राज्य से जनवरी 2026

बिहार राज्य व्यापक स्तर पर डिजिटल शासन को सशक्त बनाना

द्वारा संपादित: विनोद कुमार गर्ग
बिहार

एनआईसी बिहार ने भूमि अभिलेख, न्याय वितरण, खनन, वन, अवसंरचना, कल्याण, कृषि, शिक्षा, चुनाव, स्थानीय प्रशासन और नागरिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण आईसीटी प्लेटफॉर्मों को डिज़ाइन और कार्यान्वित करके राज्य में डिजिटल शासन के एक प्रमुख चालक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। एनआईसीनेट और एनकेएन जैसे मज़बूत नेटवर्कों द्वारा समर्थित इन पहलों ने डीबीटी, मोबाइल शासन, जीआईएस एकीकरण और कागज रहित प्रशासन के माध्यम से पारदर्शिता, दक्षता और सेवा पहुँच को मज़बूत किया है, जिससे एनआईसी बिहार को अपनी तकनीकी उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है।

1988 में स्थापित, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), बिहार राज्य सरकार के प्रमुख तकनीकी भागीदार के रूप में बिहार की डिजिटल गवर्नेंस यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। राज्य के लगभग सभी प्रमुख विभागों के साथ निकट समन्वय में कार्य करते हुए, एनआईसी बिहार ने मैनुअल एवं विखंडित प्रक्रियाओं से एकीकृत, पारदर्शी तथा नागरिक-केंद्रित ई-गवर्नेंस प्रणालियों की ओर संक्रमण को सक्षम बनाया है।

पटना स्थित राज्य इकाई तथा राज्य के सभी 38 जिलों में कार्यरत जिला इकाइयों के माध्यम से सुदृढ़ उपस्थिति के साथ, एनआईसी बिहार ने शासन, सेवा प्रदायगी एवं प्रशासनिक सुधार हेतु सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग को एक मूलभूत सक्षमकर्ता के रूप में संस्थागत स्वरूप प्रदान किया है।

राज्य में आईसीटी पहलें

बिहारभूमि

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डी.आई.एल.आर.एम.पी.) के अंतर्गत, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), बिहार द्वारा सतत आईसीटी हस्तक्षेपों के माध्यम से एक समग्र एकीकृत भूमि अभिलेख प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इन प्रयासों से राजस्व प्रशासन एवं भूमि प्रबंधन से संबंधित प्रमुख प्रक्रियाओं का व्यापक स्वचालन संभव हुआ है।

म्यूटेशन, लगान भुगतान, जमाबंदी, राजस्व न्यायालय वाद, भूमि स्वामित्व प्रमाण-पत्र (एलपीसी), अधिकार अभिलेख (आरओआर) तथा चालू खतियान जैसी मूलभूत सेवाएँ अब सुरक्षित, इंटरनेट आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस डिजिटल परिवर्तन के परिणामस्वरूप मैनुअल प्रक्रियाओं एवं रजिस्टरों पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है तथा इनके स्थान पर म्यूटेशन (सरकारी भूमि सहित), एलपीसी, लगान, खतियान, जमाबंदी रजिस्टर (रजिस्टर-II), सरकारी भूमि रजिस्टर तथा राजस्व न्यायालय प्रबंधन हेतु सुदृढ़ एवं सुरक्षित आईसीटी समाधान स्थापित किए गए हैं।

वर्ष 2017 से अब तक लगभग 15 सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग क्रियाशील हैं, जिनके माध्यम से 4 करोड़ से अधिक जमाबंदी अभिलेखों तथा उनसे संबंधित लाखों सहायक विधिक दस्तावेजों का डिजिटल रूप में प्रबंधन किया जा रहा है।

क्रम सं. अनुप्रयोग
1 बिहारभूमि एवं एमआईएस
2 ई-म्यूटेशन
3 ई-एलपीसी
4 ऑनलाइन लगान भुगतान
5 सभी 22 भारतीय भाषाओं में ऑनलाइन जमाबंदी एवं आरओआर
6 ई-जमाबंदी
7 स्वप्रेरित (सुओ मोटो) म्यूटेशन
8 सरकारी भूमि म्यूटेशन
9 राजस्व न्यायालय वाद प्रबंधन प्रणाली
10 परिमार्जन प्लस
11 जन शिकायत
12 एकीकरण सेवाएँ
13 भू-नक्शा (यूएलपीआईएन)
14 मोबाइल अनुप्रयोग
15 क्रेडेंशियल्स प्रबंधन प्रणाली

सी.सी.एम.एस.

