एक पूर्वोत्तर सीमावर्ती राज्य त्रिपुरा ने एनआईसी राज्य केंद्र के तहत एक व्यापक डिजिटल गवर्नेंस इकोसिस्टम विकसित किया है। वित्त, परिवहन, राजस्व, न्यायपालिका, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण तक फैले बीएमएस, ई-ग्रास, आर.सी.एम.एस., ई-डिस्ट्रिक्ट तथा ई-कोर्ट जैसे प्लेटफॉर्मों ने पारदर्शिता, दक्षता और नागरिकों की पहुँच को सुदृढ़ किया है। एनकेएन, टीस्वान तथा मिनी क्लाउड जैसे सुदृढ़ नेटवर्क अवसंरचना इस इकोसिस्टम को एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। पुरस्कार-विजेता प्रणालियाँ तथा सुदृढ़ अंतर-विभागीय एकीकरण, एक कनेक्टेड एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम गवर्नेंस मॉडल की दिशा में त्रिपुरा के निरंतर बढ़ते कदम को दर्शाते हैं।
भौगोलिक दृष्टि से अपेक्षाकृत छोटा राज्य होने के बावजूद त्रिपुरा ने वित्त, भूमि प्रशासन, परिवहन, न्याय, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जनकल्याण सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक सुदृढ़ डिजिटल सुशासन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। एनआईसी त्रिपुरा राज्य केंद्र ने राज्य सरकार के साथ साझेदारी में ऐसे अनेक डिजिटल मंच विकसित एवं कार्यान्वित किए हैं, जिन्होंने सुशासन को सुव्यवस्थित बनाया है तथा सार्वजनिक सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाया है।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पहलों के क्रियान्वयन के साथ-साथ एनआईसी त्रिपुरा ने राज्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक राज्य-विशिष्ट अनुप्रयोग भी विकसित किए हैं। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), भूमि अभिलेख, पेपरलेस कार्यालय, डिजिटल खरीद, परिवहन सेवाओं तथा एकीकृत न्याय प्रणाली जैसे क्षेत्रों में विकसित इन मंचों ने एक परस्पर जुड़ा हुआ सुशासन पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है, जो निर्बाध सूचना आदान-प्रदान तथा सूचित निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है।
यह लेख प्रमुख क्षेत्रों में एनआईसी त्रिपुरा द्वारा कार्यान्वित प्रमुख आईसीटी पहलों तथा इन सेवाओं को समर्थ बनाने वाली डिजिटल अवसंरचना का परिचय प्रस्तुत करता है।
वित्त
लाभार्थी प्रबंधन प्रणाली
लाभार्थी प्रबंधन प्रणाली, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, त्रिपुरा द्वारा विकसित एक प्रमुख डिजिटल मंच है, जो एकीकृत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण पारितंत्र के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाने का कार्य करता है। मुक्त स्रोत प्रौद्योगिकी पर आधारित यह क्लाउड-सक्षम मंच नागरिक पंजीकरण, योजना में नामांकन, पात्रता निर्धारण, लाभ वितरण तथा वितरण उपरांत निगरानी तक संपूर्ण लाभार्थी जीवनचक्र के लिए एक समग्र और कागजरहित सेवा वितरण व्यवस्था उपलब्ध कराता है। परिवार-आधारित मानचित्रण तथा डुप्लीकेट अभिलेखों की पहचान की तकनीक के माध्यम से यह प्रणाली लाभार्थियों की सटीक पहचान सुनिश्चित करती है, दोहराव को रोकती है तथा जनकल्याण योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता बढ़ाती है।
यह प्रणाली लचीले और विस्तार योग्य स्वरूप में विकसित की गई है। इसमें ऑनलाइन लाभार्थी पंजीकरण, योजनाओं का समावेशन, पात्रता एवं अधिकार निर्धारण, आवेदन प्रसंस्करण तथा वास्तविक समय आधारित डैशबोर्ड जैसी सभी सुविधाएँ एकीकृत रूप से उपलब्ध हैं। यह राज्य कोषागार, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, डिजिलॉकर, उमंग, मेरी पहचान तथा अन्य डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं के साथ एकीकृत है। इसके माध्यम से आधार, बैंक खाते तथा ई-रुपी आधारित सुरक्षित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण संभव हुआ है। इसके अतिरिक्त यह ऑनलाइन एवं ऑफलाइन बैंक खाते का सत्यापन, आधार वॉल्ट आधारित टोकनीकरण, वस्तु के रूप में लाभ वितरण तथा पुराने आँकड़ों के स्थानांतरण जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराती है, जिससे विभाग अपनी पूर्ववर्ती योजनाओं को भी आसानी से इस मंच पर जोड़ सकते हैं।
वर्तमान में यह प्रणाली राज्य के 30 सरकारी विभागों की 73 जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन कर रही है और लगभग 40 लाख नागरिकों को लाभान्वित कर चुकी है। इसके माध्यम से 37.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण लेनदेन संपन्न किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से 656 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लाभार्थियों तक पहुँचाई गई है। इस प्रणाली ने जनकल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है। डिजिटल सुशासन में इसके उत्कृष्ट योगदान के लिए इसे वर्ष 2021-22 का मुख्यमंत्री सिविल सेवा पुरस्कार, वर्ष 2024 का 15वाँ राष्ट्रीय डिजिटल परिवर्तन पुरस्कार तथा वर्ष 2025 का ईटी गवर्नमेंट डिजिटेक पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
नेक्स्टजेन मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली
नेक्स्टजेन मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, त्रिपुरा द्वारा विकसित एक व्यापक, क्लाउड-सक्षम डिजिटल प्रणाली है, जो सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक संपूर्ण सेवा जीवनचक्र का डिजिटलीकरण करती है। यह एकीकृत मंच सरकारी विभागों को कर्मचारी अभिलेख, सेवा पुस्तिका, वेतन, अवकाश, स्थानांतरण, पदोन्नति, पेंशन तथा अन्य कार्मिक संबंधी कार्यों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करने में सक्षम बनाता है। इससे प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और सेवा वितरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
