जिला से जनवरी 2026

कांगड़ा (धर्मशाला), हिमाचल प्रदेश सशक्त शासन के लिए डिजिटल मार्ग

द्वारा संपादित: सुषमा मिश्रा
kangra banner

धर्मशाला को अपने प्रशासनिक केंद्र के रूप में रखने वाला कांगड़ा जिला, हिमाचल प्रदेश में डिजिटल रूप से सशक्त शासन के एक आदर्श मॉडल के रूप में निरंतर विकसित हो रहा है। ई-गवर्नेंस अनुप्रयोगों के रणनीतिक कार्यान्वयन के माध्यम से, एनआईसी जिला केंद्र, कांगड़ा ने स्वास्थ्य और शिक्षा से लेकर राजस्व, परिवहन तथा आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में पारदर्शी, दक्ष एवं नागरिकोन्मुख प्रशासन को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हिमाचल प्रदेश के पश्चिमी भाग में स्थित कांगड़ा जिला राज्य के सबसे जीवंत एवं ऐतिहासिक जिलों में से एक है। भव्य धौलाधार पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा यह जिला अपने मनोहारी प्राकृतिक दृश्यों, हरे-भरे चाय बागानों, प्राचीन मंदिरों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा सुखद जलवायु के लिए प्रसिद्ध है। यह परम पावन दलाई लामा का निवास स्थल भी है, जिससे यह एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, कांगड़ा विश्वविख्यात कांगड़ा लघु चित्रकला तथा पैराग्लाइडिंग स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थापना के समय से ही एनआईसी जिला केंद्र, कांगड़ा जिला प्रशासन एवं अन्य केंद्रीय तथा राज्य सरकार के विभागों को महत्वपूर्ण सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सेवाएँ प्रदान कर रहा है।

जिले में आईसीटी पहलें

जिले में केंद्र, राज्य एवं जिला स्तर पर आरंभ की गई विभिन्न आईसीटी परियोजनाओं को सभी स्तरों पर लागू किया गया है, ताकि जी2जी, जी2ई तथा जी2सी सेवाएँ ऑनलाइन, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से प्रदान की जा सकें। प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं:

ई-हिमभूमि

ई-हिमभूमि एक प्रमुख भूमि अभिलेख प्रबंधन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर), जमाबंदी, इंतकाल (म्यूटेशन) एवं गिरदावरी का संधारण एवं अद्यतन करना है। यह एक केंद्रीकृत, सुरक्षित एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों, राजस्व अधिकारियों तथा जिला प्रशासन को सशक्त बनाती है।

आरओआर – रिकॉर्ड ऑफ राइट्स की प्रति

यह प्रणाली भूमि अभिलेखों तक विभिन्न माध्यमों से ऑनलाइन पहुँच, डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित आरओआर प्रतियों की उपलब्धता तथा अनेक अनुप्रयोगों के साथ निर्बाध एकीकरण की सुविधा प्रदान करती है।

राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली

एनजीडीआरएस संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को सरल एवं आधुनिक बनाने हेतु एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। इसके माध्यम से नागरिक दस्तावेज़ तैयार कर सकते हैं, स्टाम्प शुल्क की गणना कर सकते हैं, अपॉइंटमेंट स्लॉट बुक कर सकते हैं तथा पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। यह प्रणाली सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षरों के माध्यम से कानूनी रूप से मान्य एवं पारदर्शी पंजीकरण सुनिश्चित करती है।

चित्र 5.2 : राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) की वेबसाइट

चित्र 5.2 : राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) की वेबसाइट

पोंग डैम विस्थापित एमआईएस

हिमाचल प्रदेश में ब्यास नदी पर निर्मित पोंग डैम के कारण विस्थापित हुए लगभग 16,352 परिवारों के पुनर्वास हेतु “मुरब्बा” भूमि आवंटन के लिए यह समर्पित पोर्टल विकसित किया गया है, जिससे मामलों का त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी निपटान सुनिश्चित किया जा सके।

एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली

हिमकोष (आई.एफ.एम.एस.) बजट, लेखा, कोषागार संचालन तथा राजस्व संग्रहण के प्रबंधन हेतु एक समग्र प्लेटफ़ॉर्म है। इस प्रणाली ने विखंडित प्रक्रियाओं के स्थान पर विभागों, आहरण एवं संवितरण अधिकारियों, कोषागारों तथा वित्त विभाग को जोड़ने वाली एकीकृत, लेखापरीक्षण-योग्य कार्यप्रवाह प्रणाली उपलब्ध कराई है।

