राज्य से जुलाई 2026

राजस्थान नागरिकों तक डिजिटल सेतु

द्वारा संपादित: विनोद कुमार गर्ग
दिल्ली दिल्ली

एनआईसी राजस्थान ने पूरे राज्य में प्रमुख ई-गवर्नेंस पहलों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नए आईसीटी समाधानों के माध्यम से सेंटर ने नागरिक सेवाओं की व्यवस्था को बेहतर बनाया तथा कार्यकुशलता और पारदर्शिता बढ़ाई है। गवर्नेंस और निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स जैसी नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। नेटवर्किंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं के अलावा, एनआईसी राजस्थान ने आई.एफ.एम.एस, पहचान, संस्था आधार, पी.सी.टी.एस, शालादर्पण और ई-पंजीयन जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म विकसित किए हैं। इन प्लेटफ़ॉर्मों के सरकारी ऐप्लिकेशन के साथ एकीकरण से समन्वय बेहतर हुआ है तथा सेवाओं का वितरण अधिक सरल और सुव्यवस्थित हुआ है। एनआईसी राजस्थान के योगदान को व्यापक सराहना मिली है और उन्हें कई नेशनल ई-गवर्नेंस अवॉर्ड प्राप्त हुए हैं।

र्ष 1988 में राजस्थान में अपनी स्थापना के बाद से एनआईसी राज्य के डिजिटल सुशासन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राज्य सचिवालय, सभी जिला कलेक्टर कार्यालयों तथा विभिन्न विभागीय परियोजना कार्यालयों में अपनी उपस्थिति के माध्यम से एनआईसी राजस्थान ने भारत के सबसे बड़े एवं भौगोलिक दृष्टि से विविध राज्यों में से एक के लिए सुदृढ़ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अवसंरचना विकसित की है।

एनआईसी राजस्थान ने राज्य सचिवालय, जिला कलेक्टर कार्यालयों तथा 100 से अधिक सरकारी संस्थानों को उच्च गति नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने वाला सुरक्षित संचार नेटवर्क विकसित एवं अनुरक्षित किया है। केंद्र नेटवर्क अवसंरचना, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ई-मेल सेवाएँ, क्लाउड आधारित समाधान तथा एंड-टू-एंड सूचना प्रौद्योगिकी सहायता जैसी महत्त्वपूर्ण डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराता है, जिससे राज्यभर में विभिन्न विभागों के बीच निर्बाध समन्वय तथा प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण सुनिश्चित होता है।

इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि जयपुर में अनुप्रयोग सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (आर.सी.ओ.ई.ए.एस) की स्थापना है। यह केंद्र सात राज्यों में एनआईसी द्वारा विकसित ई-गवर्नेंस अनुप्रयोगों की सुरक्षा जाँच तथा सुरक्षित अनुप्रयोग विकास प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डिजिटल अवसंरचना, साइबर सुरक्षा, कनेक्टिविटी तथा एंटरप्राइज प्रौद्योगिकी सेवाओं के क्षेत्र में अपने निरंतर प्रयासों के माध्यम से एनआईसी राजस्थान राज्य के डिजिटल परिवर्तन को नई गति प्रदान कर रहा है।

राज्य में आईसीटी पहलें

एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आई.एफ.एम.एस)

एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आई.एफ.एम.एस) राजस्थान सरकार की सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के लिए प्रमुख डिजिटल प्रणाली है। यह बजट प्रबंधन, कोषागार संचालन, राजस्व प्राप्ति, व्यय प्रबंधन, निर्माण कार्यों के प्रबंधन, लेखांकन, पेंशन तथा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सहित संपूर्ण वित्तीय कार्यप्रवाह के लिए एकीकृत समाधान उपलब्ध कराती है। ऑनलाइन राजस्व संग्रहण एवं वास्तविक समय में मिलान सुनिश्चित करने के लिए यह ई-ग्रास के साथ एकीकृत है, जिससे राज्य की वित्तीय व्यवस्था अधिक पारदर्शी, दक्ष एवं जवाबदेह डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित हुई है।

ई-अबकारी प्रणाली का सांख्यिकीय अवलोकन चित्र: 2.1 : एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आई.एफ.एम.एस 3.0)
प्रमुख मॉड्यूल
  1. बजट प्रबंधन – बजट का आकलन, आवंटन, पुनर्विनियोजन तथा निगरानी
  2. कोषागार प्रबंधन – सरकारी भुगतानों एवं प्राप्तियों का प्रसंस्करण तथा प्राधिकरण
  3. राजस्व प्रबंधन (ई-ग्रास/आरएमएस) – सरकारी राजस्व का ऑनलाइन संग्रहण एवं मिलान
  4. कर्मचारी प्रबंधन – वेतन प्रसंस्करण, कर्मचारी स्व-सेवा तथा पेरोल प्रबंधन
  5. पेंशन प्रबंधन – सिविल एवं सामाजिक पेंशन का प्रसंस्करण तथा वितरण
  6. निर्माण कार्य प्रबंधन – प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश एवं भुगतान
  7. लेखांकन एवं मिलान – सरकारी खातों का वास्तविक समय में संकलन एवं मिलान
  8. विक्रेता एवं लाभार्थी प्रबंधन – पंजीकरण, चालान की निगरानी तथा भुगतान की मॉनिटरिंग
  9. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) एवं इलेक्ट्रॉनिक भुगतान – एकीकृत बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से निधियों का सुरक्षित अंतरण

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डी.आई.एल.आर.एम.पी)

