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मिशन भागीरथातेलंगाना का एकीकृत डिजिटल जल नेटवर्क

द्वारा संपादित: निस्सी जॉर्ज
मिशन भागीरथा मिशन भागीरथा

मिशन भागीरथा का एंटरप्राइज़ वेबजीआईएस प्लेटफ़ॉर्म ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को डेटा-आधारित शासन प्रणाली में रूपांतरित करता है। भू-स्थानिक एसेट मैपिंग, बस्ती-स्तरीय मॉनिटरिंग, रियल-टाइम एनालिटिक्स तथा राष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म लिंकिंग के एकीकरण के माध्यम से यह प्रणाली स्रोत से सेवा वितरण तक एंड-टू-एंड दृश्यता प्रदान करती है, सेवा विश्वसनीयता को सुदृढ़ करती है तथा प्रौद्योगिकी-सक्षम सार्वजनिक अवसंरचना प्रबंधन के लिए एक स्केलेबल और प्रतिरूपणीय मॉडल स्थापित करती है।

मिशन भागीरथा, तेलंगाना सरकार की एक प्रमुख पेयजल पहल है, जिसका उद्देश्य राज्य के प्रत्येक परिवार को सुरक्षित, शुद्ध एवं पाइपलाइन आधारित पेयजल उपलब्ध कराना है। लगभग 5.5 मिलियन परिवारों में 10 मिलियन नागरिकों को आच्छादित करते हुए यह विश्व के सबसे बड़े केंद्रीकृत ग्रामीण जल आपूर्ति नेटवर्कों में से एक है।

इस स्तर पर केवल अवसंरचना पर्याप्त नहीं होती—इसके साथ-साथ दृश्यता, अनुरेखणीयता और प्रणाली का रियल-टाइम में प्रभावी संचालन एवं शासन भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है।

इसी आवश्यकता की पूर्ति हेतु राज्य ने एक उन्नत एंटरप्राइज़ वेबजीआईएस-आधारित जल अवसंरचना प्रबंधन प्रणाली लागू की है। यह प्लेटफ़ॉर्म एक राज्यव्यापी भू-स्थानिक निर्णय-सहायक प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जो जल आपूर्ति शृंखला के प्रत्येक चरण—स्रोत से सेवा वितरण तक—एंड-टू-एंड दृश्यता प्रदान करता है। इस प्रकार यह तेलंगाना को प्रौद्योगिकी-सक्षम जल शासन के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय मानक के रूप में स्थापित करता है।

मिशन भगीरथ वेबजीआईएस एप्लिकेशन

चित्र 9.1: मिशन भगीरथ वेबजीआईएस एप्लिकेशन

एकीकृत डिजिटल जल नेटवर्क आर्किटेक्चर

एंटरप्राइज़ वेबजीआईएस प्लेटफ़ॉर्म संपूर्ण जल आपूर्ति शृंखला—कच्चे जल के स्रोत से लेकर अंतिम घर-स्तरीय वितरण तक—एंड-टू-एंड भू-स्थानिक दृश्यता प्रदान करता है। यह एकीकृत डिजिटल परिवेश में सभी महत्वपूर्ण अवसंरचना घटकों का समेकन एवं स्थानिक मानचित्रण करता है, जिससे प्रणाली के डिज़ाइन और संचालन का समग्र दृष्टिकोण प्राप्त होता है।

यह प्रणाली निम्नलिखित अवसंरचना स्तरों को एकीकृत करती है:

