हिमाचल प्रदेश में दुग्ध उत्पादन केवल एक आजीविका नहीं, बल्कि जीवनशैली है, जिसे मुख्यतः महिलाएँ आगे बढ़ाती हैं। पशुपालन दुग्ध प्रोत्साहन योजना (ए.एच.एम.आई.एस) एक सरल लेकिन सशक्त सिद्धांत पर आधारित है—सरकारी सहायता सीधे किसान तक, समय पर और बिना किसी विवेकाधीन हस्तक्षेप के पहुँचे। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र हिमाचल प्रदेश द्वारा पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए विकसित यह प्रणाली एक एंड-टू-एंड, पेपरलेस डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो दुग्ध किसानों को दुग्ध प्रोत्साहन राशि तथा दुग्ध समितियों को परिवहन हेतु भाड़ा अनुदान का पारदर्शी और समयबद्ध हस्तांतरण सुनिश्चित करती है। फाइलों, मैनुअल प्रक्रियाओं और अनावश्यक अनुस्मारकों के स्थान पर सत्यापित डेटा और स्वचालित कार्यप्रवाह को अपनाकर, यह प्रणाली पूरी प्रक्रिया में निश्चितता, जवाबदेही और विश्वास स्थापित करती है।
ए.एच.एम.आई.एस एक व्यापक ऑनलाइन प्रणाली है, जिसे एनआईसी हिमाचल प्रदेश द्वारा पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य पात्र गैर-सरकारी दुग्ध समितियों को दूध आपूर्ति करने वाले दुग्ध किसानों को गाय एवं भैंस के दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करना है।
यह प्रणाली दुग्ध प्रोत्साहन की संपूर्ण प्रक्रिया—दूध की आपूर्ति दर्ज करने से लेकर अंतिम भुगतान तक—को डिजिटाइज़ करती है, जिससे दुग्ध आय में पारदर्शिता, समयबद्धता और पूर्वानुमेयता सुनिश्चित होती है।
सत्यापित दूध आपूर्ति विवरण संबंधित दुग्ध समितियों द्वारा पोर्टल पर दर्ज किया जाता है और विभाग के भीतर एक निर्धारित, भूमिका-आधारित कार्यप्रवाह के माध्यम से संसाधित किया जाता है। इस सत्यापित डेटा के आधार पर, दुग्ध प्रोत्साहन राशि की गणना कर उसे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से प्रतिमाह सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता है।
इसके अति रिक्त, दूध के परिवहन हेतु देय भाड़ा अनुदान भी सीधे दुग्ध समितियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता है, जिससे मध्यस्थों की भूमिका समाप्त होती है और भुगतान में विलंब नहीं होता।
यह प्रणाली प्रत्येक चरण पर किसानों को सूचित रखती है। प्रोत्साहन राशि के खाते में जमा होते ही तत्काल एसएमएस अलर्ट भेजा जाता है। सुरक्षित ओटीपी-आधारित लॉगिन के माध्यम से किसान दूध आपूर्ति का विवरण, प्रोत्साहन भुगतान, दुग्ध समिति द्वारा की गई किसी भी कटौती तथा सरकार द्वारा जारी प्रोत्साहन राशि की जानकारी देख सकते हैं। इस प्रकार सूचना और पारदर्शिता सीधे किसान के हाथ में होती है।
ए.एच.एम.आई.एस को एक भूमिका-आधारित, पेपरलेस प्लेटफॉर्म के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसमें पशुपालन विभाग, दुग्ध समितियाँ, कोषागार, बैंक और दुग्ध किसान—सभी के लिए पृथक इंटरफेस उपलब्ध हैं। यह प्रणाली राज्य बजट एवं ई-बिल्स प्रणाली से पूर्णतः एकीकृत है, जिससे बिलों का स्वचालित निर्माण, कोषागार में ऑनलाइन प्रस्तुति तथा बैंकों के माध्यम से निधि अंतरण संभव होता है। इस एकीकरण के कारण किसी भी स्तर पर मैनुअल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं रहती, जिससे दक्षता, जवाबदेही और ऑडिट तत्परता सुदृढ़ होती है।
