भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और नवाचार को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब देशभर के विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स को उद्योग-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन ईडीए टूल्स और मल्टी-प्रोजेक्ट वेफर एम.पी.डब्ल्यू फैब्रिकेशन सेवाओं तक पहुँच मिल रही है। यह सुविधा चिपइन सेंटर और सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी एस.सी.एल, मोहाली के माध्यम से प्रदान की जा रही है।
यह पहल “चिप्स टू स्टार्ट-अप सी 2 एस कार्यक्रम” के अंतर्गत चलाई जा रही है। पिछले एक वर्ष में देश के 46 संस्थानों द्वारा 122 डिजाइन टेपआउट्स पूरे किए गए हैं, जो पाँच एमपीडब्ल्यू शटल्स के ज़रिए सम्पन्न हुए। अब तक 380 से अधिक अकादमिक और स्टार्टअप संगठनों ने ईडीए टूल्स पर 175 लाख घंटे का उपयोग किया है — यह उपलब्धि भारत को विश्व के सबसे बड़े सहयोगी चिप डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल करती है।
28 नवंबर 2025 को माननीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने मोहाली स्थित एस.सी.एल प्रयोगशाला का दौरा किया और सी 2 एस कार्यक्रम के तहत छात्रों द्वारा डिजाइन की गई 28 चिप्स का वितरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “भारत तेज़ी से वैश्विक सेमीकंडक्टर परिदृश्य में एक विशिष्ट नेता के रूप में उभर रहा है। भारत में जो विशाल सेमीकंडक्टर विकास पारिस्थितिकी तंत्र बन रहा है, वह अपने आप में अद्वितीय है।”
सी-डैक बेंगलुरु में स्थापित चिपइन सेंटर देशभर के शैक्षणिक संस्थानों को एडवांस डिजाइन वर्कफ़्लोज़, आई पी कोर, कम्प्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटॉरशिप उपलब्ध कराता है। यह केंद्र भारतभर के छात्रों की डिजाइन परियोजनाओं को एकत्र करता है और उन्हें 180 नैनोमीटर तकनीक के ज़रिए एस.सी.एल मोहाली में फैब्रिकेट करता है। प्रत्येक एम.पी.डब्ल्यू शटल में कई सत्यापित डिजाइनों को एक ही वेफर पर शामिल किया जाता है, जिससे लागत और समय दोनों की बचत होती है।
पिछले एक वर्ष में चिपइन सेंटर ने एक लाख से अधिक छात्रों और 90 स्टार्टअप्स को सहयोग दिया है, जिससे भारत की चिप डिजाइन क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। यह केंद्र अब भविष्य की उन्नत नोड डिजाइन और फैब्रिकेशन आवश्यकताओं को भी समर्थन देने की तैयारी कर रहा है।
श्री वैष्णव ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें भारत को महत्वपूर्ण तकनीकों में रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करना है। उन्होंने यह भी कहा कि एस.सी.एल मोहाली देश की स्वदेशी चिप उत्पादन क्षमता को सशक्त बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा और भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगा।