दिल्ली का डिजिटल परिवर्तन एक ऐसे शासन की ओर संकेत करता है जो अधिक समेकित और नागरिक-केंद्रित है। अब सेवाएँ, प्रशासन, वित्त, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े विभिन्न मंच मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और पहुँच में सुधार हुआ है। ई-डिस्ट्रिक्ट, आई.एफ.एम.एस, ई-ऑफिस और डी.डी.आई.एस जैसे तंत्र विभागों के बीच बेहतर समन्वय को दर्शाते हैं। साथ ही, डेटा-आधारित उपकरण और मजबूत डिजिटल अवसंरचना यह सुनिश्चित करते हैं कि सेवाएँ आसानी से विस्तारित की जा सकें और आवश्यकताओं के अनुसार त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके। कुल मिलाकर, दिल्ली अलग-अलग डिजिटल प्रयासों से आगे बढ़कर एक समेकित, तकनीक-सक्षम शासन प्रणाली के रूप में विकसित हो चुकी है।
दिल्ली, जो हमारे राष्ट्र का प्रशासनिक, राजनीतिक और रणनीतिक केंद्र है, ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक शहरी परिवर्तन का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करती है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के रूप में दिल्ली ने हाल के वर्षों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का प्रभावी उपयोग करते हुए शासन तंत्र को सुदृढ़ करने में अग्रणी भूमिका निभाई है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के मार्गदर्शन में, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) दिल्ली ने अनेक डिजिटल पहलों का नेतृत्व किया है। इन पहलों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं की प्रदायगी को अधिक कुशल बनाना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और सुव्यवस्थित करना तथा शासन में पारदर्शिता को बढ़ाना रहा है।
इन प्रयासों के अंतर्गत ऐसे समेकित, विस्तार योग्य और नागरिक-केंद्रित डिजिटल मंच विकसित किए गए हैं, जो नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं तक एकीकृत और सहज पहुँच प्रदान करते हैं। साथ ही, ये मंच विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी बनती है।
दिल्ली जैसे बड़े और विविधतापूर्ण शहर की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, इन डिजिटल पहलों को डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली और स्मार्ट शासन समाधानों के साथ जोड़ा गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और लोक प्रशासन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में इन तकनीकी हस्तक्षेपों ने सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता और दक्षता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।
यह लेख दिल्ली में लागू प्रमुख आईसीटी पहलों और डिजिटल हस्तक्षेपों का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत करता है। ये पहलें पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और “डिजिटल इंडिया” के दृष्टिकोण के अनुरूप एक सशक्त डिजिटल शासन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में योगदान दे रही हैं।
राज्य में आईसीटी पहलें
नागरिक मंच
दिल्ली का डिजिटल परिवर्तन नागरिकों को केंद्र में रखते हुए सेवाओं तक पहुँच को सरल बनाता है, देरी को कम करता है और पारदर्शिता को बढ़ाता है। एकीकृत मंचों के माध्यम से प्रमाणपत्र, पंजीकरण, शिकायतें और कल्याणकारी सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे शासन अधिक उत्तरदायी और सुलभ बनता है।
ई-डिस्ट्रिक्ट
ई-डिस्ट्रिक्ट दिल्ली एक प्रमुख मंच है, जो सरकारी सेवाओं की शुरुआत से अंत तक पूरी तरह डिजिटल प्रदायगी सुनिश्चित करता है। इससे नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होती है और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ सरल बनती हैं। इसमें एकल साइन-ऑन सुविधा, आधार आधारित प्रमाणीकरण, डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र, एकीकृत ऑनलाइन भुगतान और डिजिलॉकर सहयोग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
यह मंच विभागों के बीच सत्यापन, आवेदनों की वास्तविक समय में स्थिति की जानकारी, स्वचालित कार्यप्रवाह और ई-एसएलए के माध्यम से समयबद्ध सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करता है। 41 विभागों की 453 से अधिक सेवाओं, 87 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं और 128 लाख से अधिक निपटाए गए आवेदनों के साथ, ई-डिस्ट्रिक्ट दिल्ली में डिजिटल शासन का एक मजबूत आधार बन चुका है।
सीएम जन सुनवाई पोर्टल
सीएम जन सुनवाई पोर्टल एक एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र है, जिसके माध्यम से नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, उसकी प्रगति देख सकते हैं और सीधे सरकार को प्रतिक्रिया दे सकते हैं। यह वेब, मोबाइल अनुप्रयोग और सीएम हेल्पलाइन (1902) के माध्यम से उपलब्ध है।
यह मंच वास्तविक समय में शिकायत की स्थिति, विभागों को स्वचालित प्रेषण, लंबित मामलों का उच्च स्तर पर भेजना और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करता है। 21 फरवरी 2026 को पुनः प्रारंभ किया गया यह पोर्टल सहभागितापूर्ण शासन को और मजबूत बनाता है।