स्रोत एवं बल्क जल अवसंरचना
  • सतही जलाशय
  • इंटेक कुएँ एवं इंटेक संरचनाएँ
  • कच्चे जल के ट्रांसमिशन मेन
  • जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी)
शोधित जल भंडारण एवं विनियमन
  • सम्प
  • ग्राउंड लेवल बैलेंसिंग रिज़र्वायर (जीएलबीआर)
  • ब्रेक प्रेशर टैंक (बीपीटी)
  • ओवरहेड बैलेंसिंग रिज़र्वायर (ओएचबीआर)
  • ओवरहेड सर्विस रिज़र्वायर (ओएचएसआर)
परिवहन एवं वितरण नेटवर्क
  • ग्रेविटी मेन
  • पम्पिंग मेन
  • पम्पिंग स्टेशन एवं इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एसेट्स
  • नियंत्रण वाल्व एवं दाब विनियमन प्रणालियाँ
  • ग्राम-स्तरीय वितरण नेटवर्क
  • कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी)

इन सभी घटकों को एक एकीकृत भू-स्थानिक फ्रेमवर्क में समाहित करके यह प्लेटफ़ॉर्म नेटवर्क का निर्बाध दृश्यांकन सक्षम बनाता है, प्रणाली-स्तरीय समझ को सुदृढ़ करता है तथा योजना निर्माण, निगरानी और संचालन प्रबंधन के लिए एक विश्वसनीय आधार प्रदान करता है।

ज़ोनिंग-आधारित नेटवर्क शासन मॉडल

हाइड्रोलिक परिवहन घटकों को प्रशासनिक एवं बस्ती सीमाओं के साथ एकीकृत करके यह प्रणाली जल आपूर्ति शृंखला की एंड-टू-एंड अनुरेखणीयता सुनिश्चित करती है—स्रोत की स्थिरता से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक।

वेबजीआईएस अनुप्रयोग में बहु-स्तरीय प्रशासनिक सीमाएँ—सेगमेंट, ज़िला, मंडल, निर्वाचन क्षेत्र तथा बस्ती—को संबंधित सेवा जलाशयों के साथ व्यवस्थित रूप से जोड़ा गया है। यह संरचित भू-स्थानिक आर्किटेक्चर जल आपूर्ति नेटवर्क के योजना निर्माण, निगरानी और शासन के लिए एक सुसंगत ढांचा प्रदान करता है।

इस ज़ोनिंग-आधारित संरचना के माध्यम से अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में प्रणाली के प्रदर्शन की तुलना कर सकते हैं, स्पष्ट स्थानिक अधिकार-क्षेत्रों के माध्यम से जवाबदेही को सुदृढ़ कर सकते हैं, सेवा अंतराल एवं वितरण असंतुलन की पहचान कर सकते हैं तथा समयबद्ध, डेटा-आधारित निर्णय ले सकते हैं।

प्रशासनिक पदानुक्रम को बस्ती-स्तरीय स्थानिक डेटा के साथ एकीकृत करते हुए यह प्लेटफ़ॉर्म एक सुसंगत भू-स्थानिक इंटेलिजेंस लेयर स्थापित करता है। इस एकीकरण से परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा मिशन भागीरथा के अंतर्गत साक्ष्य-आधारित अवसंरचना योजना को मजबूती मिली है।

उन्नत कार्यात्मक क्षमताएँ

एंड-टू-एंड नेटवर्क कवरेज विश्लेषण

जीआईएस प्लेटफ़ॉर्म इंटेक संरचनाओं से लेकर बस्ती-स्तरीय अंतिम बिंदु तक संपूर्ण नेटवर्क का ट्रेसिंग सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से इंजीनियर सेवा कवरेज का आकलन करते हुए आंशिक रूप से आच्छादित बस्तियों, टेल-एंड आपूर्ति कमियों, नेटवर्क डिस्कनेक्टिविटी तथा वितरण असमानताओं की पहचान कर सकते हैं।

यह स्थानिक विश्लेषण अवसंरचना सुदृढ़ीकरण की प्राथमिकता निर्धारण तथा प्रभावी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी योजना को सक्षम बनाता है।

अवसंरचना-विहीन बस्तियों की पहचान

प्रणाली भू-स्थानिक विश्लेषण के माध्यम से उन बस्तियों की पहचान करती है जहाँ आवश्यक अवसंरचना का अभाव है, जैसे:

