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आईसीडी के माध्यम से क्यूबा और केन्या के साथ सहभागिता द्वारा एनआईसी वैश्विक डिजिटल सहयोग को सुदृढ़ कर रहा है।

आईसीडी के माध्यम से क्यूबा और केन्या के साथ सहभागिता द्वारा एनआईसी वैश्विक डिजिटल सहयोग को सुदृढ़ कर रहा है। चित्र 1.2 : महामहिम जुआन कार्लोस मार्सन के नेतृत्व में क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल ने डिजिटल और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा के लिए एनआईसी मुख्यालय का दौरा किया और श्री अभिषेक सिंह से मुलाकात की।

नआईसी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) के अंतर्गत अपनी अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रभाग (आईसीडी) के माध्यम से, भारत की डिजिटल कूटनीति को आगे बढ़ाने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को साझेदार देशों के साथ साझा करके, एनआईसी समावेशी, प्रभावी और प्रौद्योगिकी- आधारित शासन को बढ़ावा दे रहा है—विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों में।

भारत का डीपीआई मॉडल, जो विस्तारयोग्य, खुला और नागरिक-केंद्रित प्लेटफार्मों पर आधारित है, जनसंख्या स्तर पर सार्वजनिक सेवाएँ प्रदान करने की अपनी क्षमता के कारण वैश्विक स्तर पर व्यापक रुचि आकर्षित कर रहा है। आईसीडी के माध्यम से, एनआईसी उन देशों को तकनीकी समाधान, तकनीकी विशेषज्ञता और क्षमता-विकास सहायता प्रदान कर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुगम बनाता है, जो अपने डिजिटल शासन तंत्र को सुदृढ़ करना चाहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रभाग की भूमिका

एनआईसी का आईसीडी डिजिटल शासन के क्षेत्र में विदेशी सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुपक्षीय संस्थाओं के साथ समन्वय के लिए नोडल इकाई के रूप में कार्य करता है। इसका दायित्व भारत के प्रमाणित ई-गवर्नेंस प्लेटफार्मों को साझा करना, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उनके अनुकूलन में सहयोग देना, तकनीकी सहायता प्रदान करना तथा प्रशिक्षण और संयुक्त परियोजनाओं के माध्यम से ज्ञान-विनिमय को बढ़ावा देना है।

क्यूबा के साथ सहभागिता

महामहिम जुआन कार्लोस मार्सन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल ने 18 नवंबर 2025 को एनआईसी मुख्यालय का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने माइटी के अतिरिक्त सचिव तथा एनआईसी के महानिदेशक श्री अभिषेक सिंह एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की।

इन चर्चाओं का केंद्र डिजिटल शासन, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी-सक्षम सार्वजनिक सेवाएँ रहीं। एनआईसी ने भारत के कई डीपीआई प्लेटफार्मों—जैसे ई-हॉस्पिटल, ई-ऑफिस और एआई-सक्षम शासन समाधान—का प्रदर्शन किया।

क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए इन प्लेटफार्मों को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई। दोनों पक्षों ने पायलट परियोजनाओं की संभावनाओं, तकनीकी परामर्श तथा क्यूबा के अधिकारियों और आईटी टीमों के लिए क्षमता-विकास सहयोग पर भी चर्चा की।

महामहिम जुआन कार्लोस मार्सन के नेतृत्व में क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल ने डिजिटल और
प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा के लिए एनआईसी मुख्यालय का दौरा किया और श्री अभिषेक सिंह
से मुलाकात की। चित्र 1.1 : महामहिम जुआन कार्लोस मार्सन के नेतृत्व में क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल ने डिजिटल और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा के लिए एनआईसी मुख्यालय का दौरा किया और श्री अभिषेक सिंह से मुलाकात की।

केन्या के साथ सहभागिता

केन्या का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व महामहिम मर्सी वांजाउ ने किया, 21 नवम्बर 2025 को एनआईसी पहुँचा और एनआईसी के उप महानिदेशक एवं आईसीडी के प्रमुख डॉ. आर. के. पाठक के साथ रणनीतिक चर्चा की। चर्चा का मुख्य केंद्र आईसीटी-सक्षम सार्वजनिक सेवा वितरण और एकीकृत शासन प्रणाली को सुदृढ़ करना रहा। एनआईसी ने आईसीजेएस, ई-ऑफिस और ई-हॉस्पिटल सहित प्रमुख प्लेटफार्मों का प्रदर्शन किया।

केन्याई प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से आईसीजेएस जैसे एकीकृत शासन प्लेटफार्मों में गहरी रुचि दिखाई, जो समन्वय, पारदर्शिता और सेवा दक्षता को बेहतर बनाने में सहायक हैं। चर्चा में संभावित तकनीकी सहयोग, प्रणाली के अनुकूलन और चरणबद्ध कार्यान्वयन रणनीतियों पर भी विचार किया गया।

क्षमता निर्माण और अनुकूलन

एनआईसी का अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाले गए प्लेटफॉर्म और निरंतर तकनीकी सहयोग के ज़रिये क्षमता निर्माण पर केंद्रित है—ताकि तकनीक का हस्तांतरण केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी डिजिटल क्षमता का निर्माण करे।

निष्कर्ष

क्यूबा और केन्या के साथ हुई इन सहभागिताओं से चयनित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लेटफार्मों पर पायलट परियोजनाओं की संभावनाओं की खोज, प्रणाली अनुकूलन के लिए तकनीकी परामर्श की व्यवस्था, प्रशिक्षण और ज्ञान-विनिमय कार्यक्रमों के विकास तथा संरचित अनुवर्ती तंत्र के माध्यम से संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर साझा समझ बनी। ये चर्चाएँ डिजिटल शासन में गहन और सतत सहयोग के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती हैं।

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