दिल्ली की ई-गवर्नेंस यात्रा उत्तरदायी और पारदर्शी प्रशासन के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। एनआईसी दिल्ली द्वारा विकसित मंच, जैसे सीएम जन सुनवाई, नागरिकों और सरकार के बीच सीधे संवाद को सक्षम बनाकर शिकायत निवारण को सुदृढ़ करते हैं और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करते हैं। इसी प्रकार, ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल ने प्रमाणपत्रों और लाइसेंस जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुँच को एकल डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से सरल बनाया है। इन अनुप्रयोगों ने कागजी कार्यवाही को कम किया है, दक्षता में सुधार किया है और समयबद्ध सेवा प्रदायगी सुनिश्चित की है।
दिल्ली विकास सूचना प्रणाली (डीडीआईएस) एनआईसी दिल्ली की एक अन्य पहल है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में विकास कार्यों की सुव्यवस्थित निगरानी और बेहतर शासन को सक्षम बनाती है। यह प्रस्ताव से लेकर क्रियान्वयन तक संपूर्ण ट्रैकिंग सुनिश्चित करती है और पारदर्शिता तथा निधियों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देती है।
मैं एनआईसी, दिल्ली की टीम को उनके प्रयासों और पहलों के लिए बधाई देती हूँ, जिन्होंने दिल्ली सरकार को उसके डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार में सहयोग दिया है और एक ऐसा शासन मॉडल विकसित करने में योगदान दिया है जो वास्तव में नागरिकों को सशक्त बनाता है और पारदर्शी तथा उत्तरदायी है।
श्रीमती रेखा गुप्ता
माननीय मुख्यमंत्री, दिल्लीआरटीआई ऑनलाइन प्रणाली
आरटीआई ऑनलाइन प्रणाली नागरिकों को 200 से अधिक लोक प्राधिकरणों में डिजिटल रूप से सूचना के लिए आवेदन करने की सुविधा देती है। इससे मैनुअल प्रक्रियाएँ कम होती हैं और सूचना तक पहुँच आसान होती है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
एलजी लिसनिंग पोस्ट
एलजी लिसनिंग पोस्ट उपराज्यपाल सचिवालय के लिए एक केंद्रीकृत शिकायत निगरानी प्रणाली है, जिसे मोबाइल अनुप्रयोग का समर्थन प्राप्त है। यह शिकायतों की वास्तविक समय में निगरानी और बेहतर समन्वय के माध्यम से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
डीबीटी दिल्ली पोर्टल
डीबीटी प्रणाली के माध्यम से लाभार्थियों को सीधे उनके खातों में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और संसाधनों की हानि कम होती है। यह प्रणाली डीबीटी भारत पोर्टल से जुड़ी हुई है, जिससे लक्षित वितरण, पारदर्शिता और दक्षता में सुधार होता है।
ई-एसएलए
ई-एसएलए प्रणाली “दिल्ली नागरिकों को समयबद्ध सेवाओं के अधिकार अधिनियम, 2011” के तहत सेवाओं की समयसीमा की निगरानी करती है। 48 विभागों और 565 सेवाओं को शामिल करते हुए, यह प्रणाली जवाबदेही को मजबूत बनाती है और सुनिश्चित करती है कि नागरिकों को सेवाएँ निर्धारित समय के भीतर प्राप्त हों।
दिल्ली में डिजिटल शासन की प्रगति एक उत्तरदायी, पारदर्शी और नागरिक-प्रथम प्रशासन के निर्माण की स्पष्ट दृष्टि को दर्शाती है। ई-डिस्ट्रिक्ट मंच, ई-एसएलए, ई-अबकारी, ई-हॉस्पिटल तथा ईडब्ल्यूएस प्रवेश जैसी पहलें सार्वजनिक सेवाओं की प्रदायगी के तरीके को परिवर्तित कर चुकी हैं, जिससे ये सेवाएँ अधिक सुलभ, दक्ष और जवाबदेह बनी हैं। इन अनुप्रयोगों ने प्रक्रियागत देरी को कम कर नागरिकों को सशक्त बनाया है और समयबद्ध सेवा प्रदायगी सुनिश्चित की है।
एक सुदृढ़, सुरक्षित, विस्तार योग्य और समेकित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में एनआईसी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनकी तकनीकी विशेषज्ञता ने विभिन्न विभागों में ई-गवर्नेंस पहलों के निर्बाध कार्यान्वयन को संभव बनाया है।
आगे बढ़ते हुए, दिल्ली सरकार डिजिटल एकीकरण को और गहरा करने, उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण जैसी उभरती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक इन प्रगतियों का लाभ उठाए, जिससे शासन अधिक समावेशी, दक्ष और भविष्य के लिए तैयार बन सके।
श्री राजीव वर्मा, आईएएस
मुख्य सचिव, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकारशासन एवं प्रशासन
एनआईसी दिल्ली ने आंतरिक सरकारी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर प्रशासन को अधिक दक्ष, समन्वित और डेटा-आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सुव्यवस्थित कार्यप्रवाह, बढ़ी हुई पारदर्शिता और वास्तविक समय में जानकारी की उपलब्धता के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया को सशक्त किया गया है।
ई-ऑफिस
ई-ऑफिस मंच ने सरकारी कार्यप्रणाली को कागजरहित और अधिक कुशल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके माध्यम से फाइलों का इलेक्ट्रॉनिक निर्माण, संचालन और ट्रैकिंग संभव होती है, साथ ही दस्तावेज़ों का डिजिटल प्रबंधन और अभिलेख रखरखाव भी किया जाता है। कागजी कार्यवाही पर निर्भरता कम होने से पारदर्शिता बढ़ती है, निर्णय लेने की गति तेज होती है और विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है।
स्पैरो
स्पैरो प्रणाली सरकारी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट प्रक्रिया को डिजिटल बनाती है, जिससे मूल्यांकन अधिक पारदर्शी, मानकीकृत और समयबद्ध होता है। सुरक्षित और केंद्रीकृत सेवा अभिलेखों के साथ ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण और प्रसंस्करण की सुविधा, प्रदर्शन प्रबंधन में एकरूपता और जवाबदेही को मजबूत करती है।
डी.डी.आई.एस
डी.डी.आई.एस एक समेकित मंच है, जो विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत विकास कार्यों की निगरानी करता है और प्रस्ताव से लेकर क्रियान्वयन तक की पूरी प्रक्रिया का ट्रैक रखता है। इसमें परियोजना प्रस्ताव दर्ज करना, बहु-स्तरीय स्वीकृतियाँ, धनराशि निर्गमन की निगरानी और प्रगति अद्यतन (फोटो सहित) जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। 8,000 से अधिक परियोजनाओं के साथ, इस प्रणाली ने पारदर्शिता, निधियों के उपयोग और निगरानी को काफी मजबूत किया है, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों के लिए वास्तविक समय डैशबोर्ड भी उपलब्ध कराए हैं।
चित्र 2.1 : डी.डी.आई.एस पोर्टल का होमपेज
दर्पण 2.0
दर्पण 2.0 एक 24×7 वास्तविक समय निगरानी और विश्लेषण मंच है, जो सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं की स्थिति पर नजर रखता है। यह प्रवृत्ति विश्लेषण, तुलनात्मक मूल्यांकन और जनसांख्यिकीय प्रोफाइलिंग के माध्यम से उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को सक्षम बनाकर यह नीति निर्माण और प्रदर्शन निगरानी को सुदृढ़ करता है। सफल परीक्षण के बाद इसे सभी विभागों में लागू करने की स्वीकृति मिल चुकी है।
ई-समीक्षा
ई-समीक्षा मंच प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों की सतत निगरानी और समीक्षा में सहायता करता है। इसके माध्यम से वास्तविक समय में प्रगति का आकलन, नियमित समीक्षा और समय पर हस्तक्षेप संभव होता है। वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष डैशबोर्ड उपलब्ध होने से जवाबदेही बढ़ती है और परियोजनाएँ निर्धारित समयसीमा में पूरी होती हैं।
मुख्यमंत्री कार्यक्रम प्रबंधन प्रणाली
यह प्रणाली मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों की योजना और प्रबंधन को डिजिटल माध्यम से सुव्यवस्थित करती है। इसके अंतर्गत बैठकों और नियुक्तियों का केंद्रीकृत निर्धारण, वास्तविक समय अद्यतन और बेहतर समन्वय सुनिश्चित होता है, जिससे समय का बेहतर उपयोग और प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है।
वित्तीय प्रबंधन एवं सार्वजनिक व्यय प्रणाली
एनआईसी दिल्ली ने डिजिटल वित्तीय प्रणालियों के माध्यम से वित्तीय शासन को सुदृढ़ किया है, जिससे सार्वजनिक व्यय में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। ये मंच बजट निर्माण, बिल प्रसंस्करण, भुगतान और समायोजन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाते हैं, जिससे मैनुअल हस्तक्षेप कम होता है और संसाधनों की हानि को रोका जा सकता है।
आई.एफ.एम.एस
आई.एफ.एम.एस दिल्ली सरकार की वित्तीय गतिविधियों का प्रमुख आधार है, जो वेतन वितरण को सरल बनाता है और बजट, व्यय तथा निधियों के प्रवाह की वास्तविक समय में निगरानी की सुविधा देता है। इसे 1,700 से अधिक आहरण एवं वितरण अधिकारियों और 25 वेतन एवं लेखा कार्यालयों में अपनाया गया है।
आई.एफ.एम.एस में केंद्रीकृत बिलिंग प्रणाली, सामान्य भविष्य निधि निगरानी प्रणाली, व्यय समेकन हेतु डी-लेखा, सुरक्षित भुगतान के लिए सरकारी ई-भुगतान द्वार तथा दिल्ली राज्य वस्तु एवं सेवा कर समायोजन प्रणाली जैसे घटक शामिल हैं। साथ ही, आई.एफ.एम.एस दिल्ली मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से कर्मचारी वेतन पर्ची और जीपीएफ विवरण आसानी से देख सकते हैं।
एसएनए-स्पर्श
एसएनए-स्पर्श एक समेकित मंच है, जो केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत निधियों के प्रवाह का प्रबंधन करता है। यह सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली, भारतीय रिज़र्व बैंक के ई-कुबेर और राष्ट्रीय भुगतान निगम के साथ एकीकृत होकर “आवश्यकतानुसार” निधि जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित करता है। यह प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और अन्य भुगतानों दोनों का समर्थन करता है, जिससे नकदी प्रबंधन बेहतर होता है और निधियों का वास्तविक समय में पता चलता है।
ई-भुगतान
ई-भुगतान प्रणाली विभिन्न विभागों में सरकारी देयों के डिजिटल संग्रह को सक्षम बनाती है। बैंकिंग मंचों के साथ एकीकरण के माध्यम से नागरिकों और व्यवसायों को ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मिलती है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है तथा भुगतान प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनती है।
