फ्रांस के नीस स्थित पैले देज़ एक्सपोज़िशन में भारत इनोवेट्स 2026 के प्रथम संस्करण का शुभारंभ भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त रूप से किया। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित यह पहल भारत के डीप-टेक नवाचार पारितंत्र को वैश्विक उद्योग, निवेशकों, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों से जोड़ने के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।
इस आयोजन में भारत के 120 नवोन्मेषकों, 15 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों तथा 500 से अधिक वैश्विक हितधारकों ने भाग लिया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण सहित 13 प्रमुख क्षेत्रों में भारत की नवाचार क्षमता का प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम के पहले दिन 30 से अधिक रणनीतिक साझेदारियों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें नवाचार-केंद्रित समझौता ज्ञापन (एमओयू) और संयुक्त घोषणाएँ शामिल हैं। इनका उद्देश्य अनुसंधान सहयोग, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण तथा स्टार्टअप पारितंत्र को सुदृढ़ करना है। इसके अंतर्गत भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों और वैश्विक इनक्यूबेटरों के बीच सहयोग, अग्रणी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रौद्योगिकी विकास एवं बाज़ार तक पहुँच से संबंधित समझौते तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और फ्रांस के विश्वविद्यालयों के बीच छात्र एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने वाले समझौते शामिल हैं।
इस अवसर पर इंडिया-फ्रांस एटीएल ब्रिज पहल का भी शुभारंभ किया गया। नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन तथा ला फाउंडेशन डसॉल्ट सिस्टम्स के सहयोग से संचालित यह पहल फ्रांस में भारत के अटल टिंकरिंग लैब मॉडल पर आधारित पहला स्कूल इनोवेशन लैब स्थापित करेगी तथा दोनों देशों के युवा नवोन्मेषकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगी।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए इंफोसिस के संस्थापक श्री एन. आर. नारायण मूर्ति ने कहा कि उच्च शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों की भूमिका मूल्य-आधारित उद्यमियों और प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ताओं के निर्माण में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक तकनीकी संस्थानों की सफलता साझा मूल्यों, प्रतिभा, अनुशासित नवाचार, पारदर्शी प्रशासन और विश्वास पर आधारित होती है।
कार्यक्रम के दौरान "एआई फॉर ग्लोबल गुड", "इंडिया एंड यूरोप: डीप-टेक विदाउट बॉर्डर्स" तथा "ग्लोबल डीप-टेक कैपिटल कॉरिडोर्स" जैसे विषयों पर उच्चस्तरीय परिचर्चाएँ आयोजित की गईं। इन सत्रों में उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संप्रभु एआई क्षमताओं, सीमा-पार नवाचार, उद्यम पूंजी निवेश, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण तथा भरोसेमंद वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से सुदृढ़ तकनीकी पारितंत्र के निर्माण पर विचार-विमर्श किया गया।
नीतिनिर्माताओं, उद्योग जगत, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स, निवेशकों और शोध संस्थानों की व्यापक भागीदारी के साथ भारत इनोवेट्स 2026 ने भारत और यूरोप के बीच डीप-टेक, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा प्रदान की है तथा वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में भारत की उभरती भूमिका को और सुदृढ़ किया है।