यह प्रणाली कर्मचारियों की ऑनलाइन नियुक्ति, डिजिटल सेवा पुस्तिका, अवकाश एवं उपस्थिति प्रबंधन, वेतन और अन्य सेवा लाभों का प्रबंधन, स्थानांतरण एवं पदोन्नति, पेंशन प्रसंस्करण तथा कर्मचारी स्व-सेवा पोर्टल जैसी सुविधाएँ एक ही मंच पर उपलब्ध कराती है। विन्यास योग्य कार्यप्रवाह, डिजिटल अनुमोदन, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर तथा वास्तविक समय के डैशबोर्ड के माध्यम से यह प्रणाली कागजरहित कार्यप्रणाली को बढ़ावा देती है, निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाती है तथा मानव संसाधन नियोजन को अधिक प्रभावी बनाती है। साथ ही कर्मचारी अपनी सेवा से संबंधित जानकारी का ऑनलाइन अवलोकन एवं प्रबंधन भी कर सकते हैं।
वर्तमान में राज्य के 68 सरकारी विभाग इस प्रणाली से जुड़े हैं, जिनके लगभग 88,740 कर्मचारियों की डिजिटल सेवा पुस्तिकाएँ इसमें उपलब्ध हैं। इस प्रणाली के माध्यम से अब तक 3.54 लाख से अधिक मासिक वेतन बिल तैयार किए जा चुके हैं, 1.36 लाख से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए गए हैं तथा 2,000 से अधिक कार्यालय आदेशों का डिजिटल प्रसंस्करण किया जा चुका है। यह उपलब्धियाँ सार्वजनिक क्षेत्र के मानव संसाधन प्रबंधन के आधुनिकीकरण में इसकी व्यापक उपयोगिता और प्रभावशीलता को दर्शाती हैं।
इस प्रणाली की एक विशेषता कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विसंगति एवं धोखाधड़ी पहचान तंत्र है, जो बुद्धिमान नियमों तथा व्यवहार विश्लेषण के माध्यम से संदिग्ध लेनदेन, दोहराए गए भुगतान, अपात्र दावों, काल्पनिक कर्मचारियों तथा नीतिगत अनियमितताओं की पहचान करता है। वास्तविक समय के अलर्ट और विश्लेषणात्मक डैशबोर्ड की सहायता से यह सुविधा सुशासन को सुदृढ़ करती है, वित्तीय जवाबदेही बढ़ाती है तथा विभागों को सार्वजनिक धन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से पहले ही अनियमितताओं की रोकथाम में सहायता प्रदान करती है।
राज्य प्राप्ति पोर्टल
राज्य प्राप्ति पोर्टल, त्रिपुरा सरकार के कोषागार तथा 32 गैर-कोषागार प्राप्ति खातों के लिए विकसित एक एकीकृत ऑनलाइन राजस्व प्राप्ति मंच है। यह विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों का समर्थन करता है तथा परिवहन, न्यायपालिका, राजस्व और अन्य सरकारी विभागों की अनेक डिजिटल प्रणालियों के साथ एकीकृत है। जुलाई 2025 तक इस पोर्टल के माध्यम से 10.83 लाख से अधिक लेनदेन संपन्न किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से 28 एकीकृत अनुप्रयोगों के जरिए 5,786 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह किया गया है।
चित्र: 3.1 : तत्कालीन उपमुख्यमंत्री, त्रिपुरा श्री जिष्णु देव वर्मा ने 6 अक्टूबर 2022 को त्रिपुरा सरकार के वित्त विभाग के आबकारी संगठन हेतु एनआईसी द्वारा विकसित ‘ई-आबकारी’ पोर्टल का उद्घाटन किया
वस्तु एवं सेवा कर प्रबंधन विश्लेषण प्रणाली
वस्तु एवं सेवा कर प्रबंधन विश्लेषण प्रणाली एक विश्लेषणात्मक डैशबोर्ड है, जो राज्य के कर प्रशासकों को अपने अधिकार क्षेत्र में वस्तु एवं सेवा कर संग्रह तथा अनुपालन की प्रभावी निगरानी करने में सहायता प्रदान करता है। इसके साथ कार्यरत वस्तु एवं सेवा कर लेखांकन सूचना एवं द्वि-पक्षीय समाधान प्रणाली, वित्त विभाग तथा महालेखाकार, त्रिपुरा को वस्तु एवं सेवा कर के लेखांकन एवं मिलान संबंधी कार्यों में सहयोग प्रदान करती है। ये दोनों प्रणालियाँ आँकड़ा-आधारित निगरानी और प्रभावी वित्तीय समन्वय के माध्यम से कर प्रशासन को अधिक सुदृढ़ बनाती हैं।
ई-प्रापण
सरकारी ई-प्रापण प्रणाली को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल के अंतर्गत लागू किया गया है, जिसके माध्यम से निविदा प्रकाशन, संशोधन, ऑनलाइन बोली प्रस्तुत करना तथा अनुबंध प्रदान करने जैसी संपूर्ण प्रक्रियाएँ डिजिटल रूप से संचालित की जाती हैं। वर्ष 2013 से अब तक राज्य ई-प्रापण पोर्टल पर 53,634 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 62,688 निविदाएँ प्रकाशित की जा चुकी हैं। वर्ष 2020 से राज्य को राष्ट्रीय ई-नीलामी पोर्टल से भी जोड़ा गया है, जिसका उपयोग राज्य वन विभाग तथा संस्थागत वित्त निदेशालय द्वारा अग्रिम और विपरीत नीलामी के संचालन के लिए किया जा रहा है।
ई-आबकारी
ई-आबकारी, आबकारी विभाग के लिए विकसित एक समग्र डिजिटल प्रणाली है, जो ऑनलाइन लाइसेंस जारी करने, आयात परमिट, लेबल पंजीकरण, भंडार प्रबंधन तथा मासिक विवरणियों के ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण जैसी सुविधाएँ प्रदान करती है। इस प्रणाली के माध्यम से अब तक 22.81 करोड़ से अधिक लेनदेन संपन्न किए जा चुके हैं। इसके परिणामस्वरूप आबकारी प्रशासन में कार्यकुशलता, पारदर्शिता तथा नियामकीय अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
चित्र: 3.2 : ई-ग्रास वेबसाइट का होम पेज
स्वास्थ्य
ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली
ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली, डिजिटल इंडिया की एक प्रमुख पहल है, जो नागरिकों को सरकारी अस्पतालों की बाह्य रोगी सेवाओं तक पहुँच के लिए एकीकृत डिजिटल मंच उपलब्ध कराती है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के मानकों के अनुरूप विकसित यह प्रणाली ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग, प्रयोगशाला जाँच रिपोर्ट एवं ई-प्रिस्क्रिप्शन की उपलब्धता, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता एकीकरण, अनुवर्ती परामर्श प्रबंधन तथा दूरस्थ चिकित्सीय परामर्श जैसी सुविधाएँ प्रदान करती है। यह प्रणाली भारत के डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक बन चुकी है और देशभर के हजारों सरकारी अस्पतालों को जोड़ते हुए नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं की सहज उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है।
ई-अस्पताल
ई-अस्पताल एक व्यापक अस्पताल सूचना प्रबंधन प्रणाली है, जो स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सीय, नैदानिक, प्रशासनिक तथा रोगी सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करती है। त्रिपुरा में इसके सफल क्रियान्वयन के अतिरिक्त, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, त्रिपुरा राज्य केंद्र ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में ई-अस्पताल के स्थानीय संस्करण के विकास एवं संचालन में भी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय योगदान दिया है। डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत पूर्णतः डिजिटल बनने वाला यह देश का पहला सार्वजनिक अस्पताल है। यह प्रणाली देश के सबसे व्यस्त स्वास्थ्य संस्थानों में से एक का संचालन समर्थ बनाती है, जहाँ प्रतिदिन 10,000 से अधिक रोगियों का पंजीकरण, 15,000 से अधिक बाह्य रोगी अपॉइंटमेंट तथा लगभग एक लाख प्रयोगशाला जाँचें संपन्न होती हैं। यह इसकी व्यापक क्षमता, विश्वसनीयता और सुदृढ़ता का प्रमाण है।
ई-रक्त बैंक
ई-रक्त बैंक प्रणाली रक्त बैंकों की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए विकसित की गई है। यह रक्तदाता पंजीकरण, रक्त संग्रह, भंडार प्रबंधन, परीक्षण तथा रक्त इकाइयों के निर्गमन जैसी संपूर्ण प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करती है। इसके माध्यम से रक्त सेवाओं की उपलब्धता, पारदर्शिता और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों को रक्त भंडार का बेहतर प्रबंधन करने तथा आवश्यकता के समय रोगियों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने में सुविधा मिली है।
चित्र: 3.3 : ई-रक्त बैंक वेबसाइट का डैशबोर्ड
परिवहन
एनआईसी त्रिपुरा ने वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, प्रदूषण निगरानी, यातायात प्रवर्तन तथा नागरिक सेवाओं को शामिल करते हुए प्रमुख डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों के कार्यान्वयन के माध्यम से परिवहन प्रशासन का आधुनि कीकरण किया है। राज्य के सभी जिला परिवहन कार्यालयों में संचालित 'वाहन' एवं 'सारथी' प्लेटफ़ॉर्म ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण प्रमाण-पत्र, परमिट तथा फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाते हैं। अगस्त 2025 तक इन प्लेटफ़ॉर्मों के माध्यम से 8.47 लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण तथा 6.08 लाख से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। पीयूसीसी प्रणाली 189 केंद्रों के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र के निर्गमन एवं निगरानी का डिजिटलीकरण करती है, जिसके अंतर्गत 18.59 लाख से अधिक प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं। ई-चालान प्रणाली, जो वर्चुअल कोर्ट के साथ एकीकृत है, इलेक्ट्रॉनिक चालान जारी करने तथा यातायात उल्लंघनों के ऑनलाइन निस्तारण के माध्यम से यातायात कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन को सुदृढ़ बनाती है। इसके अंतर्गत 22.22 लाख से अधिक चालान जारी किए जा चुके हैं। नागरिक 'एम-परिवहन' मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस एवं पंजीकरण प्रमाण-पत्र सहित विभिन्न परिवहन सेवाओं का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। इन सभी पहलों ने सेवा वितरण को सरल बनाया है, नियामकीय अनुपालन को सुदृढ़ किया है तथा राज्यभर में परिवहन सेवाओं को अधिक सुलभ बनाया है।
कार्यालय उत्पादकता
ई-राजपत्र
ई-राजपत्र मंच त्रिपुरा सरकार के राजपत्रों, अधिनियमों, नियमों, विनियमों, शासनादेशों, राजपत्र अधिसूचनाओं, परिपत्रों तथा अन्य वैधानिक दस्तावेजों का एक केंद्रीकृत डिजिटल भंडार है। यह नागरिकों, सरकारी अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों को एक ही मंच पर प्रमाणित सरकारी प्रकाशनों तक सरल और सुविधाजनक पहुँच उपलब्ध कराता है। यह पहल केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिवालय तथा उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अनुपालन सरलीकरण एवं विनियमन-उन्मूलन पहल (द्वितीय चरण) के अनुरूप है तथा पारदर्शिता, सुगमता और कागजरहित प्रशासन को बढ़ावा देती है। इस मंच में सरकारी दस्तावेजों के प्रस्तुतिकरण, परीक्षण, अनुमोदन तथा प्रकाशन के लिए सुरक्षित कार्यप्रवाह की व्यवस्था है, जिससे केवल प्रमाणित दस्तावेज ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाते हैं। इसकी एक प्रमुख विशेषता कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सहायक है, जो उपयोगकर्ताओं को पारंपरिक कुंजीशब्द आधारित खोज के स्थान पर स्वाभाविक भाषा में प्रश्न पूछकर सरकारी प्रकाशनों में आवश्यक जानकारी खोजने की सुविधा प्रदान करता है। यह सहायक ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन, अर्थ-आधारित खोज तथा रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन तकनीकों का उपयोग करते हुए स्कैन किए गए तथा डिजिटल दोनों प्रकार के दस्तावेजों से प्रासंगिक जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे विधिक एवं प्रशासनिक सूचनाओं तक पहुँच पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और प्रभावी हो गई है।