ई-प्रोक्योरमेंट
ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली खरीद प्रक्रिया के पूरे चक्र को डिजिटल बनाती है, जिसमें निविदा प्रकाशन, बोली प्रस्तुत करना, मूल्यांकन और अनुबंध प्रबंधन शामिल हैं। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करती है, मैनुअल प्रक्रियाओं को कम करती है और पूरी प्रक्रिया की निगरानी को आसान बनाती है, जिससे सार्वजनिक खरीद में निष्पक्षता और दक्षता बढ़ती है।
ई-भविष्य
ई-भविष्य प्रणाली पेंशन स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाती है। इसके माध्यम से पेंशन मामलों का प्रारंभ से अंत तक ट्रैक किया जा सकता है, प्रपत्रों का ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण संभव होता है और एसएमएस तथा ईमेल के माध्यम से वास्तविक समय में स्थिति की जानकारी मिलती है। इससे देरी और मैनुअल हस्तक्षेप कम होता है तथा पेंशन लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से प्रदान किए जाते हैं।
दिल्ली एस.जी.एस.टी समायोजन प्रणाली
यह प्रणाली राज्य वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित आंकड़ों के सटीक समायोजन को सुनिश्चित करती है। राष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों के साथ एकीकरण के माध्यम से यह समायोजन प्रक्रिया को स्वचालित बनाती है, जिससे राजस्व लेखांकन की शुद्धता बढ़ती है और वित्तीय पारदर्शिता एवं अनुपालन को सुदृढ़ किया जाता है।
न्याय एवं विधिक पारिस्थितिकी तंत्र
एनआईसी दिल्ली ने डिजिटल मंचों के माध्यम से न्याय प्रणाली को सुदृढ़ किया है, जिससे समन्वय, पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि हुई है। सूचना के सहज आदान-प्रदान, डिजिटल कार्यप्रवाह और मामलों की वास्तविक समय में निगरानी के जरिए न्याय प्रदान करने और उसे प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनी है।
आई.सी.जे.एस
आई.सी.जे.एस आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रमुख घटकों—पुलिस, न्यायालय, कारागार, अभियोजन और फॉरेंसिक विभाग—के बीच वास्तविक समय में एकीकरण सुनिश्चित करता है। यह मामले से संबंधित जानकारी के सुचारु आदान-प्रदान को सक्षम बनाकर विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय बढ़ाता है, जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को तेज करता है और न्याय वितरण में पारदर्शिता को मजबूत करता है।
ई-लिटिगेशन
ई-लिटिगेशन प्रणाली सरकारी मामलों के प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच प्रदान करती है। इसके माध्यम से मामलों का इलेक्ट्रॉनिक दाखिला, ट्रैकिंग और निगरानी संभव होती है, जिससे मैनुअल प्रक्रियाएँ कम होती हैं और विभागों से जुड़े मुकदमों के संचालन में दक्षता और नियंत्रण बढ़ता है।
मेडलीपर
मेडलीपर प्रणाली चिकित्सकीय-वैधानिक और पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग को डिजिटल बनाती है। यह मानकीकृत प्रारूप, सुरक्षित अभिलेखन और सीसीटीएनएस के साथ एकीकरण के माध्यम से कानूनी प्रक्रियाओं के लिए समय पर जानकारी उपलब्ध कराती है, जिससे कार्यप्रवाह अधिक सुव्यवस्थित और विश्वसनीय बनता है।
आर.सी.एम.एस
राजस्व न्यायालय प्रकरण निगरानी प्रणाली विभिन्न स्तरों—उप मंडलाधिकारी, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, जिला मजिस्ट्रेट और वित्त आयुक्त—के न्यायालयों में कार्यवाही को डिजिटल रूप देती है। नागरिक इसके माध्यम से ऑनलाइन याचिका दायर कर सकते हैं, दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं, सुनवाई की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अपील का प्रबंधन कर सकते हैं, जिससे राजस्व न्याय प्रक्रिया अधिक सुलभ और पारदर्शी बनती है।
ओ.एस.डब्ल्यू.एस
ओ.एस.डब्ल्यू.एस अधिवक्ताओं के लिए एक डिजिटल एकल खिड़की तंत्र प्रदान करता है, जिसके माध्यम से शुल्क दावों का प्रस्तुतिकरण और प्रसंस्करण पूरी तरह ऑनलाइन किया जाता है। इससे भुगतान प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी बनती है तथा विभागीय कार्यप्रवाह के साथ बेहतर समन्वय स्थापित होता है।
न्यायालय मामला प्रणाली
दिल्ली उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों में विभिन्न डिजिटल प्रणालियाँ लागू की गई हैं, जिनसे कार्यप्रणाली अधिक सुव्यवस्थित हुई है। इनमें प्रकरण सूचना प्रणाली, राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड, ई-फाइलिंग, ई-न्यायालय शुल्क और ई-निरीक्षण जैसी सेवाएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ई-कारण सूची, जमानत याचिकाओं का स्वचालित आवंटन और आभासी सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाओं ने न्यायालयों की पहुँच, दक्षता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।