राजस्थान में डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डी.आई.एल.आर.एम.पी) एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हुआ है, जो भूमि अभिलेखों के कुशल, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित प्रबंधन को सुनिश्चित करता है। इस एकीकृत व्यवस्था में निम्नलिखित प्रमुख प्लेटफॉर्म सम्मिलित हैं—

अपना खाता

यह नागरिक-केंद्रित पोर्टल डिजिटल अधिकार अभिलेख (आरओआर), नामांतरण विवरण तथा ई-हस्ताक्षरित भूमि अभिलेखों तक ऑनलाइन पहुँच प्रदान करता है। इसके माध्यम से नामांतरण, सीमांकन तथा भूमि विभाजन जैसी सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है।

ई-धरती

यह कार्यप्रवाह-आधारित प्लेटफॉर्म कागजरहित आवेदन, डिजिटल सत्यापन एवं इलेक्ट्रॉनिक अनुमोदन के माध्यम से भूमि नामांतरण प्रक्रिया को स्वचालित बनाता है। प्रणाली में सिंगल साइन-ऑन (एसएसओ), ई-साइन, क्यूआर कोड तथा शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं का एकीकरण किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है तथा सेवाओं का वितरण अधिक त्वरित हुआ है।

ई-अबकारी प्रणाली का सांख्यिकीय अवलोकन चित्र: 2.2 : राजस्थान विधानसभा में नेवा के तहत पेपरलेस कार्यवाही
भू-नक्शा

यह भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित भू-अभिलेख मानचित्रण समाधान है, जो भूमि पार्सलों के डिजिटलीकरण, जियो-रेफरेंसिंग एवं दृश्यांकन की सुविधा प्रदान करता है। अपना खाता एवं ई-धरती के साथ एकीकृत यह प्रणाली स्थानिक एवं पाठ्य भूमि अभिलेखों का समन्वय सुनिश्चित करती है तथा यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यू.एल.पी.आई.एन) आधारित भूमि पहचान का समर्थन करती है।

इन तीनों प्लेटफॉर्मों के माध्यम से राजस्थान में भूमि प्रशासन के लिए एक सुरक्षित, एकीकृत एवं प्रौद्योगिकी-संचालित ढाँचा विकसित हुआ है, जिससे भूमि अभिलेखों की उपलब्धता, शुद्धता एवं पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

ई-पंजीयन

ई-पंजीयन राजस्थान में संपत्ति पंजीकरण एवं स्टाम्प प्रशासन के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। नागरिक-केंद्रित इस प्रणाली ने संपूर्ण पंजीकरण प्रक्रिया का डिजिटलीकरण करते हुए इसे अपना खाता के साथ एकीकृत किया है, जिससे संपत्ति के पंजीकरण के साथ ही भूमि अभिलेखों का स्वचालित नामांतरण सुनिश्चित होता है। यह प्रणाली राज्य के सभी 661 उप-पंजीयक कार्यालयों (एसआरओ) में संचालित है तथा अब तक 12.5 करोड़ से अधिक दस्तावेज़ों का पंजीकरण कर 43,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित कर चुकी है।

प्रमुख विशेषताएँ
  • विक्रय, उपहार एवं त्यागपत्रों का स्वचालित विलेख निर्माण
  • चयनित उप-पंजीयक कार्यालयों में कहीं से भी पंजीकरण की सुविधा
  • संपत्ति के स्थान पर ऑन-साइट पंजीकरण
  • कार्यालय में आने के लिए समय स्लॉट बुकिंग
  • अप्रयुक्त अथवा अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क के लिए फेसलेस धनवापसी
  • ई-ग्रास एवं ई-धरती के साथ एकीकरण, जिससे वित्तीय लेनदेन एवं भूमि अभिलेखों का अद्यतन सुगमता से होता है

एक खास इनोवेशन आधारित वैल्यूएशन सिस्टम, जिसे 26 में लागू किया गया है। यह सिस्टम जियो-टैग किए गए रेट्स का इस्तेमाल करके प्रॉपर्टी की कीमत अपने-आप तय करता है। यह प्लेटफॉर्म, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और अकाउंटेंट जनरल ऑफिस जैसी एजेंसियों के साथ सुरक्षित डेटा शेयरिंग की सुविधा भी देता है।

‘ई-पंजीयन’ सिटीज़न मोबाइल ऐप से प्रॉपर्टी की जानकारी डिजिटल रूप से जमा करने, आधारित प्रॉपर्टी मैपिंग, जियो-टैग की गई तस्वीरें लेने, एप्लीकेशन को रियल-टाइम में ट्रैक करने और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट शेड्यूल करने की सुविधा मिलती है। इसके साथ ही,‘स्टाम्प वेंडर’ मोबाइल ऐप इन्वेंटरी मैनेजमेंट, बिक्री का रिकॉर्ड रखने और रिपोर्टिंग प्रोसेस को डिजिटल बनाता है, जिससे स्टाम्प एडमिनिस्ट्रेशन में काम करने की क्षमता और पारदर्शिता बढ़ती है।

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श्री वी. श्रीनिवास, आईएएस
मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार

पी.सी.टी.एस

गर्भावस्था, शिशु ट्रैकिंग एवं स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन प्रणाली (पी.सी.टी.एस) राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की एक व्यापक डिजिटल प्रणाली है, जिसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना तथा ग्राम स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण को सुदृढ़ बनाना है। यह प्रणाली वर्ष 2009 से सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तथा अप्रैल 2023 से निजी अस्पतालों में भी संचालित है।

