। इन पहलों से दोनों क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी विकास को गति मिलने, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने तथा स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी उद्यमों के लिए नए अवसर सृजित होने की अपेक्षा है।