यह प्रणाली श्रम से संबंधित मामलों के संपूर्ण डिजिटल प्रबंधन को सक्षम बनाती है। इसमें ऑनलाइन मामला दर्ज करना, सुनवाई प्रबंधन, मामलों का स्थानांतरण और पुनः खोलना, तथा मामले की जानकारी तक सार्वजनिक पहुँच जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। स्वचालित नोटिस और कारण सूची के माध्यम से यह श्रम विवाद निवारण को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाती है।
स्वास्थ्य सेवाएँ
एनआईसी दिल्ली ने स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसका उद्देश्य बेहतर रोगी देखभाल, संसाधनों का कुशल प्रबंधन और वास्तविक समय में निर्णय लेने को सक्षम बनाना है। ये मंच अस्पतालों और स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करते हैं तथा सेवा प्रदायगी में पारदर्शिता और त्वरित प्रतिक्रिया को बढ़ाते हैं।
नेक्स्टजेन ई-हॉस्पिटल
नेक्स्टजेन ई-हॉस्पिटल एक समेकित अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली है, जो स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल प्रशासन को सुव्यवस्थित करती है। यह रोगी प्रबंधन को सरल बनाती है और निर्णय लेने के लिए वास्तविक समय में डेटा उपलब्ध कराती है। वर्तमान में इसे दिल्ली के 38 सरकारी अस्पतालों में लागू किया जा रहा है और यह शहर की डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का आधार बन रही है।
पी.सी.पी.एन.डी.टी ऑनलाइन फॉर्म-एफ पोर्टल
यह पोर्टल पी.सी.पी.एन.डी.टी अधिनियम के अनुपालन को सुनिश्चित करता है, जिसके तहत डायग्नोस्टिक केंद्रों, विशेष रूप से निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की डिजिटल रिपोर्टिंग और निगरानी की जाती है। 95 लाख से अधिक फॉर्म-एफ प्रस्तुतियों और 2,400 से अधिक पंजीकृत केंद्रों के साथ, इस मंच ने पारदर्शिता, अनुपालन और नियामक निगरानी को सुदृढ़ किया है।
स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन पोर्टल
स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन पोर्टल दिल्ली में स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों की वास्तविक समय में निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत मंच है। यह अस्पताल संसाधनों, बेड उपलब्धता (आईसीयू सहित), रोग निगरानी, दवा आपूर्ति और ऑक्सीजन प्रबंधन को समर्थन देता है, जिससे डेटा-आधारित शासन और प्रभावी स्वास्थ्य प्रशासन संभव होता है।
अस्पताल बेड सूचना मोबाइल अनुप्रयोग
नेक्स्टजेन ई-हॉस्पिटल से जुड़ा यह मोबाइल अनुप्रयोग नागरिकों को आईसीयू बेड सहित अस्पतालों में उपलब्ध बेड की वास्तविक समय जानकारी प्रदान करता है, जिससे गंभीर उपचार सेवाओं तक समय पर पहुँच सुनिश्चित होती है।
औषधि निगरानी प्रणाली
यह एक वेब-आधारित मंच है, जो नियंत्रित दवाओं की निगरानी करता है और उनके वितरण को व्यवस्थित बनाता है। स्टॉक की जानकारी, बिक्री का रिकॉर्ड और रिपोर्टिंग की सुविधा के माध्यम से यह दवा आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
नर्सिंग होम प्रबंधन प्रणाली
यह प्रणाली नर्सिंग होम के पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और कागजरहित बनाती है। इसमें संस्थान, स्टाफ और सेवाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी संकलित की जाती है, साथ ही निरीक्षण और अनुपालन प्रक्रिया को भी समर्थन मिलता है। ऑनलाइन भुगतान, सूचना और रिपोर्टिंग सुविधाओं के माध्यम से यह दक्षता, पारदर्शिता और नियामक निगरानी को मजबूत करती है।
खाद्य नमूना परीक्षण प्रबंधन प्रणाली
यह प्रणाली खाद्य नमूनों के संग्रह, परीक्षण और रिपोर्टिंग की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से ट्रैक करती है। समयबद्ध प्रसंस्करण और अधिकारियों द्वारा वास्तविक समय में निगरानी के माध्यम से यह खाद्य सुरक्षा, अनुपालन और जवाबदेही को सुदृढ़ बनाती है।
सामाजिक कल्याण प्रणालियाँ
एनआईसी दिल्ली ने डिजिटल तकनीकों के माध्यम से कल्याणकारी सेवाओं की प्रदायगी को सुदृढ़ किया है, जिससे पारदर्शिता, समावेशिता और दक्षता में वृद्धि हुई है। ये मंच लाभार्थियों के प्रबंधन को सरल बनाते हैं, अनुपालन को बेहतर करते हैं और शहर भर में कल्याण एवं श्रम सेवाओं तक पहुँच का विस्तार करते हैं।
ई-पीडीएस
ई-पीडीएस (इलेक्ट्रॉनिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत खाद्यान्न वितरण के प्रबंधन के लिए एक पूर्ण डिजिटल मंच है। यह स्मार्ट-पीडीएस से एकीकृत है और ई-पीओएस उपकरणों के माध्यम से संचालित होता है, जिससे वास्तविक समय में निगरानी, अंतिम चरण पर प्रमाणीकरण और “वन नेशन वन राशन कार्ड” के तहत पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित होती है। 72 लाख से अधिक लाभार्थियों और 17 लाख राशन कार्डों की सेवा करते हुए, इस प्रणाली ने खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता और दक्षता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।
दिल्ली श्रम कल्याण बोर्ड पोर्टल
यह पोर्टल श्रम कल्याण योजनाओं और श्रम कल्याण निधि के प्रशासन को डिजिटल बनाता है। इसके माध्यम से नियोक्ता पंजीकरण, ऑनलाइन अंशदान भुगतान, कर्मचारी डेटा प्रबंधन और विभिन्न सूचनाओं तक पहुँच संभव होती है, जिससे श्रम कल्याण सेवाएँ अधिक सुलभ और पारदर्शी बनती हैं।