इसके माध्यम से-

  • गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों का पूर्ण टीकाकरण होने तक ट्रैकिंग
  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं तथा विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी
  • टीकों एवं औषधियों के भंडार का वास्तविक समय में प्रबंधन

पी.सी.टी.एस के प्रभावी क्रियान्वयन से मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 318 से घटकर 86, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 63 से घटकर 29 हो गई है। वहीं प्रसवपूर्व जाँच (एएनसी) का कवरेज 28 प्रतिशत से बढ़कर 93 प्रतिशत तथा संस्थागत प्रसव 45 प्रतिशत से बढ़कर 98 प्रतिशत हो गए हैं।

यह प्रणाली पहचान पोर्टल, राज-पोषण, शालादर्पण, प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (आरसीएच) पोर्टल तथा स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एच.एम.आई.एस.) सहित विभिन्न प्रमुख प्लेटफॉर्मों के साथ एकीकृत है, जिससे विभागों के बीच डेटा का निर्बाध आदान-प्रदान तथा स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक प्रभावी वितरण सुनिश्चित होता है।

आशासॉफ्ट

आशासॉफ्ट मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) के कार्य निष्पादन की निगरानी तथा 56 स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) को सक्षम बनाने वाला कार्यप्रवाह-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह प्रणाली स्वीकृति एवं भुगतान प्रक्रिया का डिजिटलीकरण करती है, जिससे भुगतान में लगने वाला समय कई महीनों से घटकर एक सप्ताह से भी कम रह गया है। साथ ही, इसने पारदर्शिता, जवाबदेही एवं कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

ओजस

ओजस (ऑनलाइन जेएसवाई, राजश्री और शुभ लक्ष्मी पेमेेंट सिस्टम) महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाओं—जैसे जेएसवाई, राजश्री, शुभलक्ष्मी तथा लाडो प्रोत्साहन योजना—के लिए यह एक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्लेटफ़ॉर्म है। यह ‘माँ वाउचर योजना’ के अंतर्गत निजी सोनोग्राफी केंद्रों को भुगतान करने में भी सहायता करता है। इस प्रणाली ने 1.7 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ₹3,300 करोड़ से अधिक की राशि हस्तांतरित करने में सहायता प्रदान की है, जिससे लाभार्थियों को समय पर तथा पारदर्शी तरीके से लाभ मिल पाता है|

राजहेल्थ

राजहेल्थ राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए विकसित एक समग्र मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली है, जो राज्य के 20,000 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों के कर्मचारियों का प्रबंधन करती है। यह प्रणाली पदस्थापन, स्थानांतरण, परिवीक्षा पूर्ण करना, वेतन निर्धारण, ऑनलाइन कार्यभार ग्रहण तथा कार्य निष्पादन प्रतिवेदन जैसी प्रमुख मानव संसाधन प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर पारदर्शी, कागजरहित एवं दक्ष कार्यबल प्रबंधन सुनिश्चित करती है।

एकीकृत शालादर्पण

एकीकृत शालादर्पण राजस्थान के विद्यालयी शिक्षा विभाग की डिजिटल आधारभूत प्रणाली है, जो राज्य के 72,000 से अधिक राजकीय विद्यालयों में विद्यालयी अवसंरचना, नामांकन, शैक्षणिक गतिविधियों, मानव संसाधन तथा छात्र कल्याण योजनाओं के प्रबंधन एवं निगरानी के लिए एक समग्र निर्णय-सहायक प्रणाली उपलब्ध कराती है।

इस प्लेटफॉर्म पर 76 लाख से अधिक विद्यार्थियों तथा 4.4 लाख शिक्षकों एवं कर्मचारियों का वास्तविक समय का डेटा उपलब्ध है, जिससे यह देश की सबसे बड़ी शैक्षिक सूचना प्रणालियों में से एक बन गया है। यह कक्षा 5 एवं 8 की परीक्षाओं के संचालन, परिणाम प्रसंस्करण, कार्मिक भर्ती एवं पदस्थापन, स्टाफिंग पैटर्न तैयार करने, शिक्षक इंटर्नशिप आवंटन, विद्यालय निरीक्षण, सिविल कार्यों की निगरानी, व्यावसायिक शिक्षा प्रबंधन तथा विद्यालय से बाहर के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने जैसी प्रमुख शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का समर्थन करता है।

शालादर्पण छात्रवृत्ति, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक एवं कार्यपुस्तिका वितरण, साइकिल एवं लैपटॉप वितरण, परिवहन वाउचर, वर्दी हेतु प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), राष्ट्रीय आय-सह-मेधा छात्रवृत्ति योजना (एन.एम.एम.एस), गार्गी पुरस्कार तथा बालिका प्रोत्साहन योजनाओं सहित विभिन्न छात्र कल्याण योजनाओं के संपूर्ण प्रशासन का भी समर्थन करता है, जिससे लाभार्थियों का पारदर्शी प्रबंधन तथा समयबद्ध लाभ वितरण सुनिश्चित होता है।

राजस्थान प्राइवेट स्कूल पोर्टल

राजस्थान प्राइवेट स्कूल पोर्टल (राजपीएसपी) राज्य के 36,000 से अधिक निजी विद्यालयों के लिए एक समग्र डिजिटल सुशासन मंच है। यह पोर्टल मान्यता, संबद्धता, निरीक्षण, अनुपालन निगरानी तथा शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के क्रियान्वयन को पारदर्शी एवं कागजरहित कार्यप्रवाह के माध्यम से संचालित करता है।

