रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआई टी मद्रास) ने भारतीय नौसेना और अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड के साथ एक रणनीतिक सहयोग समझौता किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य अगली पीढ़ी की रक्षा प्रणालियों के स्वदेशी विकास को तेज करना है।
यह त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एम ओ यू) माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में 25 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित भारतीय नौसेना के “स्वावलंबन 2025” कार्यक्रम के दौरान विनिमय किया गया।
यह साझेदारी आईआईटी मद्रास की अनुसंधान एवं विकास विशेषज्ञता, भारतीय नौसेना की संचालन संबंधी अंतर्दृष्टि, और अपोलो माइक्रो सिस्टम्स की औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षमताओं को एक साथ लाती है, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न के अनुरूप एक समेकित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित होगा।
आई आई टी मद्रास के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर पी. ए. रामकृष्णा ने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य है कि “सशस्त्र बलों की वर्तमान और उभरती तकनीकी चुनौतियों का संयुक्त रूप से समाधान किया जाए” और प्रयोगशाला में विकसित नवाचारों को शीघ्रता से रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोग-योग्य समाधानों में परिवर्तित किया जाए।
यह सहयोग मुख्य रूप से एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, प्रिसिशन गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम्स, हाई-एनर्जी आयुध प्रणालियों, तथा उभरती बहु-डोमेन तकनीकों पर केंद्रित रहेगा।
आईआई टी मद्रास इस पहल में रिसर्च एंकर के रूप में कार्य करेगा और कॉन्सेप्ट डेवलपमेंट, प्रोटोटाइपिंग तथा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी निर्माण का नेतृत्व करेगा। वहीं, भारतीय नौसेना के नेवल आर्मामेंट इंस्पेक्शन मिशन-क्रिटिकल परिचालन इनपुट प्रदान करेगा, उपयोगकर्ता आवश्यकताओं को परिभाषित करेगा और नौसेना मानकों के अनुरूप सत्यापन और परीक्षण करेगा।
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड प्रौद्योगिकी विकास और विनिर्माण भागीदार के रूप में कार्य करेगा। चार दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, यह संस्था अनुसंधान परिणामों को मजबूत और बड़े पैमाने पर उत्पादन योग्य रक्षा प्रणालियों में बदलने पर ध्यान केंद्रित करेगी। कंपनी का फोकस तेज इंजीनियरिंग, सिस्टम एकीकरण और बड़े पैमाने पर विनिर्माण पर रहेगा, ताकि इन्हें शीघ्र ही परिचालन उपयोग में लाया जा सके।
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री करूणाकर रेड्डी ने कहा, “आईआई टी मद्रास की शोध उत्कृष्टता, हमारी विनिर्माण क्षमता और डीजीएनएआई की संचालन विशेषज्ञता का संयोजन रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करता है।”
यह साझेदारी भारत के रक्षा नवाचार परिदृश्य को मजबूत करेगी, रक्षा मंत्रालय के आत्मनिर्भरता लक्ष्यों में योगदान देगी और भारत की स्थिति को स्वदेशी रक्षा तकनीक और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में सुदृढ़ करेगी।