चित्र 7.1 वार्षिक पशुपालन विभाग की वेबसाइट होमपेज
प्रमुख हितधारक
- पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार: दुग्ध प्रोत्साहन एवं भाड़ा अनुदान के प्रसंस्करण और वितरण के लिए उत्तरदायी।
- दुग्ध किसान: पंजीकृत दुग्ध समितियों को दूध आपूर्ति करने वाले लाभार्थी, जिन्हें प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होती है।
- दुग्ध समितियाँ: दूध आपूर्ति डेटा के अभिलेखन, सत्यापन तथा परिवहन से संबंधित विवरण के प्रबंधन के लिए उत्तरदायी।
- कोषागार एवं बैंक: कोषागार बिलों का प्रसंस्करण और निधि स्वीकृति करता है, जबकि बैंक लाभार्थी खातों का सत्यापन और डीबीटी अंतरण सुनिश्चित करते हैं।
उत्पाद की प्रमुख विशेषताएँ
ए.एच.एम.आई.एस एक एकीकृत, एंड-टू-एंड ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी सत्यापन, समयबद्ध भुगतान और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण सुनिश्चित करता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- दुग्ध प्रोत्साहन एवं भाड़ा अनुदान के लिए एंड-टू-एंड, कार्यप्रवाह-आधारित ऑनलाइन प्रणाली
- पूर्णतः पेपरलेस और स्वचालित समाधान, जिसमें डेटा प्रविष्टि से लेकर भुगतान तक किसी भी स्तर पर मैनुअल हस्तक्षेप नहीं
- संबंधित दुग्ध समितियों द्वारा दूध आपूर्ति डेटा की ऑनलाइन प्रविष्टि एवं सत्यापन
- डेटा की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने हेतु मेकर–चेकर तंत्र
- किसानों के बैंक खातों में डीबीटी की सुविधा
- समयबद्ध भुगतान हेतु मासिक स्वचालित भुगतान प्रसंस्करण
- प्रोत्साहन राशि जमा होने पर किसानों को स्वचालित एसएमएस अलर्ट
- दूध आपूर्ति, भुगतान और कटौती देखने हेतु किसानों के लिए सुरक्षित ओटीपी-आधारित लॉगिन
- दुग्ध समितियों के बैंक खातों में भाड़ा अनुदान का प्रत्यक्ष ऑनलाइन हस्तांतरण
- विभाग, बैंक, कोषागार, दुग्ध समितियों और किसानों के लिए भूमिका-आधारित एक्सेस नियंत्रण
- राज्य बजट एवं ई-बिल्स प्रणालियों से निर्बाध एकीकरण, जिससे बिल निर्माण, कोषागार प्रस्तुति और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान संभव
ए.एच.एम.आई.एस एक जेंडर-संवेदनशील सॉफ्टवेयर है। चूँकि दुग्ध उत्पादन मुख्यतः महिलाओं पर आधारित है, इस प्रणाली ने जिले की महिला दुग्ध उत्पादकों को सीधे सशक्त किया है। अब दुग्ध सहकारी समितियों को पड़ोसी जिलों से भी अधिक दूध प्राप्त हो रहा है, जिससे सभी हितधारकों के लिए लाभकारी स्थिति बनी है।
डॉ. विवेक लांबा
उप निदेशक (एएच/बी), जिला सोलनतकनीकी ढांचा
ए.एच.एम.आई.एस सॉफ्टवेयर को माइक्रोसॉफ्ट .नेट तकनीक पर विकसित किया गया है, जिसमें सी# मुख्य प्रोग्रामिंग भाषा तथा एम.एस.एस.क्यू.एल सर्वर बैकएंड डेटाबेस के रूप में प्रयुक्त है। यह तकनीकी संरचना बड़े पैमाने पर लेन-देन के लिए उच्च प्रदर्शन, स्केलेबिलिटी और सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