इस प्लेटफॉर्म का एक प्रमुख घटक आरटीई प्रवेश एवं प्रतिपूर्ति प्रणाली है, जिसके माध्यम से आरटीई अधिनियम के अंतर्गत प्रवेश प्राप्त लगभग 14 लाख विद्यार्थियों का प्रबंधन किया जाता है। इस पोर्टल के माध्यम से निजी विद्यालयों को 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिपूर्ति वितरित की जा चुकी है, जिसमें केवल पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान लगभग 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान शामिल है। इससे निधियों का दक्ष, पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रबंधन सुनिश्चित हुआ है।

ज्ञानसंकल्प

ज्ञानसंकल्प राजस्थान के डिजिटल शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने वाला एक अभिनव मंच है, जो राजकीय विद्यालयों को दानदाताओं, परोपकारी संस्थाओं, कॉर्पोरेट संगठनों तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों से जोड़ता है।

यह प्लेटफॉर्म विद्यालयी अवसंरचना, डिजिटल शिक्षण संसाधन, स्वच्छता सुविधाएँ, पुस्तकालय, खेल अवसंरचना तथा बालिका शिक्षा के लिए सहयोग उपलब्ध कराने में सहायता करता है। शालादर्पण के साथ एकीकृत यह प्रणाली दान, परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा उनके परिणामों की वास्तविक समय में निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करती है। साथ ही, यह शिक्षा के क्षेत्र में सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करती है तथा परोपकारी योगदानों के प्रभाव का डेटा-आधारित मूल्यांकन भी उपलब्ध कराती है।

श्रम विभाग प्रबंधन प्रणाली

एल.डी.एम.एस राजस्थान सरकार के श्रम विभाग का एक समग्र डिजिटल शासन मंच है, जिसे श्रम प्रशासन का आधुनिकीकरण करने तथा एकीकृत डिजिटल प्रणाली के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। एलडीएमएस श्रमिकों, प्रतिष्ठानों, ठेकेदारों, निरीक्षणों तथा श्रमिक कल्याण योजनाओं से संबंधित एक केंद्रीकृत वास्तविक समय डेटाबेस उपलब्ध कराता है। इससे प्रभावी विनियमन, आंकड़ा-आधारित निर्णय-निर्माण तथा बेहतर नीतिगत योजना सुनिश्चित होती है। यह प्रणाली श्रमिक एवं प्रतिष्ठान पंजीकरण, अनुज्ञापत्र प्रबंधन, संविदा श्रमिक प्रबंधन, निरीक्षण, अनुपालन निगरानी, शिकायत निवारण तथा प्रबंधन सूचना प्रणाली प्रतिवेदन सहित श्रम प्रशासन की संपूर्ण प्रक्रिया का डिजिटलीकरण करती है।

यह मंच वित्तीय सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, मातृत्व लाभ, पेंशन, आवास सहायता, कौशल विकास तथा दुर्घटना राहत जैसी श्रमिक कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी सरल बनाता है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था के साथ एकीकरण के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को लाभों का पारदर्शी, सुरक्षित एवं समयबद्ध वितरण सुनिश्चित किया जाता है।

नेवा

राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) एक कार्यप्रवाह-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है, जो विधानसभाओं के कामकाज को पेपरलेस बनाता है। राजस्थान विधानसभा ने विधायी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने, कार्यकुशलता बढ़ाने तथा पारदर्शिता में सुधार करने के लिए नेवा को लागू किया है। इस परियोजना में सदस्यों के लिए आईपैड, लैपटॉप, पीसी, नेटवर्क अवसंरचना तथा लगभग 400 लैन नोड्स स्थापित करना शामिल है। पुराने रिकॉर्ड, जिनमें प्रश्न, प्रस्ताव, विधेयक, सदस्यों की प्रोफ़ाइल तथा सदन की कार्यवाही शामिल है, को डिजिटल बनाकर इस प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे एक आधुनिक, पेपरलेस विधायी इकोसिस्टम तैयार हुआ है।

ई-अबकारी प्रणाली का सांख्यिकीय अवलोकन चित्र: 2.3 : राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री ने राज्य की ऐतिहासिक ‘ऑटो-म्यूटेशन’ (स्वतः नामांतरण) सेवा का शुभारंभ किया, जो संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को भू-अभिलेख प्रबंधन प्रणाली के साथ निर्बाध रूप से जोड़ती है
राजस्थान विधानसभा पोर्टल

राजस्थान विधानसभा पोर्टल के माध्यम से सदस्यों की प्रोफ़ाइल, कार्यसूची, प्रश्न, प्रस्ताव, विधेयक, सदन की कार्यवाही, समिति बैठकों, प्रेस कतरनों तथा ई-बुलेटिन सहित विधायी गतिविधियों से संबंधित व्यापक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

एप्राइज़

एप्राइज़ (विधानसभा कार्यवाही सूचना प्रणाली) विधानसभा की कार्यवाहियों का डिजिटल भंडार है, जो वर्ष 1952 से अब तक के सभी सत्रों की संशोधित एवं असंशोधित कार्यवाहियों को सत्रवार एवं तिथिवार उपलब्ध कराता है। इसमें पूर्ण-पाठ (फुल-टेक्स्ट) खोज की सुविधा भी उपलब्ध है।