दुकान एवं स्थापना छूट प्रणाली
यह प्रणाली दिल्ली दुकान एवं स्थापना अधिनियम के अंतर्गत छूट संबंधी आवेदन की ऑनलाइन प्रस्तुति और प्रसंस्करण को सक्षम बनाती है। पारदर्शी और समयबद्ध स्वीकृति प्रक्रिया के माध्यम से यह मैनुअल हस्तक्षेप को कम करती है और व्यापार करने की सुविधा को बेहतर बनाती है।
आउटसोर्स वेतन भुगतान प्रबंधन प्रणाली
यह प्रणाली आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर और पारदर्शी तरीके से वेतन भुगतान सुनिश्चित करती है। केंद्रीकृत निगरानी और विभागीय कार्यप्रवाह के साथ एकीकरण के माध्यम से यह देरी और त्रुटियों को कम करती है, जिससे जवाबदेही बढ़ती है और संविदा आधारित रोजगार में निष्पक्ष पारिश्रमिक सुनिश्चित होता है।
शिक्षा एवं भर्ती प्रणालियाँ
दिल्ली ने प्रवेश और भर्ती प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल मंच अपनाए हैं, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और व्यापक पहुँच सुनिश्चित होती है। साथ ही, न्यूनतम मैनुअल हस्तक्षेप के साथ निष्पक्ष और योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है।
ई-काउंसलिंग
ई-काउंसलिंग प्रणाली दिल्ली सरकार के अंतर्गत प्रमुख संस्थानों—जैसे गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान—में ऑनलाइन प्रवेश के लिए एक केंद्रीकृत मंच प्रदान करती है।
यह ऑनलाइन पंजीकरण, विकल्प भरना और सीटों का स्वचालित आवंटन सक्षम बनाती है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी, दक्ष और छात्र-अनुकूल बनती है तथा प्रत्यक्ष संपर्क की आवश्यकता कम होती है।
ईडब्ल्यूएस शिक्षा पोर्टल
ईडब्ल्यूएस शिक्षा पोर्टल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, वंचित वर्ग, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और निःशुल्क श्रेणी के अंतर्गत प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान करता है। यह आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाता है और सीट आवंटन को पारदर्शी बनाकर समावेशिता को बढ़ावा देता है तथा वंचित वर्गों के लिए शिक्षा तक पहुँच का विस्तार करता है।
डी.एस.एस.एस.बी ओ.ए.आर.एस
डी.एस.एस.एस.बी ओ.ए.आर.एस मंच दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की भर्ती प्रक्रियाओं के संपूर्ण डिजिटल प्रबंधन को सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण, आवेदन प्रस्तुत करना, शुल्क भुगतान और अभ्यर्थियों के साथ संवाद संभव होता है। यह बड़े पैमाने पर होने वाली भर्तियों को कुशलतापूर्वक संचालित करता है, पारदर्शिता बढ़ाता है और मैनुअल हस्तक्षेप को कम करता है।
व्यवसाय, विनियमन एवं व्यापार करने में सुगमता
एनआईसी दिल्ली ने नियामक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ किया है। लाइसेंस, स्वीकृतियाँ, निरीक्षण और अनुपालन को सरल बनाकर इन मंचों ने देरी कम की है, प्रत्यक्ष संपर्क को घटाया है और पारदर्शिता बढ़ाई है, जिससे एक अधिक कुशल और व्यापार-अनुकूल वातावरण विकसित हुआ है।
ई-अबकारी
ई-अबकारी प्रणाली आबकारी कार्यों के प्रबंधन के लिए एक समग्र डिजिटल मंच है, जो लाइसेंस, परमिट और मदिरा के परिवहन की संपूर्ण प्रक्रिया को डिजिटल रूप से संचालित करता है। यह लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण, परमिट निर्माण, भंडार निगरानी, लेबल पंजीकरण और शुल्क प्रबंधन को समर्थन देता है, साथ ही निरीक्षण निगरानी और बारकोड आधारित ट्रैकिंग के माध्यम से प्रवर्तन को भी सुदृढ़ करता है। एकीकृत डैशबोर्ड निर्णय लेने के लिए वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करते हैं। दिल्ली ई-अबकारी मोबाइल अनुप्रयोग उपयोगकर्ताओं को विक्रय केंद्रों का पता लगाने, उत्पाद की प्रामाणिकता की जाँच करने, शुष्क दिवस देखने और शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान करता है।
चित्र 2.2 : ई-अबकारी प्रणाली का सांख्यिकीय अवलोकन
दिल्ली एकल खिड़की प्रणाली (उद्योग हेतु)
दिल्ली एकल खिड़की प्रणाली (उद्योग हेतु) व्यवसायों को विभिन्न विभागों से स्वीकृतियाँ और अनुमतियाँ प्राप्त करने के लिए एक एकीकृत इंटरफेस प्रदान करती है। यह ऑनलाइन आवेदन, वास्तविक समय ट्रैकिंग, एकीकृत कार्यप्रवाह और समयबद्ध सेवा प्रदायगी को सक्षम बनाती है, जिससे कागजी कार्यवाही कम होती है, समन्वय बेहतर होता है और व्यापार करने की सुगमता में उल्लेखनीय सुधार होता है।
डी-सीआईएस
दिल्ली केंद्रीय निरीक्षण प्रणाली (डी-सीआईएस) विभिन्न विभागों में निरीक्षण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करती है। यह दोहराव को समाप्त कर मानकीकृत प्रक्रियाएँ सुनिश्चित करती है, जिससे प्राधिकरणों के बीच समन्वय बेहतर होता है, व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ कम होता है और एक पारदर्शी तथा पूर्वानुमेय निरीक्षण ढांचा विकसित होता है।
ई-फिल्म अनुमति प्रणाली
