अंतरराष्ट्रीय ई-गवर्नेंस उत्पाद जनवरी 2026

डीजीलॉकर पर अब मिलेगा पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड — नागरिकों को सुविधा और सुरक्षा का लाभ

  • स्रोत - प्रेस सूचना ब्यूरो
India Highlights Inclusive Approach to AI Governance at UN Headquarters

नागरिकों की सुविधा और डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय माईटी के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (एन. ई.जी.डी) ने विदेश मंत्रालय (एम.ई.ए.) के सहयोग से डीजीलॉकर प्लेटफ़ॉर्म पर पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड पीवीआर उपलब्ध कराया है। यह पहल डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता, सुविधा और भरोसा बढ़ाएगी।

डीजीलॉकर एक सुरक्षित क्लाउड-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है, जो डिजिटल दस्तावेज़ों को जारी करने, संग्रहित करने, साझा करने और सत्यापित करने की सुविधा देता है। अब नागरिक अपने पासपोर्ट सत्यापन रिकॉर्ड को भी यहीं से सुरक्षित रूप से एक्सेस कर सकेंगे — बिना किसी कागज़ी दस्तावेज़ या मैन्युअल प्रक्रिया के।

सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही नागरिक का पीवीआर जारी किए गए दस्तावेज़ सेक्शन में स्वतः उपलब्ध हो जाएगा, जिसे वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप दोनों माध्यमों से एक्सेस किया जा सकेगा।

यह सुविधा नागरिकों के लिए कई मायनों में उपयोगी है

  • हमेशा और कहीं भी उपलब्ध: अब पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड कभी भी, कहीं भी देखा और डाउनलोड किया जा सकता है।
  • तेज़ और पेपरलेस प्रक्रिया: डिजिटल सत्यापन से यात्रा, नौकरी और अन्य औपचारिकताएँ तेज़ी से पूरी होंगी।
  • सुरक्षा और प्रामाणिकता: रिकॉर्ड सीधे सरकारी सिस्टम से जारी होता है, जिससे किसी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं।
  • आसान डिजिटल साझाकरण: नागरिक अपनी सहमति से रिकॉर्ड अधिकृत संस्थाओं के साथ साझा कर सकते हैं।
  • पर्यावरण-संवेदनशील शासन: यह पहल पेपरलेस प्रशासन और सतत विकास की दिशा में एक और कदम है।

एम ई ए और एनईजीडी माईटी के बीच यह सहयोग भारत के संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण को दर्शाता है — यानी नागरिक सेवाओं में सुधार के लिए सभी मंत्रालयों का मिलकर काम करना। इससे लाखों पासपोर्ट आवेदकों और धारकों को लाभ मिलेगा और भारत की पहचान एक विश्वसनीय, पेपरलेस डिजिटल शासन वाले देश के रूप में और मज़बूत होगी।

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