ओएसिस

ओएसिस (ऑनलाइन आंसरिंग इन्फॉर्मेशन सिस्टम) के माध्यम से विधानसभा सदस्यों द्वारा पूछे गए तारांकित, अतारांकित तथा अल्प सूचना प्रश्नों एवं विभागों द्वारा दिए गए उत्तरों तक ऑनलाइन पहुँच उपलब्ध होती है। यह विधायी प्रश्नों एवं उत्तरों का एक खोजयोग्य डिजिटल भंडार भी उपलब्ध कराता है।

राजस्थान उच्च न्यायालय

एनआईसी राजस्थान, राजस्थान हाईकोर्ट और निचली अदालतों को शुरू से आखिर तक आईसीटी सपोर्ट देता है। नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एन.जे.डी.जी.) से जुड़ा ‘केस इंफॉर्मेशन सिस्टम’ (सीआईएस 3.1), डिजिटल केस फाइलिंग, जांच-पड़ताल, कॉज़ लिस्ट और ऑर्डर बनाने में मदद करता है। नागरिक ऑनलाइन केस का स्टेटस, ऑर्डर और फैसले देख सकते हैं; इसमें हाईकोर्ट के 15 लाख से ज़्यादा और निचली अदालतों के 10 लाख से ज़्यादा फैसले शामिल हैं। कोर्ट की जानकारी डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और मोबाइल ऐप के ज़रिए तुरंत मिलती है, जबकि राजस्थान हाईकोर्ट का मोबाइल ऐप वकीलों और केस लड़ने वालों को केस के रिकॉर्ड देखने और केस डायरी को अच्छे से मैनेज करने की सुविधा देता है।

पीडीएस राजस्थान

राजस्थान सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने एक पूर्णतः डिजिटल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) लागू की है, जो राशन कार्ड प्रबंधन से लेकर खाद्यान्न वितरण तक संपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा वास्तविक समय की निगरानी सुनिश्चित करती है।

नागरिक सिंगल साइन-ऑन (एसएसओ) तथा ई-मित्र के माध्यम से नए राशन कार्ड, संशोधन, डुप्लीकेट राशन कार्ड जारी कराने तथा राशन कार्ड समर्पण सहित सभी सेवाओं का ऑनलाइन लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आधार से जुड़े राशन कार्डों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एकीकृत प्रबंधन प्रणाली (आई.एम.पी.डी.एस) के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर लाभों की अंतर-परिचालनीयता तथा पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित होती है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एन.एफ.एस.ए) तथा गिव-अप अभियान पोर्टल पात्र लाभार्थियों के सत्यापन, नए पात्र परिवारों को शामिल करने तथा अपात्र लाभार्थियों द्वारा स्वैच्छिक रूप से लाभ छोड़ने की सुविधा प्रदान करते हैं। वहीं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन प्रणाली भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों से उचित मूल्य की दुकानों तक खाद्यान्न की आवाजाही की जियो-टैगिंग, मार्ग निगरानी तथा ऑनलाइन प्राप्ति की सुविधा उपलब्ध कराकर संपूर्ण वितरण श्रृंखला में जवाबदेही सुनिश्चित करती है।

यह प्रणाली आई.एम.पी.डी.एस, एन.एफ.एस.ए, डिजिलॉकर तथा एक राष्ट्र एक राशन कार्ड (ओ.एन.ओ.आर.सी) जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों के साथ एकीकृत है। राजस्थान ओ.एन.ओ.आर.सी को अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में से एक है, जिससे लाभार्थी आधार आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से देश में कहीं भी रियायती खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, एनआईसी राजस्थान ने किसानों के लिए खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने तथा समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद पोर्टल भी विकसित किया है।

पहचान (सिविल पंजीकरण प्रणाली)

पहचान राजस्थान में जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण के लिए सत्य के एकल स्रोत के रूप में कार्य करता है। प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग 12,500 से अधिक रजिस्ट्रार, 3,500+ उप-रजिस्ट्रार, 2,500+ निजी अस्पताल और 80,000 ई-मित्र कियोस्क द्वारा किया जाता है। नागरिक डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित, व्हाट्सएप सहित इलेक्ट्रॉनिक रूप से वितरित क्यूआर कोड-सक्षम प्रमाणपत्रों के साथ, पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच सकते हैं। प्लेटफ़ॉर्म पर 4.15 करोड़ से अधिक पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। पहचान को आधार, जन आधार, स्वास्थ्य प्रणालियों और सामाजिक कल्याण योजनाओं के साथ एकीकृत किया गया है, जो मैनुअल प्रमाणपत्र प्रसंस्करण को समाप्त करते हुए नवजात शिशुओं के लिए स्वचालित आधार नामांकन और मृत व्यक्तियों के लिए निष्क्रियकरण को सक्षम बनाता है।

संस्था आधार

संस्था आधार राजस्थान में विभिन्न संस्थाओं के पंजीकरण एवं प्रबंधन के लिए विकसित एक डिजिटल मंच है। यह संस्थाओं के ऑनलाइन पंजीकरण, आवेदन की स्थिति की निगरानी तथा संस्थागत अभिलेखों की खोज जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराता है। प्रणाली संस्थाओं से संबंधित सूचनाओं का केंद्रीकृत एवं प्रमाणिक डेटाबेस उपलब्ध कराते हुए सेवा वितरण में पारदर्शिता, दक्षता एवं सुगमता सुनिश्चित करती है।

ई-ग्राम

मुख्यमंत्री ई-ग्राम राजस्थान के गाँवों के समग्र विकास एवं वास्तविक समय की निगरानी के लिए विकसित एक एकीकृत वेब-आधारित मंच है। यह 25 विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त आँकड़ों का एकीकरण कर ग्रामीण अवसंरचना, सार्वजनिक सेवाओं तथा सरकारी योजनाओं की व्यापक जानकारी उपलब्ध कराता है। यह मंच पारदर्शी प्रशासन, प्रभावी योजना निर्माण, विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण को सक्षम बनाते हुए सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देता है।

अनुप्रयोग सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (आर.सी.ओ.ई.ए.एस)

जयपुर में स्थापित अनुप्रयोग सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (आर.सी.ओ.ई.ए.एस), राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमन एवं दीव, दादरा एवं नगर हवेली, मध्य प्रदेश तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सहित आठ राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में एनआईसी द्वारा विकसित अनुप्रयोगों की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह केंद्र वेब अनुप्रयोगों, एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) तथा मोबाइल अनुप्रयोगों का सुरक्षा परीक्षण एवं नियमित पेनेट्रेशन परीक्षण संचालित करता है, जिससे सरकारी डिजिटल सेवाओं की साइबर सुरक्षा और अधिक मजबूत होती है।

निक्की चैटबॉट एवं वॉयसबॉट सेवा

निक्की एनआईसी राजस्थान द्वारा विकसित एक बहुभाषी एवं वॉयस-सक्षम चैटबॉट प्लेटफॉर्म है, जिसे बिना किसी अतिरिक्त प्रोग्रामिंग प्रयास के विभिन्न सरकारी पोर्टलों के साथ एकीकृत किया जा सकता है। यह हिंदी, अंग्रेज़ी तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का समर्थन करता है और बुद्धिमान नियम-आधारित उत्तर प्रणाली के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को सटीक जानकारी प्रदान करता है।

यह प्लेटफॉर्म राज्य के 100 से अधिक पोर्टलों पर कार्यरत है। इसमें एक उपयोगकर्ता-अनुकूल कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से ज्ञान भंडार का प्रबंधन एवं निरंतर अद्यतन सरलता से किया जा सकता है।

ई-परिवहन

ई-परिवहन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की मिशन मोड परियोजना है, जो सरकार-से-सरकार (जी-टू-जी), सरकार-से-नागरिक (जी-टू-सी) तथा सरकार-से-व्यवसाय (जी-टू-बी) सेवाओं को केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सी.एम.वी.आर) तथा राज्य के नियमों के अनुरूप एकीकृत रूप में उपलब्ध कराती है।

राजस्थान की परिवहन प्रणाली में 89 क्षेत्रीय/जिला परिवहन कार्यालय, 3,500 से अधिक वाहन डीलर, 350 ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थान, 83 स्वचालित फिटनेस केंद्र, 13 स्वचालित ड्राइविंग परीक्षण ट्रैक तथा 1,500 ई-चालान पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) उपकरण शामिल हैं। राज्य में 2.29 करोड़ वाहन पंजीकरण तथा 1.35 करोड़ डिजिटलीकृत ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध हैं और इस प्रणाली के माध्यम से प्रतिवर्ष 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। प्रत्येक माह लगभग 1 लाख नए वाहन पंजीकृत होते हैं, 65,000 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाते हैं तथा 5 लाख से अधिक परिवहन सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।

ई-अबकारी प्रणाली का सांख्यिकीय अवलोकन चित्र: 2.4 : माननीय उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा द्वारा जयपुर में ‘वाहन लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम’ का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया गया
ई-रवन्ना एकीकरण

यह सुविधा खान विभाग की ई-रवन्ना प्रणाली से अधिक भार वाले वाहनों का डेटा स्वतः आईटीएमएस को उपलब्ध कराती है, जिससे मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत नोटिस एवं ई-चालान स्वतः जारी किए जा सकते हैं। इससे प्रवर्तन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं डेटा-आधारित बनती है।

स्वचालित हाइपोथिकेशन समाप्ति (एचपीटी)

यह सुविधा वित्तीय संस्थानों से ऋण समाप्ति की सूचना स्वतः प्राप्त करती है। नागरिक हाइपोथिकेशन समाप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और स्वीकृति स्वतः प्रदान की जाती है। इससे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय जाने की आवश्यकता समाप्त होती है तथा सेवा अधिक त्वरित एवं कागजरहित बनती है।

राजस्थान राजस्व न्यायालय निगरानी प्रणाली

यह परियोजना राज्य के सभी राजस्व न्यायालयों के आधुनिकीकरण के लिए एकीकृत सूचना प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने पर केंद्रित है। इसके माध्यम से न्यायिक कार्यवाही के विभिन्न चरणों में बयान का डिजिटल अभिलेखन, नोटिस एवं अंतिम आदेश जारी करना तथा वाद सूची का स्वचालित निर्माण जैसी प्रक्रियाएँ संचालित की जाती हैं।

इस समाधान में दो मॉड्यूल विकसित किए गए हैं—एक राजस्व अधिकारियों के लिए तथा दूसरा नागरिकों एवं अधिवक्ताओं के लिए। राजस्व अधिकारियों का मॉड्यूल पूर्णतः विकसित कर राजस्व मंडल (बीओआर) के समक्ष सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया जा चुका है, जबकि नागरिक मॉड्यूल का विकास वर्तमान में प्रगति पर है।

रलैम्स

राजस्थान भूमि आवंटन प्रबंधन प्रणाली (रलैम्स) राजस्व विभाग द्वारा विकसित एक डिजिटल मंच है, जिसका उद्देश्य सरकारी भूमि आवंटन प्रक्रिया का आधुनिकीकरण एवं सरलीकरण करना है। यह प्रणाली सार्वजनिक अवसंरचना, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संस्थानों, औद्योगिक विकास, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं तथा अन्य सार्वजनिक प्रयोजन की परियोजनाओं के लिए सरकारी भूमि के आवंटन की प्रक्रिया को कागजरहित, पारदर्शी एवं प्रौद्योगिकी-संचालित बनाती है।