चित्र 7.2 ए.एच.एम.आई.एस. अवलोकन
सुरक्षा और उपयोग में सरलता के लिए किसान एसएमएस-आधारित ओटीपी प्रमाणीकरण के माध्यम से पोर्टल तक पहुँचते हैं, जिससे जटिल लॉगिन विवरण की आवश्यकता नहीं रहती। कार्यप्रवाह-आधारित और भूमिका-आधारित संरचना सभी हितधारकों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और सहज संचालन सुनिश्चित करती है।
यह सॉफ्टवेयर मॉड्यूलर संरचना का अनुसरण करता है, जिसमें डेटा प्रबंधन, प्रमाणीकरण, भुगतान, अधिसूचना और रिपोर्टिंग के लिए स्वतंत्र लेकिन परस्पर जुड़े घटक शामिल हैं। राज्य बजट एवं ई-बिल्स प्लेटफॉर्म से एपीआई-आधारित एकीकरण के माध्यम से वास्तविक समय में निधि प्रसंस्करण और डीबीटी बिना किसी मैनुअल हस्तक्षेप के संभव होता है।
माननीय मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश द्वारा शुभारंभ की गई ए.एच.एम.आई.एस प्रणाली, एनआईसी हिमाचल प्रदेश द्वारा विकसित की गई है। इसने दुग्ध उत्पादन को न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से रोज़गार और वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर नई गति दी है। इसकी भूमिका-आधारित डैशबोर्ड व्यवस्था, पेपरलेस प्रकृति और कोषागार से ऑनलाइन एकीकरण इसे अत्यंत व्यावहारिक बनाते हैं।
डॉ. विनोद कुमार कुंडी
उप निदेशक (एएच/बी), जिला बिलासपुरलाभ एवं प्रभाव
ए.एच.एम.आई.एस का प्रभाव सीधे ज़मीनी स्तर पर परिलक्षित होता है। यह प्रणाली:
- दुग्ध प्रोत्साहन एवं भाड़ा अनुदान का पेपरलेस, पारदर्शी, समयबद्ध और सुरक्षित डीबीटी सुनिश्चित करती है
- न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित कर किसानों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करती है
- प्रशासनिक बोझ को कम कर एक स्केलेबल, विश्वसनीय और ऑडिट-योग्य समाधान उपलब्ध कराती है
- वास्तविक समय की जानकारी और एसएमएस अलर्ट के माध्यम से दुग्ध किसानों एवं समितियों को सशक्त बनाती है
अग्रिम दिशा
एक मजबूत, पारदर्शी और स्केलेबल आधार पर निर्मित ए.एच.एम.आई.एस का उद्देश्य सेवा वितरण को और अधिक प्रभावी बनाना है। आगामी चरणों में रियल-टाइम एनालिटिक्स, उन्नत डैशबोर्ड और डेटा-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ किया जाएगा।
भविष्य में इसे हिम परिवार रजिस्टर, गौशालाएँ, राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (एन.डी.एल.एम) तथा राज्य की गर्भवती देसी/स्वदेशी गाय भरण-पोषण योजना से एपीआई-आधारित एकीकरण के माध्यम से जोड़ा जाएगा।
द्वारा संपादित: विनोद कुमार गर्ग
लेखक / योगदानकर्ता
संजय कुमार वरिष्ठ तकनीकी निदेशक sanjay.kmr[at]nic.in
मंगल सिंह वैज्ञानिक - डी s.mangal[at]nic.in
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
राज्य सूचना-विज्ञान अधिकारी
एनआईसी हिमाचल प्रदेश राज्य केंद्र,
छठी मंज़िल, आर्म्सडेल भवन
एचपी सचिवालय, शिमला – 171002