ई-फिल्म अनुमति प्रणाली दिल्ली में फिल्मांकन की अनुमति प्राप्त करने के लिए एक एकल खिड़की मंच प्रदान करती है। यह विभिन्न विभागों को एकीकृत कार्यप्रवाह में जोड़कर ऑनलाइन आवेदन, त्वरित स्वीकृति और कम कागजी कार्यवाही सुनिश्चित करती है, जिससे दिल्ली को फिल्म-अनुकूल गंतव्य के रूप में बढ़ावा मिलता है और नियामक अनुपालन भी प्रभावी रूप से सुनिश्चित होता है।
चित्र: 2.3 : ई-फिल्म क्लियरेंस पोर्टल
मुख्य शासन प्रणालियों से परे, एनआईसी दिल्ली ने विधायी प्रक्रियाओं, संपत्ति पंजीकरण, भूमि प्रबंधन और उपभोक्ता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन का विस्तार किया है, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक सुविधा में वृद्धि हुई है।
दिल्ली नेवा परियोजना
दिल्ली नेवा (राष्ट्रीय ई-विधान अनुप्रयोग) परियोजना का शुभारंभ 3 अगस्त 2025 को दिल्ली विधानसभा में किया गया, जो डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्णतः डिजिटल और कागजरहित विधायी कार्यप्रवाह को सक्षम बनाती है।
यह प्रश्न, नोटिस, विधेयक और कार्यवाही के वास्तविक समय प्रबंधन के साथ-साथ स्वचालित कार्यप्रवाह और डिजिटल अभिलेखन का समर्थन करती है। 100 दिनों की त्वरित अवधि में लागू यह मंच विधायकों और अधिकारियों के लिए पारदर्शिता, पहुँच और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करता है। समर्पित नेवा सेवा केंद्रों और परिचालन समर्थन के साथ, दिल्ली इस प्रणाली को अपनाने वाली 20वीं विधानसभा बन गई है, जो “एक राष्ट्र, एक अनुप्रयोग” के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है।
चित्र: 2.4 : दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह, शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर ‘सीएम जनसुनवाई पोर्टल’ का शुभारंभ किया
मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, अपनी पत्रिका इन्फॉर्मेटिक्स के माध्यम से, दिल्ली विधानसभा में राष्ट्रीय ई-विधान अनुप्रयोग (नेवा) के क्रियान्वयन को उजागर करने का प्रस्ताव रखता है। किसी भी विधायी संस्था की प्रतिष्ठा केवल उसकी संवैधानिक परंपराओं की निरंतरता में ही नहीं, बल्कि शासन की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप सावधानी और विवेक के साथ स्वयं को ढालने की उसकी क्षमता में भी निहित होती है। इसी भावना के साथ, दिल्ली विधानसभा ने आठवीं विधानसभा सत्र के प्रथम भाग के मानसून सत्र के दौरान नेवा का पूर्ण क्रियान्वयन किया, जो उसके कार्यप्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नेवा के क्रियान्वयन से विधानसभा को एक अधिक समेकित और दक्ष कार्यप्रणाली की ओर बढ़ने में सहायता मिली है, जहाँ विधायी कार्य समयबद्ध और संरचित डिजिटल पहुँच के माध्यम से समर्थित हैं। अब नोटिस, प्रश्न, सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्र और कार्यवाही एकीकृत डिजिटल मंच के माध्यम से उपलब्ध हैं, जिससे सदस्यों को विधायी कार्य में अधिक तत्परता और निरंतरता के साथ भाग लेने में सुविधा होती है। इस परिवर्तन ने कार्य की तैयारी, संचालन और अभिलेखन की प्रक्रिया में एक शांत किंतु स्पष्ट सुधार लाया है, साथ ही संस्थागत अभिलेखों को विश्वसनीय और सुलभ रूप में बनाए रखना भी सुनिश्चित किया है।
इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ने एक स्थिर और सहायक भूमिका निभाई है। उसकी तकनीकी सहायता, विधायी कार्य की प्रक्रियात्मक प्रकृति की समझ के साथ मिलकर, यह सुनिश्चित करती है कि नेवा का क्रियान्वयन सहज और विधानसभा की व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुरूप हो। यह प्रयास स्थापित प्रक्रियाओं के साथ प्रौद्योगिकी के संतुलित समन्वय को दर्शाता है, बिना उस अनुशासन और व्यवस्था को प्रभावित किए जो सदन के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक है।
विस्तृत स्तर पर, यह पहल केवल प्रशासनिक सुविधा तक सीमित नहीं है। एक डिजिटल विधायी ढांचा पारदर्शिता को सुदृढ़ करता है, सूचना तक पहुँच को बेहतर बनाता है और सदन के भीतर अधिक सूचित सहभागिता को प्रोत्साहित करता है। यह सार्वजनिक विश्वास को भी मजबूत करता है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि शासन प्रक्रियाएँ खुली, स्पष्ट और जवाबदेह बनी रहें।
दिल्ली विधानसभा और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के बीच यह सहयोग इस बात का एक विचारपूर्ण उदाहरण है कि संस्थाएँ अपनी मूलभूत आधारशिला को बनाए रखते हुए कैसे विकसित हो सकती हैं। मैं एनआईसी की निरंतर प्रतिबद्धता की सराहना करता हूँ और कुशल, पारदर्शी तथा उत्तरदायी विधायी शासन के लिए इस सहयोग को और सुदृढ़ करने की अपेक्षा करता हूँ।
मैं इन्फॉर्मेटिक्स की निरंतर सफलता और इस प्रकार की महत्वपूर्ण पहलों के दस्तावेजीकरण तथा प्रसार के उसके प्रयासों के लिए अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ।
श्री विजेन्द्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा सदस्यएन.जी.डी.आर.एस