स्थिर सरकारी प्रकाशनों को एक बुद्धिमान और खोजयोग्य ज्ञान भंडार में परिवर्तित कर यह मंच प्रमाणिक सूचनाओं तक सार्वजनिक पहुँच को सुदृढ़ करता है, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाता है तथा राज्य के डिजिटल सुशासन पारितंत्र को और अधिक मजबूत बनाता है।
ई-ऑफिस त्रिपुरा
ई-ऑफिस त्रिपुरा ने अपने कार्यप्रवाह-आधारित ई-फाइल सिस्टम के माध्यम से सरकारी फाइल प्रबंधन में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है, जिससे ग्राम पंचायतों एवं ग्राम समितियों सहित 2,536 सरकारी कार्यालयों और निदेशालयों में पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा मिला है। वर्ष 2017 में इसके कार्यान्वयन के बाद से यह प्लेटफ़ॉर्म 17,700 से अधिक उपयोगकर्ताओं को सेवाएँ प्रदान कर चुका है, जिससे आधिकारिक पत्राचार की गति एवं दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। स्पैरो प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली को लगभग 850 त्रिपुरा सिविल सेवा अधिकारियों के लिए भी लागू किया गया है, जबकि स्पैरो (आईपीआर) के अंतर्गत अन्य राज्य संवर्ग सेवाओं के 5,500 से अधिक अधिकारी शामिल हैं।
ई-मंत्रिमंडल
कागजरहित शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से त्रिपुरा सरकार ने सितंबर 2023 में मंत्रिमंडल बैठकों के डिजिटल प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की ई-मंत्रिमंडल प्रणाली को अपनाया। यह मंच मंत्रिमंडल संबंधी ज्ञापनों के ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण, परीक्षण तथा अनुमोदन की सुविधा प्रदान करता है और पारंपरिक कागजी प्रक्रिया का स्थान सुरक्षित डिजिटल कार्यप्रवाह से लेता है। इसके कार्यान्वयन के साथ त्रिपुरा इस प्रणाली को अपनाने वाला देश का चौथा तथा उत्तर-पूर्व क्षेत्र का दूसरा राज्य बन गया। यह पहल राज्य में ई-कार्यालय के व्यापक उपयोग को सुदृढ़ करते हुए पारदर्शी, दक्ष और पर्यावरण-अनुकूल शासन व्यवस्था को बढ़ावा देती है।
चित्र: 3.4 : माननीय मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा द्वारा 27 सितंबर, 2023 को अगरतला में एनआईसी के ई-कैबिनेट समाधान का शुभारंभ किया गया
त्रिपुरा दर्पण
वर्ष 2017 में प्रारंभ किया गया त्रिपुरा दर्पण मुख्यमंत्री तथा जिला मजिस्ट्रेटों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक समय पर निगरानी के लिए डैशबोर्ड उपलब्ध कराता है। जिला मजिस्ट्रेट डैशबोर्ड राज्य के सभी आठ जिलों में लागू किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 19 प्रमुख सरकारी योजनाओं के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों की निगरानी के लिए एकीकृत विश्लेषणात्मक डैशबोर्ड उपलब्ध हैं, जो तथ्य-आधारित और प्रभावी निर्णय-निर्माण में सहायक सिद्ध होते हैं।
स्वागतम्
स्वागतम् एक ऑनलाइन आगंतुक प्रबंधन प्रणाली है, जिसके माध्यम से नागरिक सरकारी अधिकारियों से मिलने के लिए ऑनलाइन समय निर्धारित कर सकते हैं। वर्तमान में यह सूचना प्रौद्योगिकी विभाग तथा सचिवालय प्रशासन विभाग में लागू है और लगभग 200 अधिकारियों को इससे जोड़ा जा चुका है। इस पहल के पूरक के रूप में आधार-सक्षम बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली राज्य के 82 सरकारी कार्यालयों में लागू की गई है, जिसके अंतर्गत लगभग 14,300 अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं।
कार्यपालक सेवा अभिलेख
कार्यपालक सेवा अभिलेख प्रणाली त्रिपुरा सिविल सेवा, पुलिस सेवा, वन सेवा तथा अन्य 23 राज्य संवर्गीय सेवाओं के अधिकारियों के सेवा अभिलेखों का डिजिटल भंडार है। वर्तमान में इस प्रणाली में 5,800 से अधिक अधिकारियों के अभिलेख सुरक्षित हैं। साथ ही, सेवा संबंधी विवरणों के समय पर अद्यतन के लिए संदेश और ई-मेल आधारित सूचना सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रवेशद्वार
त्रिपुरा का इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रवेशद्वार उन्नत संगणन विकास केंद्र की इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर सेवा के साथ एकीकृत है। इसके माध्यम से ई-कार्यालय, स्पैरो, लाभार्थी प्रबंधन प्रणाली, मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली, राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली, ई-जमी तथा ई-जिला सहित अनेक प्रमुख ई-शासन अनुप्रयोगों में सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके कार्यान्वयन के बाद से 12.20 लाख से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जिससे कागजरहित प्रशासन और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन को उल्लेखनीय बल मिला है।
राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली
राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली राज्य में राशन कार्डों के प्रबंधन के लिए आधारभूत डिजिटल डेटाबेस के रूप में कार्य करती है। यह परिवार के सदस्यों को जोड़ने, हटाने, विभाजित करने, स्थानांतरित करने तथा अभिलेखों के अद्यतन जैसी सभी सेवाएँ एक ही मंच पर उपलब्ध कराती है। यह प्रणाली लाभार्थी प्रबंधन प्रणाली तथा आधार-सक्षम इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन प्रणाली के साथ एकीकृत है, जिससे लाभार्थियों की सटीक पहचान सुनिश्चित होती है और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो पाता है। वर्तमान में इसमें 9.90 लाख से अधिक राशन कार्ड परिवारों तथा 37.08 लाख से अधिक सदस्यों का विवरण उपलब्ध है। परिवार के सभी मुखियाओं का आधार से शत-प्रतिशत सत्यापन भी सुनिश्चित किया जा चुका है।
खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन प्रणाली
खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन प्रणाली भारतीय खाद्य निगम के गोदामों तथा अन्य खरीद केंद्रों से उचित मूल्य की दुकानों तक खाद्यान्न की आपूर्ति का डिजिटलीकरण करती है, जिससे संपूर्ण सार्वजनिक वितरण प्रणाली की वास्तविक समय पर निगरानी संभव हो पाती है। इसके साथ कार्यरत उचित मूल्य दुकान स्वचालन प्रणाली आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक बिक्री केंद्र उपकरणों का उपयोग करते हुए लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित करती है। इन प्रणालियों के लागू होने के बाद से 7.81 लाख से अधिक आपूर्ति चालान एवं प्राप्ति रसीदों का प्रसंस्करण किया जा चुका है तथा 2,070 से अधिक उचित मूल्य की दुकानों पर 99.2 प्रतिशत आधार-प्रमाणित वितरण सुनिश्चित किया गया है। इससे खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
चित्र: 3.5 : फीस्ट वेबसाइट का होम पेज
धान खरीद प्रणाली
धान खरीद प्रणाली किसानों के सत्यापन के लिए राशन कार्ड और भू-अभिलेखों का एकीकरण करती है। यह प्रणाली देय राशि की स्वचालित गणना करती है तथा लाभार्थी प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए भुगतान सुनिश्चित करती है। वर्ष 2021 के खरीफ विपणन सत्र से अब तक इस प्रणाली में 1.17 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके माध्यम से 2.25 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की गई है तथा 446 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई है।
राजस्व
ई-जिला त्रिपुरा
सेवाप्लस मंच पर विकसित ई-जिला त्रिपुरा नागरिकों को एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाएँ उपलब्ध कराता है। इस मंच पर 16 प्रकार के प्रमाण-पत्रों एवं लाइसेंसों के साथ-साथ विधिक मापविज्ञान, गृह (अग्निशमन), उद्योग, वन तथा भू-अभिलेख जैसे विभागों से संबंधित 21 अतिरिक्त लाइसेंस एवं अनापत्ति प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए जाते हैं। यह प्रणाली राज्य प्राप्ति पोर्टल, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, डिजिलॉकर, साझा सेवा केंद्र तथा मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली के साथ एकीकृत है। साथ ही, यह गृह मंत्रालय के सहयोग से ब्रू प्रवासियों के पुनर्वास संबंधी भुगतान का भी प्रबंधन करती है। वर्ष 2015 में प्रारंभ होने के बाद से इस पोर्टल पर 8.20 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 8.12 लाख से अधिक आवेदनों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है।
डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनि कीकरण कार्यक्रम
डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनि कीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, त्रिपुरा ने भू-प्रशासन के लिए एक समेकित डिजिटल पारितंत्र विकसित किया है। इसमें ई-जमी के माध्यम से भू-अभिलेख, ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली, राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली तथा वेब-आधारित भू-मानचित्रण प्रणाली को एकीकृत किया गया है। इन प्रणालियों ने भूमि पंजीकरण और नामांतरण की प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और अधिक सुलभ बनाया है। अब तक 4.13 लाख से अधिक दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीकरण, 8.12 लाख से अधिक नामांतरण मामलों का निस्तारण, 13.67 लाख से अधिक अधिकार अभिलेख प्रतियों तथा 2.21 लाख से अधिक प्रमाणित भू-मानचित्रों का निर्गमन किया जा चुका है।
इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्प भंडार
इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्प भंडार, इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्प पत्रों के सत्यापन, उपयोग तथा मिलान के लिए विकसित एक सुरक्षित डिजिटल मंच है। यह राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली, पंजीकरण पोर्टल तथा राज्य प्राप्ति पोर्टल के साथ एकीकृत है, जिससे स्टाम्प शुल्क और इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्प से संबंधित लेनदेन का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित होता है। वर्ष 2019 से अब तक इस प्रणाली के माध्यम से 36 लाख से अधिक इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्प का प्रसंस्करण किया जा चुका है तथा 436 करोड़ रुपये से अधिक का स्टाम्प शुल्क संग्रहित किया गया है। इससे स्टाम्प प्रशासन में पारदर्शिता और कार्यकुशलता को उल्लेखनीय बढ़ावा मिला है।
भू-प्रशासन
ई-जमी