राज्य सरकार के विरुद्ध दायर न्यायालय वादों की निगरानी एवं समयबद्ध प्रत्युत्तर देना लंबे समय से एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव न्याय वितरण प्रणाली तथा आम जनमानस पर पड़ता है। कई अवसरों पर राज्य सरकार के विभागों से समय पर उत्तर प्रस्तुत न होने के कारण राज्य के विरुद्ध निर्णय/आदेश पारित हो जाते हैं।

इस स्थिति के प्रमुख कारणों में न्यायालय वादों हेतु केंद्रीकृत डाटाबेस का अभाव, एक सुव्यवस्थित निगरानी तंत्र की कमी, हितधारकों के मध्य समुचित समन्वय का अभाव तथा सूचना तक सीमित पहुँच शामिल हैं। इन चुनौतियों के समाधान हेतु बिहार सरकार के शिक्षा विभाग एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की परिकल्पना के अनुरूप न्यायालय वाद निगरानी प्रणाली (सीसीएमएस) का अभिकल्पन एवं विकास किया गया है।

सी.सी.एम.एस की प्रमुख विशेषताएँ

  • भूमिका आधारित उपयोगकर्ता प्रणाली
  • एनजेडीजी–नैपिक्स प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण
  • वाद प्रबंधन प्रणाली
  • वाद का संपूर्ण इतिहास
  • क्वेरी बिल्डर
  • रीयल-टाइम अद्यतन
  • पत्राचार प्रबंधन
  • निस्तारित वादों की अनुपालन ट्रैकिंग
  • दैनिक वाद सूची (डेली केस बोर्ड)
  • अंतरिम आदेश एवं अंतिम निर्णय

प्रमुख कार्यान्वयन

  • महाधिवक्ता कार्यालय
  • अपर सॉलिसिटर जनरल
  • बिहार सरकार के राज्य भर के सभी विभाग/ कार्यालय
  • छत्तीसगढ़ राज्य

खाननसॉफ्ट

खाननसॉफ्ट बिहार में खनन गतिविधियों के प्रबंधन एवं निगरानी हेतु विकसित एक समेकित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो जी2जी, जी2बी, सी2जी तथा बी2बी सेवाओं को समर्थित करते हुए विभिन्न हितधारकों के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करता है। यह प्रणाली 24×7×365 तकनीकी सहायता, भीड़ एवं कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं को कम करने हेतु ऑन-डिमांड स्लॉटिंग तंत्र तथा वाहन पोर्टल के साथ एकीकरण के माध्यम से रीयल-टाइम वाहन सत्यापन की सुविधा प्रदान करती है।

प्रणाली में ओवरलोडिंग की रोकथाम हेतु वे-ब्रिज एकीकरण को अनिवार्य किया गया है तथा जीपीएस आधारित, जियो-फेंस्ड चालान जनरेशन का प्रावधान किया गया है, जिससे केवल अधिकृत खनन स्थलों पर सत्यापित वाहनों के लिए ही चालान निर्गत होना सुनिश्चित होता है।

प्रभाव

  • खनिज प्रशासन का सुदृढ़ीकरण
  • अवैध खनन एवं वाहन ओवरलोडिंग में उल्लेखनीय कमी
  • खनन परिचालनों की रीयल-टाइम, आईटी सक्षम निगरानी
  • चालान जनरेशन हेतु प्रभावी नियंत्रण तंत्र
  • अपंजीकृत वाहनों के लिए फर्जी चालानों का उन्मूलन
  • परिवहनकर्ताओं की जीपीएस आधारित निगरानी
  • पारदर्शिता एवं प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि

एफ.एम.आई.एस

एफ.एम.आई.एस (वन प्रबंधन सूचना प्रणाली) राज्य में वन रोपण, नर्सरी, संयुक्त वन प्रबंधन, वन अपराध, वन्यजीव गतिविधियाँ, मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली तथा इको-टूरिज्म गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं के सूक्ष्म-स्तरीय प्रबंधन हेतु विकसित एक आईसीटी आधारित प्रणाली है। यह प्रणाली एकीकृत वेब, जीआईएस एवं मोबाइल प्रौद्योगिकी के माध्यम से संचालित होती है।

इस परियोजना का कार्यान्वयन विभाग के अंतर्गत राज्य के सभी 4 क्षेत्र, 8 सर्किल, 28 डिवीजन, 110 रेंज, 416 बीट तथा 1547 सब-बीट कार्यालयों तक विस्तारित है।

Fig: 1.1 चित्र 2.1 : सभी 22 भारतीय भाषाओं में ऑनलाइन आरओआर (अधिकार अभिलेख)

आर.सी.डी ऑनलाइन

बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग (आर.सी.डी) द्वारा सड़कों एवं पुल परियोजनाओं की ऑनलाइन निगरानी हेतु जीआईएस युक्त एकीकृत परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली (पी.एम.आई.एस) का कार्यान्वयन किया गया है। यह प्रणाली आर.सी.डी, बी.आर.पी.एन.एन.एल तथा बी.एस.आर.डी.सी द्वारा क्रियान्वित कार्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की रीयल-टाइम ट्रैकिंग को सक्षम बनाती है।

जीआईएस घटक के माध्यम से सड़क परिसंपत्तियों एवं क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाओं का थीमैटिक मैपिंग किया जाता है, जिससे प्रधानमंत्री गति शक्ति पहल के अंतर्गत योजना निर्माण में सहयोग प्राप्त होता है। पी.एम.आई.एस के साथ जीआईएस का एकीकरण परियोजना प्रगति के मानचित्र-आधारित दृश्यांकन को संभव बनाता है, जिससे पारदर्शिता, समन्वय एवं डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया में सुधार होता है।

