भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यू.पी.आई.) अपने संचालन के 10 वर्ष पूरे कर चुका है और आज यह देश के डिजिटल भुगतान तंत्र तथा वित्तीय समावेशन का प्रमुख आधार बन गया है। अप्रैल 2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के नियामकीय पर्यवेक्षण में शुरू की गई यह प्रणाली पिछले एक दशक में लेनदेन संख्या और मूल्य दोनों में तेज़ी से विस्तारित हुई है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान यू.पी.आई. के माध्यम से 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन किए गए, जिनका कुल मूल्य ₹314 लाख करोड़ से अधिक रहा। 21 बैंकों से शुरू हुआ यह नेटवर्क अब 703 सहभागी बैंकों तक विस्तारित हो चुका है।
अगस्त 2025 में यू.पी.आई. ने पहली बार एक महीने में 2,001 करोड़ लेनदेन का आंकड़ा पार किया, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 2,163 करोड़ तक पहुंच गया। कुल लेनदेन संख्या में लगभग 63 प्रतिशत हिस्सेदारी व्यक्ति-से-व्यापारी (पी.2.एम.) भुगतानों की रही, जो दैनिक खुदरा भुगतानों में इसके व्यापक उपयोग को दर्शाती है।
यू.पी.आई. को वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण पहचान मिली है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक रियल-टाइम भुगतान लेनदेन में मात्रा के आधार पर इसकी हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत रही। यू.पी.आई.-आधारित भुगतान अब सिंगापुर, फ्रांस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और मॉरीशस सहित कई देशों में स्वीकार किए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, यू.पी.आई. के अगले चरण में नए उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों तक पहुंच बढ़ाने, प्रणाली की मजबूती को और बेहतर बनाने तथा अंतरराष्ट्रीय डिजिटल भुगतान साझेदारियों को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।