  • ओएचएसआर की अनुपस्थिति
  • पृथक या दूरस्थ बस्तियाँ
  • पहाड़ी अथवा भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र
  • नेटवर्क के डेड-एंड बिंदु

यह स्थानिक निदान लक्षित, सूक्ष्म-स्तरीय इंजीनियरिंग हस्तक्षेपों को सक्षम बनाता है, जैसे विकेन्द्रीकृत भंडारण, समर्पित पम्पिंग व्यवस्था, स्थानीय वैकल्पिक जल स्रोत तथा नेटवर्क पुनर्संरचना।

परिणामस्वरूप, जल सेवा वितरण अधिक समावेशी और संदर्भ-संवेदनशील बनता है।

ग्रामीण वितरण नेटवर्क का व्यापक डिजिटलीकरण

देश के सबसे बड़े ग्रामीण पाइपलाइन मानचित्रण अभियानों में से एक के अंतर्गत लगभग 65,000 किलोमीटर ग्राम-स्तरीय वितरण पाइपलाइन का डिजिटलीकरण मात्र छह माह की अवधि में किया गया।

प्लेटफ़ॉर्म में विकसित एक विशेष जीआईएस एडिटिंग टूल उच्च-रिज़ॉल्यूशन ईएसआरआई सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर ग्राम-स्तरीय पाइपलाइन का सटीक मानचित्रण सक्षम बनाता है।

कागज़-आधारित अभिलेखों से भू-संदर्भित डिजिटल एसेट्स की ओर यह परिवर्तन डेटा विश्वसनीयता को सुदृढ़ करता है, एसेट जीवनचक्र प्रबंधन को सक्षम बनाता है तथा दीर्घकालिक अवसंरचना योजना के लिए आधार प्रदान करता है।

रियल-टाइम जल आपूर्ति निगरानी डैशबोर्ड

प्लेटफ़ॉर्म एक थीमैटिक, रंग-आधारित भू-स्थानिक डैशबोर्ड प्रदान करता है, जो राज्यभर में बस्ती-स्तरीय जल आपूर्ति की स्थिति का त्वरित अवलोकन सक्षम बनाता है।

मिशन भागीरथ जल आपूर्ति प्रणाली

चित्र 9.2: मिशन भागीरथ जल आपूर्ति प्रणाली

आपूर्ति स्थिति वर्गीकरण:

  • हरा – पूर्ण आपूर्ति
  • नारंगी – औसत से अधिक आपूर्ति
  • पीला – आंशिक आपूर्ति
  • लाल – आपूर्ति नहीं

भू-स्थानिक दृश्यांकन के साथ परिचालन डेटा के एकीकरण से यह प्रणाली सेवा अंतराल की पहचान तथा पाइपलाइन क्षति, पम्प विफलता, विद्युत बाधा या स्रोत कमी जैसी परिचालन समस्याओं का शीघ्र पता लगाने में सहायक होती है।

इससे निगरानी दक्षता बढ़ती है, प्रतिक्रिया समय घटता है और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होता है।

एकीकृत जल गुणवत्ता निगरानी

प्लेटफ़ॉर्म राज्य की जल गुणवत्ता प्रयोगशालाओं का स्थानिक मानचित्रण करता है, जिसमें शामिल हैं:

  • एनएबीएल मान्यता स्थिति
  • परीक्षण मानक (रासायनिक एवं जीवाणु संबंधी)
  • प्रयोगशाला उपकरण एवं अवसंरचना
  • तकनीकी मानव संसाधन
  • भू-स्थानिक लोकेशन

जीआईएस परिवेश में इन आंकड़ों के एकीकरण से राज्यभर में जल गुणवत्ता निगरानी अधिक सुदृढ़ एवं समन्वित होती है।

उच्च-रिज़ॉल्यूशन स्थानिक दृश्यांकन

उच्च-रिज़ॉल्यूशन ईएसआरआई सैटेलाइट इमेजरी के साथ एकीकरण से अवसंरचना एसेट्स का विस्तृत एवं सटीक भू-संदर्भित दृश्यांकन संभव होता है।

यह सुविधा पाइपलाइन संरेखण के सत्यापन, स्थलाकृतिक विश्लेषण, भूमि उपयोग मूल्यांकन तथा नई अवसंरचना के सटीक नियोजन में सहायक होती है।

इमेजरी पर एसेट डेटा के ओवरले से स्थानिक सटीकता बढ़ती है तथा फील्ड-स्तरीय अनिश्चितताओं में कमी आती है।

राज्यव्यापी भू-स्थानिक जल अवसंरचना रिपॉजिटरी

यह प्लेटफ़ॉर्म भारत की सबसे बड़ी ग्रामीण जल जीआईएस रिपॉजिटरी में से एक का प्रबंधन करता है, जो संपूर्ण अवसंरचना जीवनचक्र—योजना निर्माण, क्रियान्वयन, निगरानी, अनुरक्षण तथा नीतिगत निर्णय—के लिए एकीकृत डिजिटल आधार प्रदान करता है।

प्रणाली वर्तमान में राज्यभर में जल अवसंरचना तथा प्रशासनिक कवरेज से संबंधित व्यापक भू-स्थानिक डेटा का संधारण करती है:

प्रशासनिक कवरेज
  • 32 ज़िले
  • 99 निर्वाचन क्षेत्र
  • 31 सेगमेंट
  • 572 मंडल
  • 23,671 ग्रामीण बस्तियाँ
  • 943 शहरी बस्तियाँ
स्रोत एवं इंटेक अवसंरचना
  • 32 सतही जल स्रोत
  • 78 इंटेक संरचनाएँ
शोधन एवं भंडारण अवसंरचना
  • 123 जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी)
  • 775 सम्प
  • 190 ग्राउंड लेवल बैलेंसिंग रिज़र्वायर (जी.एल.बी.आर.)
  • 210 ब्रेक प्रेशर टैंक (बी.पी.टी.)
  • 691 ओवरहेड बैलेंसिंग रिज़र्वायर (ओ.एच.बी.आर.)
  • 36,473 ग्राम स्तरीय ओवरहेड सर्विस रिज़र्वायर (ओ.एच.एस.आर.)
नेटवर्क अवसंरचना एवं कवरेज
  • 1.35 लाख किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क
  • 292 बल्क जल आपूर्ति कनेक्शन
  • लगभग 2.4 करोड़ जनसंख्या का कवरेज

यह विस्तृत भू-स्थानिक रिपॉजिटरी एक विश्वसनीय एवं एकीकृत डेटा आधार के रूप में कार्य करती है, जो विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर समन्वित अवसंरचना प्रबंधन तथा सूचित निर्णय-निर्माण को सक्षम बनाती है।

श्री जी. कृपाकर, प्रमुख अभियंता (ईएनसी)
श्री जी. कृपाकर, प्रमुख अभियंता (ईएनसी)
विभागाध्यक्ष, मिशन भागीरथ, तेलंगाना सरकार

राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के साथ एकीकरण

वेबजीआईएस प्लेटफ़ॉर्म का एकीकरण पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) पोर्टल के साथ किया गया है, जिससे संरचित भू-स्थानिक डेटा विनिमय तथा पाइपलाइन नेटवर्क लेयर्स का राष्ट्रीय अवसंरचना ढांचे में मानकीकृत समावेशन संभव हो सका है। यह एकीकरण राज्य-स्तरीय अवसंरचना प्रणालियों और राष्ट्रीय योजना पहलों के बीच समन्वय स्थापित करता है, जिससे अवसंरचना विकास अधिक सुसंगत और एकीकृत रूप से संचालित होता है।