ई-जमी डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनि कीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत राजस्व विभाग, त्रिपुरा सरकार के लिए विकसित एक वेब-आधारित एकल-खिड़की प्रणाली है। यह राज्य की आधिकारिक डिजिटल भू-अभिलेख प्रणाली के रूप में कार्य करती है और पारंपरिक हस्तलिखित अभिलेखों के स्थान पर सुरक्षित डिजिटल कार्यप्रवाह उपलब्ध कराती है। इसके माध्यम से नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षर युक्त अधिकार अभिलेख की प्रतियाँ, ऑनलाइन नामांतरण की स्थिति, भू-मानचित्र का अवलोकन, भूखंड के इतिहास का सत्यापन तथा भूमि मापन इकाइयों के रूपांतरण जैसी सुविधाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर एकीकरण
ई-जमी को राजस्व प्रशासन से आगे बढ़कर प्रमाणित भूमि अभिलेखों के उपयोग का विस्तार करने के लिए अनेक राष्ट्रीय डिजिटल पहलों के साथ एकीकृत किया गया है।
- एग्रीस्टैक: डिजिटल फसल सर्वेक्षण के लिए फ़ार्मप्लॉट आईडी सृजन, यूनिफाइड लैंड एपीआई इंटीग्रेशन तथा भू-स्थानिक डेटा का आदान-प्रदान।
- पीएम गति शक्ति: अवसंरचना नियोजन को समर्थन देने के लिए रिकॉर्ड ऑफ राइट्स तथा भू-स्थानिक डेटा का एकीकरण।
- आरबीआईएच यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस: डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड ऋण के लिए भूखंड एवं स्वामित्व का स्वचालित सत्यापन, साथ ही दोहरे वित्तपोषण को रोकने के लिए फ्लैग-मार्किंग की सुविधा।
- सीएलयू पोर्टल: भूमि डायवर्जन (यूएस-20) अनुरोधों का ऑनलाइन प्रसंस्करण।
सरकारी प्रणालियों के साथ इंटरऑपरेबिलिटी
विभिन्न विभागों के बीच निर्बाध सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए ई-जमी अनेक सरकारी प्लेटफ़ॉर्मों के साथ डेटा का आदान-प्रदान करता है।
- उन्नति पोर्टल: भूखंड स्वामित्व सत्यापन, नामांतरण सेवाएँ, राजस्व न्यायालय मामलों का पंजीकरण, वाद की स्थिति की ट्रैकिंग तथा विलेख संबंधी जानकारी।
- नक्शा: शहरी भूमि सर्वेक्षण के लिए भूमि अभिलेख एवं भू-स्थानिक डेटा का साझा उपयोग।
- विभागीय एपीआई: शहरी विकास, डीडब्ल्यूएस, टीएसईसीएल, सिविल न्यायालय, ई-डिस्ट्रिक्ट, स्वागतम, सीएससी, जनजातीय कल्याण विभाग तथा राजस्व न्यायालयों के साथ एकीकरण, जिससे बिज़नेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान के अंतर्गत विभिन्न पहलों को समर्थन प्राप्त होता है।
चित्र: 3.6 : एआई असि स्टटेंट सहित त्रिपुरा ई-गज़ट वेबसाइट का होम पेज
वन अधिकार प्रबंधन
एनआईसी त्रिपुरा ने वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समर्पित अनुप्रयोग भी विकसित किए हैं।
- फॉरेस्ट राइट्स: यह मंच वन अधिकार पट्टों का आधिकारिक डेटाबेस संधारित करता है, जिसमें भूमि का विवरण, पट्टा निर्गमन तथा प्रमाण-पत्र जनरेशन से संबंधित जानकारी शामिल होती है।
- मायपट्टा: यह मंच वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अस्वीकृत दावों का आधिकारिक रिपॉजिटरी है। यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वैधानिक रिपोर्टिंग, न्यायिक एवं प्रशासनिक अनुपालन, निगरानी तथा ऐतिहासिक अभिलेखों के पुनर्प्राप्ति कार्य में सहायता प्रदान करता है।
गृह एवं न्याय
ई-न्यायालय
ई-न्यायालय प्रकरण सूचना प्रणाली ने त्रिपुरा के सभी न्यायालयों में न्यायिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया है। इसके माध्यम से वादों की स्थिति, वाद सूची, न्यायालय के आदेश, निर्णय तथा स्वचालित सूचनाएँ ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती हैं। यह प्रणाली राज्य के सभी आठ जिलों के 16 न्यायालय परिसरों में स्थित 82 न्यायालयों में संचालित है। इसके साथ राष्ट्रीय सेवा एवं प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग प्रणाली, ई-फाइलिंग, ई-भुगतान तथा आभासी न्यायालय जैसी सेवाएँ भी एकीकृत हैं, जिनसे नागरिकों और वादकारियों को न्यायिक सेवाएँ अधिक सरलता और सुविधा के साथ उपलब्ध हो रही हैं। अगस्त 2025 तक इस प्रणाली में 1.94 लाख से अधिक वाद पंजीकृत किए जा चुके थे, जिनमें से 1.51 लाख से अधिक का निस्तारण किया जा चुका है।
ई-अभियोजन
ई-अभियोजन प्रणाली पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच समन्वय को सुदृढ़ बनाती है। इसके माध्यम से आरोप-पत्रों की इलेक्ट्रॉनिक जाँच, विधिक अभिमत तथा प्रकरणों की प्रगति का डिजिटल प्रबंधन किया जाता है। अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क प्रणाली तथा ई-न्यायालय के साथ एकीकृत यह प्रणाली राज्य के सभी आठ जिलों में संचालित है। डिजिटल कार्यप्रवाह और वास्तविक समय में सूचना के आदान-प्रदान के माध्यम से इसने अभियोजन प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया है।
ई-विधि विज्ञान
ई-विधि विज्ञान प्रणाली राज्य की विधि विज्ञान प्रयोगशाला के कार्यों का डिजिटलीकरण करती है। इसके माध्यम से प्रकरणों का पंजीकरण, वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रियाएँ तथा परीक्षण प्रतिवेदन तैयार करने का कार्य ऑनलाइन संचालित किया जाता है। अगस्त 2025 तक इस प्रणाली में 12,200 से अधिक विधि विज्ञान संबंधी प्रकरण पंजीकृत किए जा चुके थे, जिससे उनकी प्रभावी निगरानी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हुआ है।
ई-कारागार
ई-कारागार एक क्लाउड-आधारित कारागार प्रबंधन प्रणाली है, जिसे राज्य की सभी 13 जेलों में लागू किया गया है। यह प्रणाली बंदियों के प्रबंधन, आगंतुकों के अनुरोध, शिकायत निवारण तथा आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े विभिन्न संस्थानों के बीच सूचना के आदान-प्रदान को डिजिटल माध्यम से संचालित करती है। इससे कारागार प्रशासन अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और दक्ष बना है.
अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली
अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली, अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क प्रणाली, ई-न्यायालय, ई-कारागार, ई-विधि विज्ञान तथा ई-अभियोजन जैसी विभिन्न प्रणालियों को “एक डेटा, एक प्रविष्टि” के सिद्धांत पर एकीकृत करती है। यह विभिन्न न्यायिक एवं कानून प्रवर्तन संस्थाओं के बीच सुरक्षित सूचना आदान-प्रदान सुनिश्चित करती है, जिससे दोहराव समाप्त होता है, विभागीय समन्वय बेहतर होता है तथा संपूर्ण आपराधिक न्याय प्रक्रिया में तथ्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
आव्रजन, वीज़ा एवं विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग प्रणाली
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, त्रिपुरा राज्य केंद्र, गृह मंत्रालय की महत्वपूर्ण मिशन मोड परियोजना 'आव्रजन, वीज़ा एवं विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग प्रणाली' के संचालन में भी सहयोग प्रदान करता है। इस प्रणाली के माध्यम से विदेशी नागरिकों का ऑनलाइन पंजीकरण, विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) की सेवाएँ, संस्थागत एस-फॉर्म एवं सी-फॉर्म, ऑनलाइन नागरिकता आवेदन, राष्ट्रीयता सत्यापन, वीज़ा सुरक्षा अनुमति तथा श्री करतारपुर साहिब तीर्थयात्रा पंजीकरण जैसी अनेक सेवाएँ डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं।
चित्र: 3.7 : क्षेत्रीय टेक-सक्षम कार्यशाला के दौरान त्रिपुरा के मुख्य सचिव द्वारा मुख्य वक्तव्य दिया गया
शिक्षा
ई-परामर्श
ई-परामर्श प्रणाली औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, डिप्लोमा पाठ्यक्रमों, संयुक्त प्रवेश परीक्षाओं, नर्सिंग तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एकीकृत ऑनलाइन मंच उपलब्ध करती है। यह प्रणाली अभ्यर्थी पंजीकरण, शुल्क भुगतान, मेरिट सूची तैयार करने, परामर्श प्रक्रिया तथा सीट आवंटन सहित संपूर्ण प्रवेश प्रक्रिया का डिजिटल प्रबंधन करती है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 5,000 संस्थानों में 1.10 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के प्रवेश सफलतापूर्वक संपन्न किए जा चुके हैं।
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल केंद्रीय क्षेत्र, केंद्र प्रायोजित तथा राज्य सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समग्र डिजिटल मंच उपलब्ध कराता है। यह आवेदन प्राप्त करने, सत्यापन, अनुमोदन तथा छात्रवृत्ति वितरण की संपूर्ण प्रक्रिया को डिजिटल बनाता है। साथ ही, एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली के माध्यम से योजनाओं की प्रभावी निगरानी भी सुनिश्चित करता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान इस पोर्टल पर 1.36 lakh से अधिक छात्रवृत्ति आवेदनों का प्रसंस्करण किया गया तथा 61.52 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई।
ई-ग्रंथालय
ई-ग्रंथालय एक क्लाउड-आधारित समेकित पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली है, जो सूचीकरण, पुस्तक निर्गमन एवं वापसी, डिजिटल पुस्तकालय सेवाओं तथा ऑनलाइन सार्वजनिक अभिगम सूची जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराती है। यह प्रणाली त्रिपुरा के 70 से अधिक पुस्तकालयों में लागू की जा चुकी है, जिससे पुस्तकालय संसाधनों और डिजिटल ज्ञान सामग्री तक नागरिकों की पहुँच अधिक सरल और प्रभावी हुई है।
नेटवर्क एवं अवसंरचना सेवाएँ
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, त्रिपुरा राज्य केंद्र ने एक सुदृढ़, सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना विकसित की है, जो राज्य के डिजिटल सुशासन पारितंत्र की आधारशिला है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र नेटवर्क, राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क, त्रिपुरा राज्य व्यापक क्षेत्र नेटवर्क तथा अगरतला नगर क्षेत्र नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों तथा अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थानों को निर्बाध नेटवर्क संपर्क उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में यह नेटवर्क लगभग 250 एनआईसी नेटवर्क उपयोगकर्ताओं, 6,000 राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क उपयोगकर्ताओं, 8,000 त्रिपुरा राज्य व्यापक क्षेत्र नेटवर्क उपयोगकर्ताओं तथा 4,100 से अधिक अगरतला नगर क्षेत्र नेटवर्क उपयोगकर्ताओं को सेवाएँ प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त, त्रिपुरा सचिवालय, उच्च न्यायालय, विधानसभा, राजभवन तथा अन्य प्रमुख सरकारी कार्यालयों को भी समर्पित नेटवर्क संपर्क उपलब्ध कराया गया है।