जिला स्तर की प्रमुख पहलें

पढ़ाई विद एआई

पढ़ाई विद एआई टोंक जिले के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 10 के गणित शिक्षण को सुदृढ़ बनाने के लिए विकसित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षण मंच है। यह मंच विद्यार्थियों को व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव, प्रश्नों के त्वरित समाधान, स्वचालित अभ्यास सामग्री तथा द्विभाषी व्याख्या उपलब्ध कराता है, जिससे अवधारणात्मक समझ एवं विद्यार्थियों की सहभागिता में वृद्धि होती है।

इस प्लेटफॉर्म का उपयोग 11,500 से अधिक सक्रिय विद्यार्थी कर रहे हैं। वास्तविक समय के विश्लेषण, डिजिटल उपस्थिति तथा प्रदर्शन डैशबोर्ड के माध्यम से यह शिक्षण परिणामों, जवाबदेही तथा परीक्षा तैयारी को अधिक प्रभावी बनाता है।

गंग नहर विनियमन कम्प्यूटरीकरण प्रणाली

श्रीगंगानगर की गंग नहर विनियमन कम्प्यूटरीकरण प्रणाली नहर संचालन, जल स्तर, सिंचाई कार्यक्रम तथा ग्राम स्तर के अभिलेखों से संबंधित वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराती है। इसका कृषि मॉड्यूल मौसम पूर्वानुमान, मंडी भाव, फसल संबंधी परामर्श तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करता है, जिससे किसानों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

इस प्रणाली के पूरक के रूप में ई-बारी किसानों को उनके सिंचाई जल आवंटन की जानकारी उपलब्ध कराती है, जबकि ई-अबियाना जल कर के डिजिटल संग्रहण एवं प्रबंधन की सुविधा प्रदान कर सिंचाई प्रशासन में पारदर्शिता एवं कार्यकुशलता को बढ़ावा देती है।

मूलभूत डिजिटल अवसंरचना

राज्य में सुशासन को सुदृढ़ बनाने के लिए एनआईसी राजस्थान ने व्यापक डिजिटल अवसंरचना विकसित की है। केंद्र 5,000 से अधिक निकनेट नोड का प्रबंधन करता है, जो राज्य सचिवालय, जिला कलेक्टर कार्यालयों, विभिन्न सरकारी कार्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ते हैं।

राज्य सचिवालय, उच्च न्यायालय की पीठों, जिला कलेक्टर कार्यालयों तथा जिला न्यायालयों में उच्च गुणवत्ता वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जिससे विभिन्न स्तरों पर प्रभावी संवाद एवं समन्वय सुनिश्चित होता है।

एनआईसी राजस्थान 3,000 से अधिक आधिकारिक ई-मेल खातों का प्रबंधन करता है, 100 से अधिक सरकारी पोर्टलों एवं अनुप्रयोगों का संचालन एवं अनुरक्षण करता है तथा बढ़ती संगणन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मिनी क्लाउड का संचालन करता है।

इसके अतिरिक्त, लगभग 300 लीज़्ड लाइन कनेक्शनों के माध्यम से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) उदयपुर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर, मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एम.एन.आई.टी) जयपुर, राजस्थान राज्य डेटा केंद्र (आर.एस.डी.सी ) तथा राजस्थान स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (आर.एस.डब्ल्.यूए.एन) सहित प्रमुख संस्थानों को उच्च गति कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है।

अन्य प्रमुख डिजिटल पहलें

पहल उद्देश्य क्रियान्वयन की प्रमुख विशेषताएँ
ई-हॉस्पिटल समग्र अस्पताल प्रबंधन प्रणाली एम्स जोधपुर तथा राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर में लागू।
जीवन प्रमाण पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र निर्बाध सेवा वितरण के लिए ई-मित्र के साथ एकीकृत।
ई-प्रिजन कारागार प्रशासन, आगंतुक प्रबंधन एवं ई-मुलाकात सेवाएँ 22 लाख से अधिक पूर्व बंदियों तथा 21,000 वर्तमान बंदियों का डिजिटलीकरण; लगभग 9,000 ई-मुलाकात सत्र आयोजित।
ई-प्रोक्योरमेंट सरकारी खरीद के लिए एंड-टू-एंड ई-निविदा प्रणाली निविदा आमंत्रण प्राधिकरणों एवं निविदाकारों के लिए मंच; प्रतिवर्ष 1 लाख से अधिक निविदाएँ प्रकाशित।
सार राजस्थान का सांख्यिकीय सार तैयार करने हेतु अनुप्रयोग 80 से अधिक विभागों द्वारा उपयोग।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) विभिन्न क्षेत्रों के औद्योगिक उत्पादन सूचकांकों का निर्माण विनिर्माण, खनन एवं विद्युत क्षेत्रों के लिए राज्यव्यापी क्रियान्वयन।
प्राइस स्टैटिस्टिक्स इन राजस्थान (पीएसआर) थोक, खुदरा, निर्माण सामग्री एवं पशुधन मूल्य सूचकांकों की निगरानी सभी जिलों एवं कृषि उपज मंडी समितियों में लागू।
राजस्थान एग्रीकल्चर स्टैटिस्टिक्स (राजस) कृषि सांख्यिकी का समग्र प्रबंधन सभी जिलों में फसल आकलन, वर्षा, कृषि उपज मूल्य, कृषि मजदूरी एवं संबंधित आँकड़ों का प्रबंधन।
राज-पोषण एकीकृत बाल विकास सेवा योजनाओं के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) मंच सभी जिलों में ब्लॉक स्तर तक लागू।
मीडिया प्रबंधन प्रणाली मीडिया समाचार, छायाचित्र एवं वीडियो का केंद्रीकृत भंडार अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय तथा एनआईसी राजस्थान में लागू।
ई-ऑफिस कार्यालय स्वचालन एवं डिजिटल फाइल प्रबंधन राजस्थान विधानसभा में कागजरहित कार्यालय व्यवस्था के लिए लागू।
आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (ए.ई.बी.ए.एस) बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रबंधन 200 से अधिक केंद्रीय एवं राज्य सरकारी विभागों द्वारा उपयोग।