Fig: 2.1 चित्र 2.2 : सी.सी.एम.एस प्रक्रिया प्रवाह

ई-ऑफिस

एनआईसी द्वारा विकसित ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से ई-फाइल, ई-रसीद तथा नॉलेज मैनेजमेंट मॉड्यूल के जरिए फाइल मूवमेंट एवं शासकीय पत्राचार का डिजिटलीकरण किया गया है। इससे निर्णय प्रक्रिया में तीव्रता, पारदर्शिता में वृद्धि तथा कागज़ के उपयोग में उल्लेखनीय कमी सुनिश्चित हुई है। प्रभावी अंगीकरण हेतु अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

बिहार सरकार द्वारा ई-ऑफिस को विभागों, निदेशालयों एवं जिलों में व्यापक रूप से लागू किया गया है, जिससे पेपरलेस गवर्नेंस, मानकीकृत वर्कफ़्लो तथा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ एकीकरण को बढ़ावा मिला है।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार एम्स, पटना सहित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आर.पी.सी.ए.यू), पूसा तथा गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जी.एफ.सी.सी), जल शक्ति मंत्रालय द्वारा भी ई-ऑफिस को अपनाया गया है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण, अंतर-विभागीय समन्वय में सुधार तथा पूर्णतः पेपरलेस कार्य परिवेश संभव हुआ है।

Fig: 1.3 चित्र 2.3: एफ.एम.आई.एस का अवलोकन

जन वितरण अन्न (जेवीए)

जन वितरण अन्न (जेवीए) बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा अनुमोदित एक सुरक्षित एवं स्केलेबल डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो वर्ष 2017 से राज्य की राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली का संचालन कर रहा है। यह नागरिक-केंद्रित समाधान आवेदन, ट्रैकिंग, अनुमोदन एवं राशन कार्ड निर्गमन तक की समस्त सेवाएँ एंड-टू-एंड ऑनलाइन उपलब्ध कराता है।

वर्तमान में जेवीए लगभग 2.07 करोड़ परिवारों एवं 8.35 करोड़ सदस्यों के डेटा का प्रबंधन कर रहा है, जिससे यह बिहार की सबसे बड़ी कल्याण वितरण प्रणालियों में से एक बन गया है। आई.एम.पी.डी.एस के साथ एकीकरण के माध्यम से वर्ष 2020 से वन नेशन वन राशन कार्ड (ओ.एन.ओ.आर.सी) योजना को सक्षम किया गया है, जिससे प्रवासी श्रमिकों को अंतर-राज्यीय खाद्यान्न पोर्टेबिलिटी का महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त हुआ है।

यह प्लेटफॉर्म ए.ई.पी.डी.एस केंद्रीय सर्वर के साथ एकीकृत है, जिससे ई-पॉस मशीनों के माध्यम से रीयल-टाइम एवं पारदर्शी वितरण सुनिश्चित होता है। साथ ही, राज्य भर के लगभग 54,000 एफपीएस का समग्र प्रबंधन भी इसी प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है।

जेवीए का डिजिलॉकर के साथ एकीकरण किया गया है, जिससे बिहार डिजिटल राशन कार्ड उपलब्ध कराने वाला छठा राज्य बना है। इसके अतिरिक्त, परिवार स्थिति सत्यापन हेतु इसे आयुष्मान भारत के साथ भी जोड़ा गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान, जेवीए ने 40 लाख से अधिक राशन कार्डों के लिए खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित कर खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रमुख विशेषताएँ

  • सभी जिलों में पूर्णतः भूमिका आधारित ऑनलाइन प्रणाली
  • राशन कार्ड आवेदन, संशोधन एवं ट्रैकिंग हेतु एंड-टू-एंड नागरिक सेवाएँ
  • बड़े पैमाने पर लाभार्थी डेटा का सुरक्षित प्रबंधन
  • ओ.एन.ओ.आर.सी के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पोर्टेबिलिटी
  • ई-पॉस मशीनों द्वारा निर्बाध खाद्यान्न वितरण
  • लगभग 54,000 एफपीएस का समग्र प्रबंधन
  • डिजिटल राशन कार्ड हेतु डिजिलॉकर एकीकरण
  • सक्रिय परिवार सत्यापन हेतु आयुष्मान भारत लिंक
  • कोविड-19 जैसी आपात स्थितियों में सिद्ध स्केलेबिलिटी

निर्वाचन प्रबंधन हेतु एकीकृत डिजिटल प्रणालियाँ

बिहार विधानसभा निर्वाचन 2025 के दौरान राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), बिहार द्वारा विकसित एवं कार्यान्वित अनेक बड़े पैमाने की, प्रौद्योगिकी-संचालित डिजिटल प्रणालियों का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया। इन प्रणालियों के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग (ई.सी.आई) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पारदर्शिता, कार्यकुशलता, शुद्धता एवं अनुपालन सुनिश्चित किया गया।

ये प्रणालियाँ निर्वाचन की संपूर्ण जीवन-चक्र प्रक्रिया को आच्छादित करती हैं, जिसमें निर्वाचन कार्मिक प्रबंधन, बल तैनाती, मतगणना तथा फील्ड स्तर पर रीयल-टाइम ट्रैकिंग शामिल है।

निर्वाचन कार्मिक प्रबंधन सूचना प्रणाली (ई.पी.एम.आई.एस)

ई.पी.एम.आई.एस एक व्यापक वेब-आधारित समाधान है, जिसे मतदान एवं मतगणना कार्मिकों के प्रबंधन को डिजिटाइज़ एवं सुव्यवस्थित करने हेतु विकसित किया गया है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • कार्मिक जीवन-चक्र का एंड-टू-एंड प्रबंधन: पंजीकरण, सत्यापन, प्रशिक्षण, ड्यूटी आवंटन, उपस्थिति एवं संचार
  • त्रुटियों के उन्मूलन हेतु स्वचालित डेटा सत्यापन, जैसे:
    • नाम–लिंग विसंगति
    • डुप्लिकेट मोबाइल नंबर
    • डुप्लिकेट बैंक खाते
  • ई.सी.आई मानकों के अनुरूप निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु नियम-आधारित रैंडमाइज़ेशन:
    • पुरुष कार्मिकों हेतु विधानसभा क्षेत्र (ए.सी) पृथक्करण एवं कार्यालय विविधता
    • महिला दलों के लिए न्यूनतम महिला प्रतिनिधित्व के साथ समान ए.सी में तैनाती
  • स्वचालित दल गठन तथा ए.सी / बूथ / टेबल आवंटन
  • प्रतिनियुक्ति आदेश एवं वैधानिक प्रतिवेदनों का सृजन
  • एस.एम.एस आधारित रीयल-टाइम संचार
  • मानव संसाधन की कमी की पूर्ति हेतु अंतर-जिला कार्मिक स्थानांतरण
  • बल रैंडमाइज़ेशन मॉड्यूल के साथ निर्बाध एकीकरण

बल तैनाती प्रणाली

बल तैनाती प्रणाली बिहार में निर्वाचन के दौरान पुलिस एवं सुरक्षा बलों के प्रबंधन हेतु विकसित एक उच्च-स्तरीय स्केलेबल, निर्णय-सहायक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

प्रमुख कार्य

  • निर्वाचन चरणों के अनुसार बलों की आवाजाही की योजना एवं ट्रैकिंग
  • निम्नलिखित बलों की तैनाती:
    • राज्य पुलिस
    • होम गार्ड्स
    • सी.ए.पी.एफ / सी.पी.एम.एफ
  • स्वचालित दल गठन एवं रैंडमाइज़्ड तैनाती
  • रीयल-टाइम आवश्यकता के आधार पर अंतर-जिला बल स्थानांतरण
  • निगरानी हेतु एस.एम.एस अलर्ट एवं लाइव डैशबोर्ड

इलेक्ट्रीसेस – निर्वाचन ड्यूटी ट्रैकिंग प्रणाली

इलेक्ट्रीसेस एक जी.पी.एस सक्षम मोबाइल एवं वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसे निर्वाचन अधिकारियों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग हेतु विकसित किया गया है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • सक्रिय कार्य-आधारित जीपीएस टास्क एवं रूट ट्रैकिंग
  • घटना रिपोर्टिंग एवं मानचित्र-आधारित निगरानी
  • लाइव पर्यवेक्षण हेतु वेब डैशबोर्ड
  • एस.एम.एस संचार एवं समेकित रिपोर्टिंग

कॉमन डीबीटी पोर्टल

कॉमन डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) पोर्टल, जिसे एनआईसी, बिहार द्वारा डिज़ाइन एवं विकसित किया गया है, लाभार्थियों को बिना किसी मध्यस्थ के सीधे लाभ अंतरण के प्रबंधन एवं निगरानी हेतु उपयोग किया जाता है। यह पोर्टल यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी कल्याणकारी लाभ सही लाभार्थी को, सही समय पर, सही बैंक खाते में प्राप्त हों। वर्तमान में यह बिहार सरकार के 21 विभागों की लगभग 135 योजनाओं को आच्छादित करता है।

कॉमन डीबीटी पोर्टल की प्रमुख विशेषताएँ

  • राज्य भर में लाभार्थी भुगतान एवं विक्रेता भुगतान (आर.ई.ए.टी) हेतु एकीकृत पोर्टल
  • फील्ड स्तर पर लाभार्थी पहचान एवं अनुमोदन
  • पी.एफ.एम.एस, यू.आई.डी.ए.आई, एन.पी.सी.आई एवं अन्य पोर्टलों के साथ एकीकरण
  • निधि अंतरण से पूर्व पी.एफ.एम.एस के माध्यम से लाभार्थी सत्यापन
  • बल्क फंड ट्रांसफर की सुविधा, बैंक शाखाओं पर निर्भरता समाप्त
  • पोर्टल/एस.एम.एस के माध्यम से वास्तविक निधि अंतरण स्थिति की जानकारी
  • निधि अंतरण चक्र को घटाकर पाक्षिक/मासिक किया गया

कॉमन डीबीटी पोर्टल का प्रभाव

वर्ष 2017 से जून 2025 तक, कॉमन डीबीटी पोर्टल के माध्यम से ₹1,27,800 करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण किया जा चुका है।

क्रम सं. विभाग का नाम राशि कुल लेन-देन
1 बीसी एवं ईबीसी कल्याण 1982972974 7944398
2 अल्पसंख्यक कल्याण 1967248828 732746
3 स्वास्थ्य 21543229381 16279878
4 लघु जल संसाधन विभाग 1499587396 49767
5 सामाजिक कल्याण 430558474749 606738121
6 ग्रामीण विकास 320222693188 78120037
7 आपदा प्रबंधन विभाग 91704561299 85071906
8 अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण 1119501315 4121462
9 शहरी विकास 4014427403 5527209
10 गृह विभाग 1472319000 96425
11 शिक्षा 317809438115 308777736
12 श्रम संसाधन विभाग 2727579008 6487656
13 कृषि, सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग 51629896934 16041355
14 योजना विभाग 9086267000 31170790
15 सहकारिता 20664100536 5664825
कुल 1278002297126 1172824311

केन केयर पोर्टल सी.सी.एस पोर्टल

कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है तथा गन्ना राज्य की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), बिहार द्वारा विकसित केन केयर सिस्टम (सी.सी.एस) पोर्टल के माध्यम से बिहार सरकार का गन्ना उद्योग विभाग गन्ना क्षेत्र के विकास एवं सततता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

यह पोर्टल किसानों को प्रभावी सहयोग प्रदान करने, सेवाओं को सुव्यवस्थित करने तथा गन्ना उद्योग को समृद्ध एवं सतत भविष्य की ओर अग्रसर करने में सहायक है। नवाचार, डिजिटल सशक्तिकरण तथा उन्नत कृषि तकनीकों को प्राथमिकता देते हुए विभाग का उद्देश्य किसान कल्याण एवं उत्पादकता में वृद्धि करना है। इन पहलों के माध्यम से बिहार को देश में गन्ना उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

सी.सी.एस पोर्टल गन्ना उद्योग विभाग का एकीकृत पोर्टल है, जिसके अंतर्गत एम.जी.वी.वाई, गुड़-खांडसारी, गन्ना यंत्रीकरण योजना, जेड.डी.सी योजना आदि को ऑनलाइन किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से सभी योजनाओं के आवेदन एवं प्रसंस्करण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

‘इख मित्र’ मोबाइल अनुप्रयोग

गन्ना किसानों हेतु शिकायत निवारण, परामर्श सेवाएँ तथा गन्ना विशेषज्ञों से परामर्श की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से ‘इख मित्र’ नामक मोबाइल अनुप्रयोग विकसित किया गया है। वर्तमान में इसके सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 9,800 है। यह अनुप्रयोग गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है।

गन्ना यंत्रीकरण

गन्ना यंत्रीकरण बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य उत्पादकता में वृद्धि, खेती की लागत में कमी तथा श्रम की कमी की चुनौती का समाधान करना है। इस पहल के अंतर्गत भूमि तैयारी, रोपण, अंतर-फसली क्रियाएँ, सिंचाई एवं कटाई सहित गन्ना खेती के विभिन्न चरणों में आधुनिक कृषि यंत्रों एवं उपकरणों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

यंत्रीकरण को बढ़ावा देकर विभाग गन्ना खेती के आधुनिकीकरण, सतत कृषि पद्धतियों को सुनिश्चित करने तथा बिहार में गन्ना क्षेत्र की समग्र दक्षता में सुधार की दिशा में कार्य कर रहा है।

Fig: 1.4 चित्र: 2.4: इख मित्र मोबाइल एप्लिकेशन

मेधासॉफ्ट

मेधासॉफ्ट बिहार सरकार के शिक्षा विभाग हेतु विकसित एक केंद्रीकृत, वेब-आधारित अनुप्रयोग है। यह प्लेटफॉर्म छात्र सूचना के एंड-टू-एंड प्रबंधन, छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन योजनाओं के क्रियान्वयन तथा पात्र लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। डेटा संकलन, सत्यापन एवं भुगतान वर्कफ़्लो के एकीकरण के माध्यम से यह प्रणाली पारदर्शिता, शुद्धता तथा समयबद्ध लाभ वितरण को सुदृढ़ करती है।

प्रमुख उद्देश्य

  • छात्रों का एक केंद्रीकृत एवं प्रामाणिक डेटाबेस तैयार करना एवं संधारित करना
  • छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग
  • डुप्लिकेट, फर्जी अथवा अपात्र छात्र अभिलेखों की पहचान एवं उन्मूलन
  • पारदर्शी, निर्बाध एवं समयबद्ध डीबीटी भुगतान सुनिश्चित करना
  • विभागीय निर्णय हेतु रीयल-टाइम निगरानी, विश्लेषण एवं रिपोर्टिंग उपलब्ध कराना

आच्छादित योजनाएँ

  • मुख्यमंत्री बालक पोशाक योजना (ए.पी.एल), कक्षा 1–8
  • मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना, कक्षा 1–8
  • मुख्यमंत्री बालक पोशाक योजना (एस.सी/एस.टी/बी.पी.एल), कक्षा 1–8
  • मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना, कक्षा 9–12
  • मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना, कक्षा 9–12
  • मुख्यमंत्री बालक साइकिल योजना, कक्षा 9–12
  • किशोरी स्वास्थ्य योजना
  • छात्रवृत्ति – सामान्य वर्ग, कक्षा 1–8

चाणक्य

चाणक्य (विश्वविद्यालय पंजीकरण एवं परीक्षा प्रबंधन प्रणाली) राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), बिहार द्वारा विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों हेतु विकसित एक वेब-सक्षम, भूमिका-आधारित एवं वर्कफ़्लो संचालित आईसीटी समाधान है। यह एकीकृत प्लेटफॉर्म सभी कार्यात्मक मॉड्यूल्स को एक ही केंद्रीकृत डेटाबेस पर संचालित करता है, जिससे जटिल इंटरफेस की आवश्यकता समाप्त होती है तथा उच्च शुद्धता एवं विश्वसनीयता के साथ रीयल-टाइम डेटा एकीकरण सुनिश्चित होता है।

यह प्रणाली पंजीकरण एवं परीक्षा शाखाओं के मध्य निर्बाध समन्वय को सक्षम बनाते हुए त्रुटियों में कमी, पारदर्शिता में वृद्धि तथा शैक्षणिक प्रशासन के सरलीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ई-पंचायत – बिहार

ई-पंचायत बिहार एक वेब-आधारित लेखा एवं गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है, जिसे पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, भुगतान प्रसंस्करण एवं निगरानी को सुव्यवस्थित करने हेतु विकसित किया गया है।

Fig: 1.5 चित्र: 2.5: सर्विस प्लस के अंतर्गत वर्षवार प्रदत्त सेवाएँ (2021 के बाद से घातीय वृद्धि)

प्रमुख विशेषताएँ

  • सुरक्षित एवं प्रमाणित लेन-देन हेतु डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से भुगतान
  • निर्बाध निधि अंतरण हेतु पी.एफ.एम.एस (आर.ई.ए.टी) मॉड्यूल के साथ एकीकरण
  • नोडल बैंकों के साथ एकीकरण
  • रीयल-टाइम सूचना हेतु एस.एम.एस एवं ई-मेल अलर्ट
  • मोबाइल आधारित निरीक्षण एवं जियो-टैगिंग
  • ऑनलाइन जी.एस.टी.आई.एन सत्यापन

उपलब्धियाँ

  • पंजीकृत योजनाएँ – 3,43,356
  • निर्मित वाउचर – 9,44,322
  • पंजीकृत विक्रेता – 13,693
  • पंजीकृत श्रमिक – 4,34,511
  • किया गया भुगतान – ₹51,78,81,68,662 (लगभग 5000 करोड़)

बी.बी.ओ.एस.ई

बिहार बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड एग्ज़ामिनेशन (बी.बी.ओ.एस.ई) ओपन एवं डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से बिहार में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देता है, विशेष रूप से वंचित वर्गों पर केंद्रित रहते हुए। यह उद्योग भागीदारों के सहयोग से अकुशल एवं अर्ध-कुशल युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगारोन्मुख कार्यबल में परिवर्तित करने का कार्य करता है।

बी.बी.ओ.एस.ई वेब अनुप्रयोग छात्र पंजीकरण, परीक्षा प्रपत्र, शुल्क भुगतान एवं परिणाम प्रसंस्करण सहित प्रमुख शैक्षणिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण एवं सरलीकरण को सक्षम बनाता है।

ई-डिस्ट्रिक्ट

बिहार ई-डिस्ट्रिक्ट मिशन मोड परियोजना बिहार सरकार की एक प्रमुख आईसीटी पहल है, जिसे डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के तकनीकी सहयोग से कार्यान्वित किया गया है। इसका उद्देश्य सर्विसप्लस नामक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जिला, अनुमंडल, प्रखंड, अंचल एवं ग्राम पंचायत स्तर पर उच्च-आवृत्ति, नागरिक-केंद्रित सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

वर्तमान में विभिन्न विभागों की 67 सेवाएँ पोर्टल पर लाइव हैं तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की 12 नई सेवाएँ कार्यान्वयनाधीन हैं।

ओ.एफ.एम.ए.एस

ऑनलाइन फार्म मैकेनाइजेशन एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर (ओ.एफ.एम.ए.एस) बिहार में किसानों को अनुदानित कृषि यंत्रों के वितरण को सुव्यवस्थित करने हेतु विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह किसानों, विक्रेताओं एवं निर्माताओं के बीच पारदर्शी एवं कुशल अंतःक्रिया सुनिश्चित करते हुए समयबद्ध एवं निष्पक्ष अनुदान वितरण को सक्षम बनाता है।

किसान ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करते हैं, जिनका कृषि विभाग के अंतर्गत पंचायत, प्रखंड एवं जिला स्तर पर बहु-स्तरीय वर्कफ़्लो के माध्यम से सत्यापन किया जाता है। सत्यापन उपरांत जिला प्राधिकरण द्वारा अनुमति निर्गत की जाती है, जिससे किसान अनुदानित दरों पर स्वीकृत कृषि यंत्र क्रय कर सकते हैं।

ओ.एफ.एम.ए.एस व्यक्तिगत किसानों एवं किसान समूहों (स्वयं सहायता समूह, जीविका आदि) को सिंगल इम्प्लीमेंट, इम्प्लीमेंट समूह तथा कृषि ड्रोन जैसी योजनाओं के अंतर्गत आच्छादित करता है।

ई-सहकारी

बिहार सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा विभागीय कार्यप्रणालियों को सुदृढ़ करने हेतु व्यापक सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, विशेष रूप से प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के माध्यम से खाद्यान्न खरीद की प्रक्रिया में व्याप्त अक्षमताओं तथा किसानों को भुगतान में होने वाली देरी की समस्या के समाधान के लिए। इन सुधारों को बिहार राज्य फसल सहायता योजना (बी.आर.एफ.एस.वाई) एवं संबंधित पहलों के माध्यम से समर्थन प्रदान किया गया है।

यह एकीकृत परियोजना किसान पंजीकरण, धान खरीद तथा समयबद्ध भुगतान सहित संपूर्ण एंड-टू-एंड वर्कफ़्लो का डिजिटलीकरण करती है। इसके अतिरिक्त, फसल कटाई प्रयोगों के माध्यम से धान एवं अन्य खरीफ फसलों की क्षति का आकलन कर डीबीटी के माध्यम से क्षतिपूर्ति भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। फसल क्षति एवं भूमि क्षेत्र के आधार पर ₹1,000 से ₹20,000 तक की राशि आधार पेमेंट ब्रिज के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरण की जाती है।

यह प्लेटफॉर्म कृषि यंत्रों पर दी जाने वाली सब्सिडी के प्रबंधन के माध्यम से कृषि निवेश एवं यंत्रीकरण को भी बढ़ावा देता है। अनुदानित कृषि उपकरणों की खरीद की निगरानी हेतु एक समर्पित मॉड्यूल भी विकसित किया गया है।

Fig: 1.6 चित्र: 2.6 भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माईटी) के सचिव श्री एस. कृष्णन, आईएएस ने बिहार स्थित एनआईसी का दौरा किया

प्रमुख मॉड्यूल

  • बी.आर.एफ.एस.वाई (बिहार राज्य फसल सहायता योजना)
  • प्रोक्योरमेंट (खरीद)
  • एम.पी.पी.वाई (मुख्यमंत्री पैक्स प्रोत्साहन योजना)
  • ए.एम.एस (एसेट मैनेजमेंट सिस्टम)
  • एम.एच.के.एस.वाई (मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना)
  • सी.ओ.टी.एस (को-ऑपरेटिव ऑफिसर्स ट्रैकिंग सिस्टम)
  • सोसाइटी पंजीकरण
  • सहकारी न्यायालय सूचना प्रणाली

आई.सी.टी अवसंरचना एवं नेटवर्क सेवाएँ

निकनेट

निकनेट बिहार राज्य मुख्यालय से सभी 38 जिलों तक उच्च-गति एवं सुरक्षित कनेक्टिविटी प्रदान करने वाली समर्पित ई-गवर्नेंस नेटवर्क रीढ़ है। 10 जीबीपीएस की रिडंडेंट आर्किटेक्चर पर आधारित यह नेटवर्क उच्च उपलब्धता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है। इसके माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार के कार्यालयों, जिला प्रशासन तथा फील्ड कार्यालयों को 34 एमबीपीएस से 1 जीबीपीएस तक की लीज़्ड लिंक के जरिए जोड़ा गया है, जिससे अनुप्रयोगों एवं डाटा केंद्रों तक निर्बाध पहुँच संभव हो सकी है।

निकनेट सरकारी ई-मेल, वेब सेवाओं, सुरक्षित ऑनलाइन अनुप्रयोगों तथा बड़े पैमाने पर वी.वी.आई.पी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का समर्थन करता है, जिससे महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होती है। 24×7 सहायता राज्य नेटवर्क संचालन केंद्र तथा एनआईसी सेवा डेस्क के माध्यम से प्रदान की जाती है।

कोर ई-गवर्नेंस अनुप्रयोगों तक तीव्र एवं विश्वसनीय पहुँच सुनिश्चित कर निकनेट सेवा वितरण, पारदर्शिता तथा डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाता है। एकीकृत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एवं सहयोग उपकरण केंद्र, राज्य, जिला, प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर समन्वय को बेहतर बनाते हुए यात्रा समय एवं लागत में उल्लेखनीय कमी लाते हैं।

Fig: 1.7 चित्र: 2.7 पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा सी.सी.एम.एस. मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया गया

राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एन.के.एन)

बिहार में राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एन.के.एन) पटना स्थित राज्य पीओपी के माध्यम से विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं शासकीय निकायों को जोड़ने वाली उच्च-गति, मल्टी-गीगाबिट डिजिटल नेटवर्क अवसंरचना प्रदान करता है। निकनेट के साथ एकीकृत यह नेटवर्क राज्य के सभी जिलों में इंटरनेट, इंट्रानेट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एवं ई-गवर्नेंस अनुप्रयोगों तक निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करता है।

पैन-इंडिया एन.के.एन पहल के अंतर्गत, बिहार का एन.के.एन शिक्षा, अनुसंधान, स्वास्थ्य, कृषि एवं शासन से जुड़े संस्थानों के लिए एक साझा डिजिटल मंच उपलब्ध कराता है, जो सहयोग, डेटा साझा करने, नवाचार तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक अनुसंधान कार्यक्रमों में सहभागिता को बढ़ावा देता है।

पटना स्थित राज्य पीओपी लगभग 100 एन.के.एन लिंक के माध्यम से जिला मुख्यालयों एवं विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों, इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन संस्थानों, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्रों, न्यायिक संस्थानों तथा सरकारी कार्यालयों तक कनेक्टिविटी का विस्तार करता है। बी.एस.एन.एल, रेलटेल एवं पी.जी.सी.आई.एल पर आधारित मल्टी-टी.एस.पी आर्किटेक्चर के साथ 10 जीबीपीएस बैकबोन उच्च उपलब्धता एवं विश्वसनीय सेवाएँ सुनिश्चित करता है।

एन.के.एन से जुड़े संस्थानों को इंटरनेट एवं इंट्रानेट, ई-मेल, वेब होस्टिंग, वी.ओ.आई.पी, वी.पी.एन, डी.एन.एस एवं मल्टीपॉइंट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सेवाओं के साथ-साथ वर्चुअल क्लासरूम, वर्चुअल लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, सहयोगात्मक अनुसंधान प्लेटफॉर्म एवं क्लाउड सेवाओं जैसी उन्नत सुविधाएँ प्राप्त होती हैं।

महत्वपूर्ण आयोजन

  • भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) के सचिव श्री एस. कृष्णन, भा.प्र.से. का एनआईसी, बिहार भ्रमण
  • माननीय मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय द्वारा न्यायालय वाद निगरानी प्रणाली (सी.सी.एम.एस) मोबाइल ऐप का शुभारंभ

सम्मान एवं उपलब्धियाँ

एनआईसी, बिहार को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। प्रमुख पुरस्कारों में शामिल हैं:

  • सी.एस.आई निहिलेंट पुरस्कार
  • सी.एस.आई सिग ई-गवर्नेंस पुरस्कार
  • डिजिटल इंडिया पुरस्कार

इसके अतिरिक्त, सर्वाधिक डीबीटी लेन-देन के लिए एनआईसी, बिहार को राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है, जो राज्य में बड़े पैमाने पर पारदर्शी, समयबद्ध एवं विश्वसनीय प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को सक्षम बनाने वाली इसकी सुदृढ़ एवं स्केलेबल तकनीकी प्रणालियों को दर्शाता है।

भावी दिशा

आगामी चरण में एनआईसी, बिहार अगली पीढ़ी के डिजिटल परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करते हुए ई-गवर्नेंस में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ कर सकता है। प्रमुख प्राथमिकताओं में ए.आई/एम.एल जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण एवं निर्णय समर्थन हेतु गहन उपयोग, योजना एवं निगरानी के लिए जी.आई.एस एवं उपग्रह डेटा का विस्तार, तथा बड़े पैमाने पर नागरिक डेटा के लिए साइबर सुरक्षा एवं डेटा गवर्नेंस ढाँचों को मजबूत करना शामिल है।

इसके साथ-साथ, विभिन्न प्लेटफॉर्मों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा देना, डेटा-आधारित नीति निर्माण को प्रोत्साहित करना तथा समावेशन सुनिश्चित करने हेतु मोबाइल-फर्स्ट एवं बहुभाषी नागरिक सेवाओं का विस्तार करने की भी व्यापक संभावनाएँ हैं। सरकारी अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण पहलों को सुदृढ़ करना, क्लाउड अंगीकरण को तीव्र करना तथा राज्य प्रणालियों को राष्ट्रीय डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डी.पी.आई) फ्रेमवर्क के अनुरूप संरेखित करना स्केलेबिलिटी एवं लचीलापन और अधिक बढ़ाएगा। अपनी मजबूत संस्थागत नींव एवं सिद्ध कार्य-प्रदर्शन के साथ, एनआईसी, बिहार राज्य में स्मार्ट, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित शासन के अगले चरण का नेतृत्व करने के लिए पूर्णतः सक्षम है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें

राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी
एनआईसी बिहार राज्य केंद्र
तृतीय तल, एनआईसी भवन, सूचना भवन परिसर
नेहरू पथ, पटना, बिहार – 800015

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