अंतरराष्ट्रीय ई-गवर्नेंस उत्पाद जनवरी 2026

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने को तैयार एआई/एमएल आधारित अनुप्रयोग

  • स्रोत - प्रेस सूचना ब्यूरो
India Highlights Inclusive Approach to AI Governance at UN Headquarters

ई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित “विद्युत वितरण में एआई/एमएल तकनीकों के उपयोग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन” में माननीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग एम एल आधारित अनुप्रयोग भारत की विद्युत वितरण प्रणाली को स्मार्ट, उपभोक्ता-केंद्रित और स्वयं-सुधार करने वाले नेटवर्क में परिवर्तित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री ने बताया कि उन्नत एआई/एमएल समाधान — जैसे स्मार्ट मीटर विश्लेषण, डिजिटल ट्विन्स, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव, बिजली चोरी की पहचान, उपकरण-स्तर पर उपभोक्ता व्यवहार की समझ, स्वचालित आउटेज पूर्वानुमान, और जनरेटिव एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली — विद्युत वितरण क्षेत्र में उपभोक्ता अनुभव और परिचालन दक्षता दोनों को बेहतर बना सकते हैं।

श्री मनोहर लाल ने कहा कि इन तकनीकों से घरों को अपनी बिजली खपत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने, बिजली कटौती को पहले से रोकने और ईमानदार उपभोक्ताओं को बिजली चोरी के वित्तीय बोझ से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) को हानियां कम करने, बिजली खरीद लागत को अनुकूलित करने और ग्रिड अवसंरचना में पुनर्निवेश करने में सक्षम बनाएगी। इस प्रकार, भारत को डिजिटल बिजली सुधार और भविष्य के लिए तैयार ग्रिड प्रशासन में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।

अपने संबोधन में माननीय मंत्री ने उद्योग, प्रौद्योगिकी भागीदारों और उपभोक्ताओं से सक्रिय सहयोग की अपील की, ताकि एआई/एमएल आधारित नवाचारों को तेजी से अपनाया जा सके और तकनीक को लेकर फैलने वाली भ्रम की स्थितियों को दूर किया जा सके।

कार्यक्रम में विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें सचिव श्री पंकज अग्रवाल भी शामिल थे, उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त डिस्कॉम्स, उन्नत मीटरिंग अवसंरचना सेवा प्रदाताओं, प्रौद्योगिकी समाधान प्रदाताओं और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने एआई/एमएल के अत्याधुनिक उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत किए, जो यह दर्शाते हैं कि कैसे ये तकनीकें देशभर में स्मार्ट, कुशल और सतत विद्युत वितरण को प्रोत्साहित कर सकती हैं।

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