गतिशक्ति प्लेटफ़ॉर्म के साथ निर्बाध अंतर-संचालनीयता विभिन्न क्षेत्रों—जैसे सड़क, ऊर्जा, सिंचाई एवं दूरसंचार—के बीच बहु-क्षेत्रीय योजना निर्माण को भी सुदृढ़ करती है।

जल अवसंरचना को व्यापक राष्ट्रीय भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र में समाहित करके यह प्रणाली विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा एकीकृत निर्णय-निर्माण को सक्षम बनाती है।

पारदर्शिता और जवाबदेही

जीआईएस-सक्षम मानचित्रण और विश्लेषणात्मक डैशबोर्ड के उपयोग से प्रणाली की निगरानी और सेवा वितरण में पारदर्शिता सुदृढ़ हुई है। स्थान-आधारित विश्वसनीय डेटा की उपलब्धता विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर अधिक सुसंगत और साक्ष्य-आधारित पर्यवेक्षण को संभव बनाती है।

भूमिका-आधारित अभिगम (रोल-बेस्ड एक्सेस) के माध्यम से निर्णय-निर्माता रियल-टाइम के निकट अवसंरचना प्रदर्शन और सेवा स्थिति की निगरानी कर सकते हैं। इससे परिसंपत्तियों (एसेट्स) और परिचालन प्रक्रियाओं की अनुरेखणीयता बढ़ती है, सेवा अंतराल की समय पर पहचान होती है तथा अधिक जवाबदेह और परिणामोन्मुख शासन को बढ़ावा मिलता है।

खंडित रिपोर्टिंग प्रणालियों से हटकर एक एकीकृत भू-स्थानिक डेटा फ्रेमवर्क की ओर यह परिवर्तन न केवल दृश्यता को बढ़ाता है, बल्कि ग्रामीण जल आपूर्ति प्रबंधन में संस्थागत जवाबदेही को भी सुदृढ़ करता है।

ग्राम के भीतर जल आपूर्ति नेटवर्क

चित्र 9.3: ग्राम के भीतर जल आपूर्ति नेटवर्क

निष्कर्ष

मिशन भागीरथ का वेबजीआईएस प्लेटफ़ॉर्म अगली पीढ़ी के जल शासन के लिए एक समग्र, प्रौद्योगिकी-सक्षम ढांचा प्रस्तुत करता है। एंड-टू-एंड एसेट जियो-टैगिंग, बस्ती-स्तरीय सेवा निगरानी, रियल-टाइम विश्लेषणात्मक डैशबोर्ड, उच्च-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी, जल गुणवत्ता निगरानी तथा अंतर-विभागीय डेटा एकीकरण के माध्यम से इस प्रणाली ने ग्रामीण जल आपूर्ति अवसंरचना के योजना, निगरानी और प्रबंधन को अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाया है।

यह प्लेटफ़ॉर्म केवल अवसंरचना प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक डेटा-आधारित, गतिशील शासन मॉडल की ओर स्पष्ट परिवर्तन को दर्शाता है। एकीकृत भू-स्थानिक परिवेश में संपूर्ण जल आपूर्ति नेटवर्क का दृश्यांकन, विश्लेषण और सतत निगरानी परिचालन दक्षता को बढ़ाती है, सेवा विश्वसनीयता में सुधार करती है तथा त्वरित और सूचित निर्णय-निर्माण को सक्षम बनाती है।

एक स्केलेबल और अंतर-संचालनीय प्रणाली के रूप में यह मॉडल अन्य राज्यों एवं क्षेत्रों—जैसे सिंचाई, ऊर्जा वितरण और शहरी उपयोगिताओं—के लिए भी एक उपयोगी संदर्भ ढांचा प्रदान करता है, जहाँ बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सेवा वितरण में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें

राज्य सूचना अधिकारी
एनआईसी तेलंगाना राज्य केंद्र
ए-ब्लॉक, बीआरकेआर भवन, टैंक बंड रोड
हैदराबाद, तेलंगाना – 500004

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