एन.जी.डी.आर.एस (राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली) संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाता है, जिसके अंतर्गत ऑनलाइन दस्तावेज़ पंजीकरण, समय निर्धारण, ई-स्टाम्प एकीकरण, शुल्क की स्वचालित गणना और वास्तविक समय स्थिति ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है। भौतिक उपस्थिति को कम करते हुए और प्रक्रियाओं का मानकीकरण करते हुए, यह पारदर्शिता में सुधार करता है और संपत्ति लेन-देन को सरल बनाता है।
वाहन स्थान ट्रैकिंग एवं आपातकालीन अलर्ट प्रणाली (वीएलटी एवं ईएएस)
वाहन स्थान ट्रैकिंग एवं आपातकालीन अलर्ट प्रणाली (वीएलटी एवं ईएएस) वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी और आपातकालीन स्थितियों में अलर्ट की सुविधा प्रदान करती है।
भूमि अभिलेख प्रणाली
भूमि अभिलेख प्रणाली भूमि स्वामित्व, नामांतरण और राजस्व अभिलेखों के प्रबंधन के लिए एक डिजिटल ढांचा प्रदान करती है। भूमि से संबंधित जानकारी तक पहुँच को बेहतर बनाकर और विवादों को कम करते हुए, यह भूमि प्रशासन में पारदर्शिता और दक्षता को सुदृढ़ करती है।
मापतोल पोर्टल
मापतोल पोर्टल विधिक माप विज्ञान विभाग को माप उपकरणों के सत्यापन और प्रमाणन की ऑनलाइन सुविधा प्रदान करता है, साथ ही शिकायत दर्ज करने और उसकी निगरानी की व्यवस्था भी उपलब्ध कराता है। मोबाइल अनुप्रयोग और वास्तविक समय निरीक्षण क्षमताओं के माध्यम से, यह उपभोक्ता संरक्षण, नियामक दक्षता और प्रवर्तन में पारदर्शिता को सुदृढ़ करता है।
नेटवर्क एवं अवसंरचना सेवाएँ
एक सुदृढ़ डिजिटल अवसंरचना दिल्ली के ई-गवर्नेंस तंत्र की आधारशिला है, जो सुरक्षित कनेक्टिविटी, निर्बाध संचार और विभिन्न विभागों में विश्वसनीय सेवा प्रदायगी को सक्षम बनाती है। यह नागरिकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं और आंतरिक प्रशासनिक कार्यों दोनों का समर्थन करती है, जिससे शासन में विस्तार क्षमता, दक्षता और निरंतरता सुनिश्चित होती है।
दिल्ली राज्य व्यापक क्षेत्र नेटवर्क (डीएसडब्ल्यूएएन) इस तंत्र की रीढ़ के रूप में कार्य करता है, जो 185 से अधिक सरकारी स्थलों को 240 से अधिक समर्पित लीज्ड लाइनों के माध्यम से उच्च गति और सुरक्षित कनेक्टिविटी प्रदान करता है। यह स्थानीय नेटवर्क प्रबंधन, इंटरनेट और ईमेल सेवाएँ, क्लाउड पहुँच, वीपीएन कनेक्टिविटी, वेब होस्टिंग और वाई-फाई जैसी सेवाओं का समर्थन करता है, जिससे वास्तविक समय में संचार और विभागों के बीच निर्बाध समन्वय संभव होता है।
एनजीसी क्लाउड सेवाएँ अनुप्रयोगों और डेटा की होस्टिंग के लिए एक सुरक्षित और विस्तार योग्य वातावरण प्रदान करती हैं, जिससे विभाग तेजी से सेवाएँ लागू कर सकते हैं और केंद्रीकृत संसाधन प्रबंधन के माध्यम से अवसंरचना का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर सकते हैं।
बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (बीएएस) कर्मचारियों की उपस्थिति की वास्तविक समय में निगरानी को सक्षम बनाकर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाती है, जिससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार होता है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेवाएँ राज्य और जिला स्तर पर आभासी बैठकों को सक्षम बनाती हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज होती है, यात्रा की आवश्यकता कम होती है और शासन की निरंतरता सुनिश्चित होती है।
इन सभी पहलों के माध्यम से एक सुदृढ़ डिजिटल आधार तैयार होता है, जो दिल्ली में दक्ष, सुरक्षित और विस्तार योग्य ई-गवर्नेंस को सशक्त बनाता है।
एनआईसी राज्य कार्यालय से संबंधित कार्यक्रम
- माननीय मुख्यमंत्री, दिल्ली द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री एवं शिक्षा मंत्री के साथ सीएम जन सुनवाई पोर्टल, सीएससी डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाएँ तथा ईडब्ल्यूएस प्रवेश पोर्टल का उद्घाटन किया गया।
- माननीय मुख्यमंत्री, दिल्ली द्वारा मेडलीपर प्रणाली का उद्घाटन किया गया।
- दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष द्वारा दिल्ली नेवा परियोजना का उद्घाटन किया गया।
चित्र: 2.5 : दिल्ली विधानसभा पोर्टल
अग्रिम दिशा
आगे बढ़ते हुए, गहन एकीकरण, परस्पर कार्य-संगतता और डेटा-आधारित शासन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विश्लेषण के उपयोग से सक्रिय सेवा प्रदायगी को सक्षम बनाया जा सकता है। साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करना, क्षमता निर्माण और मोबाइल-प्रथम समावेशी पहुँच सुनिश्चित करना प्रमुख प्राथमिकताएँ होंगी। नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने और एकीकृत मंचों के विस्तार से पारदर्शिता और दक्षता में और सुधार किया जा सकता है, जिससे दिल्ली एक अधिक बुद्धिमान और सुदृढ़ शासन पारिस्थितिकी तंत्र की ओर अग्रसर होगी।
द्वारा संपादित: विनोद कुमार गर्ग
लेखक / योगदानकर्ता
नित्तल श्रीनिवास उप महानिदेशक व एसआईओ nsrini[at]nic[dot]in
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी
एनआईसी दिल्ली राज्य केंद्र
बी विंग, लेवल-7, दिल्ली सचिवालय
नई दिल्ली,
दिल्ली - 110002