इन पहलों ने राजस्थान के डिजिटल सुशासन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करते हुए पारदर्शिता, प्रशासनिक दक्षता, डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण तथा नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को नई गति प्रदान की है।

महत्त्वपूर्ण मोबाइल एप्लिकेशन

मोबाइल ऐप उपयोगकर्ता प्रमुख विशेषताएँ
बजट राजस्थान नागरिक, सरकारी अधिकारी राजस्थान सरकार के बजट दस्तावेज़, आवंटन एवं वित्तीय जानकारी तक पहुँच।
संस्था आधार नागरिक, संस्थाएँ ऑनलाइन पंजीकरण, आवेदन की स्थिति तथा संस्था आधार अभिलेखों की खोज।
एकीकृत कार्य निगरानी प्रणाली (आई.डब्ल्यू.एम.एस) सरकारी अधिकारी विकास कार्यों की तकनीकी एवं वित्तीय प्रगति की वास्तविक समय में निगरानी।
पहचान नागरिक जन्म, मृत्यु एवं विवाह प्रमाण-पत्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन, डाउनलोड एवं स्थिति की जानकारी।
गर्भावस्था, शिशु ट्रैकिंग एवं स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन प्रणाली (पी.सी.टी.एस) स्वास्थ्य अधिकारी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, प्रसवपूर्व एवं प्रसवोत्तर जाँच, टीकाकरण, कार्ययोजना तथा स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी।
राजस्थान उच्च न्यायालय नागरिक, अधिवक्ता वाद सूची, डिस्प्ले बोर्ड, वाद की स्थिति, फाइलिंग संबंधी त्रुटियाँ तथा प्रमाणित प्रतियों की जानकारी।
ई-ग्रास नागरिक, करदाता डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड सहित विभिन्न बैंकिंग माध्यमों से राजस्थान सरकार को कभी भी, कहीं से भी ऑनलाइन भुगतान।

ये मोबाइल एप्लिकेशन राजस्थान की डिजिटल सुशासन पहलों को नागरिकों तक सीधे पहुँचाते हुए सेवाओं की सुलभता, पारदर्शिता एवं उपयोगकर्ता अनुभव को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।

सम्मान एवं उपलब्धियाँ

ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में नवाचार, प्रभाव तथा नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के लिए एनआईसी राजस्थान की विभिन्न डिजिटल पहलों को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर व्यापक मान्यता प्राप्त हुई है।

  • गर्भावस्था, शिशु ट्रैकिंग एवं स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन प्रणाली (पी.सी.टी.एस), गंग नहर विनियमन प्रणाली तथा आशासॉफ्ट को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
  • पी.सी.टी.एस, प्राइस स्टैटिस्टिक्स पोर्टल, पहचान (सिविल पंजीकरण प्रणाली), संस्था आधार, ज्ञानसंकल्प तथा एकीकृत शालादर्पण को सीएसआई-निहिलेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
  • वित्तीय क्षेत्र में ई-गवर्नेंस उत्कृष्टता के लिए जेम्स ऑफ डिजिटल इंडिया पुरस्कार प्रदान किया गया है।
  • एनआईसी राजस्थान की विभिन्न परियोजनाओं को स्कॉच पुरस्कार, टेक्नोलॉजी सभा पुरस्कार तथा ई-गव राजस्थान पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।

ये सम्मान सुशासन, सेवा वितरण तथा नागरिक सहभागिता को प्रौद्योगिकी के माध्यम से सुदृढ़ बनाने की दिशा में एनआईसी राजस्थान के निरंतर प्रयासों एवं उत्कृष्ट योगदान का प्रमाण हैं।

आगे की राह

एनआईसी राजस्थान नई टेक्नोलॉजी और मॉडर्न एप्लीकेशन आर्किटेक्चर को अपनाकर अगली पीढ़ी के डिजिटल गवर्नेंस इनिशिएटिव पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। फाइनेंस, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए AI-इनेबल्ड सॉल्यूशन विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम से काम की जानकारी प्राप्त करने के लिए एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जा रहा है। सेंटर नागरिकों पर केंद्रित मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से m-गवर्नेंस का विस्तार भी कर रहा है और माइक्रोसर्विसेज-आधारित आर्किटेक्चर में बदलाव करके प्रमुख e-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म को आधुनिक बना रहा है, जिससे स्केलेबिलिटी, इंटरऑपरेबिलिटी और सर्विस रेजिलिएंस में सुधार हो रहा है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें

राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी
एनआईसी राजस्थान
8318, एनडब्ल्यू ब्लॉक, सचिवालय
जयपुर – 302005, राजस्थान

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