राज्य के सभी आठ जिलों को एक गीगाबिट प्रति सेकंड क्षमता वाले प्राथमिक नेटवर्क तथा अलग इंटरनेट सेवा प्रदाता के माध्यम से समान क्षमता वाले वैकल्पिक नेटवर्क से जोड़ा गया है, जिससे सेवाओं की निरंतर उपलब्धता और व्यवधान की स्थिति में भी निर्बाध संचालन सुनिश्चित होता है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, त्रिपुरा राज्य केंद्र मिनी डेटा सेंटर, राज्य डेटा सेंटर, कंटेनर डेटा सेंटर तथा राष्ट्रीय डेटा सेंटर के माध्यम से 42 महत्वपूर्ण वेब अनुप्रयोगों की सुरक्षित और विश्वसनीय होस्टिंग भी उपलब्ध कराता है। साइबर सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एंडपॉइंट सूचीकरण तथा इंटरनेट प्रोटोकॉल पता प्रबंधन को राष्ट्रीय इंटरनेट प्रोटोकॉल पता प्रबंधन पोर्टल के माध्यम से सशक्त किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, राज्य में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का व्यापक नेटवर्क भी संचालित किया जा रहा है, जिसमें राज्य मुख्यालय तथा सभी जिला मुख्यालयों सहित 36 पंजीकृत स्टूडियो शामिल हैं। इस नेटवर्क के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 1,600 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सत्र आयोजित किए जाते हैं, जो प्रशासनिक कार्यों, सुशासन, प्रशिक्षण तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
चित्र: 3.8 : क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह
विकासाधीन अनुप्रयोग
त्रिपुरा के डिजिटल गवर्नेंस इकोसिस्टम को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निम्नलिखित पहलें वर्तमान में विकासाधीन हैं:
- वामिस और ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के बीच द्वि-दिशात्मक इंटीग्रेशन, ताकि टेंडर बीओक्यू विवरण एवं चयनित बोलीदाता की दरों का निर्बाध आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जा सके।
- ई-वेेंडर पोर्टल: ठेकेदारों के संपूर्ण जीवनचक्र के एंड-टू-एंड प्रबंधन के लिए एक व्यापक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, जिसमें निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध हैं:
- पैन, जीएसटी-आईआरपी तथा बैंक अकाउंट एपीआई इंटीग्रेशन के माध्यम से ऑनलाइन ठेकेदार पंजीकरण एवं सत्यापन।
- सुरक्षित एवं पेपरलेस बैंक गारंटी प्रोसेसिंग के लिए एनईएसएल इंटीग्रेशन के साथ इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी का निर्माण।
- ऑनलाइन साइनिंग एवं सुरक्षित अभिलेखीकरण के साथ डिजिटल एग्रीमेंट प्रबंधन।
- कार्य एवं आपूर्ति आदेश प्रबंधन के लिए जेपनिक के साथ एकीकरण, जिससे ठेकेदार अपने आवंटित आदेश ऑनलाइन देख सकें।
- ऑनलाइन इनवॉइस जनरेशन, बिल सबमिशन तथा बिल की स्थिति की रियल-टाइम ट्रैकिंग।
- टेंडर आमंत्रित करने वाले प्राधिकरणों द्वारा लेटर ऑफ इंटेंट तैयार करने एवं एग्रीमेंट प्रबंधन के लिए विभागीय वर्कफ़्लो।
उपलब्धियाँ
लाभार्थी प्रबंधन प्रणाली को डिजिटल सुशासन तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में उल्लेखनीय योगदान के लिए व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त हुई है। इस प्रणाली को वर्ष 2021-22 का मुख्यमंत्री सिविल सेवा पुरस्कार, वर्ष 2024 का 15वाँ राष्ट्रीय डिजिटल परिवर्तन पुरस्कार तथा वर्ष 2025 का ईटी गवर्नमेंट डिजिटेक पुरस्कार प्रदान किया गया। ये सम्मान जनकल्याणकारी योजनाओं के पारदर्शी, दक्ष और व्यापक क्रियान्वयन में इस प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हैं।
आगे की राह
एनआईसी त्रिपुरा ने परस्पर कार्यक्षम (इंटरऑपरेबल) प्लेटफ़ॉर्म तथा सुदृढ़ आईसीटी अवसंरचना के माध्यम से प्रमुख क्षेत्रों को आपस में जोड़कर एकीकृत डिजिटल गवर्नेंस की मजबूत नींव तैयार की है। इस आधार को और सशक्त बनाते हुए अब डेटा-संचालित गवर्नेंस को बढ़ावा देने, नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने तथा विभिन्न सरकारी प्रणालियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को और सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना, पेपरलेस प्रशासन तथा उभरती प्रौद्योगिकियों पर निरंतर बल देते हुए एनआईसी त्रिपुरा राज्य सरकार को पारदर्शी, दक्ष एवं सुलभ सार्वजनिक सेवाएँ उपलब्ध कराने में अपना सहयोग जारी रखेगा तथा डिजिटल इंडिया के विज़न को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
द्वारा संपादित: लाल बहादरु सिहं
लेखक / योगदानकर्ता
अचिन्त्य कुमार दे वरिष्ठ तकनीकी निदेशक व एसआईओ ak.de[at]nic[dot]in
पिनाकी आचार्य वरिष्ठ तकनीकी निदेशक व एसआईओ pinaki.a[at]nic[dot]in
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी
एनआईसी त्रिपुरा राज्य केंद्र
ब्लॉक–4, तृतीय तल, नया सचिवालय भवन, न्यू कैपिटल कॉम्प्लेक्स
खेजरुबागान, अगरतला, त्रिपुरा – 799010