श्री हेमराज बैरवा, आईएएस
श्री हेमराज बैरवा, आईएएस
उपायुक्त, कांगड़ा (धर्मशाला में)

योजनाओं की निगरानी सूचना प्रणाली

योजनाएँ एमआईएस एक ऑनलाइन प्रणाली है, जो विकासात्मक योजनाओं के प्रबंधन, निगरानी एवं ट्रैकिंग को सक्षम बनाती है। यह जिला योजना कार्यालयों को विभिन्न मदों के अंतर्गत स्वीकृत योजनाओं का विवरण दर्ज करने की सुविधा प्रदान करती है तथा जियो-टैगिंग, रिपोर्ट निर्माण, निगरानी तथा नागरिकों द्वारा सामाजिक अंकेक्षण एवं फीडबैक को सुगम बनाने के लिए आवश्यक टूल्स उपलब्ध कराती है।

ई-कल्याण

ई-कल्याण विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य पेंशन योजनाओं के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन के वितरण को सुव्यवस्थित करने हेतु एक ऑनलाइन कल्याण पेंशन प्रणाली है। यह विभाग को बड़ी संख्या में पेंशनधारकों के अभिलेखों का दक्ष एवं पारदर्शी ढंग से प्रबंधन करने में सहायता करती है।

राजपत्र (ई-गजट)

राजपत्र (ई-गजट) राज्य में डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित राजपत्र के प्रबंधन एवं प्रकाशन हेतु एक पूर्णतः कागज रहित, एंड-टू-एंड प्रणाली है।

मुख्यमंत्री कार्यालय एवं विधानसभा सहयोग

एनआईसी कांगड़ा धर्मशाला में शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्य मंत्री कैंप कार्यालय एवं विधानसभा की आईसीटी व्यवस्थाओं के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

चित्र 5 .3 : माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी उच्चस्तरीय
                                        समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए

चित्र 5.3 : माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए

मानव संपदा

मानव संपदा प्रणाली सरकारी विभागों में मानव संसाधन प्रबंधन को मानकीकृत एवं डिजिटाइज़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

परिवहन सॉफ्टवेयर (वाहन, सारथी)

परिवहन सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जिले के आरटीओ एवं सभी आरएंडएलए कार्यालयों में वाहन, सारथी, आईआरएडी/डीएआर तथा ई-डिटेक्शन अनुप्रयोगों को लागू किया गया है।

एनडीएएल – ए.एल.आई.एस.

शस्त्र लाइसेंस सॉफ्टवेयर जिले में शस्त्र लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण करने तथा उनके प्रबंधन की संपूर्ण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित एवं आधुनिक बनाने के लिए लागू किया गया है।

जिले में अन्य प्रमुख पहलें

जिले में लागू की गई अन्य प्रमुख आईसीटी पहलें निम्नलिखित हैं:

  • ई-प्रोक्योरमेंट
  • ई-ऑफिस – सरकारी कार्यालयों हेतु डिजिटल कार्यस्थल समाधान
  • आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली
  • ई-रोज़गार – रोजगार विनिमय एमआईएस
  • हिमाचल पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम हेतु ऋण आवेदन प्रणाली
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, नेटवर्क एवं ई-मेल सेवाएँ

वीवीआईपी कार्यक्रम हेतु आईसीटी सहयोग

मानसून सत्र के दौरान भारी वर्षा एवं बाढ़ से हुई क्षति की समीक्षा हेतु माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कांगड़ा हवाई अड्डे पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर एनआईसी कांगड़ा द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय की स्थापना एवं प्रस्तुतियों के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक आईसीटी समर्थन प्रदान किया गया।

पुरस्कार एवं सम्मान

एनआईसी कांगड़ा द्वारा विकसित ई-कैच (कांगड़ा एप्लिकेशन फॉर ट्रैकिंग चुनाव) वेब एप्लिकेशन को सूचना प्रौद्योगिकी पहल के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ निर्वाचन अभ्यास पुरस्कार से माननीय राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।

चित्र 5:1 तत्कालीन उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल माननीय राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करते हुए

चित्र 5.1 : तत्कालीन उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल माननीय राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करते हुए

निष्कर्ष

एनआईसी जिला केंद्र, कांगड़ा सेवाओं के आधुनिकीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के माध्यम से जिले में डिजिटल शासन को गति प्रदान कर रहा है। सार्वजनिक सेवा वितरण को सशक्त बनाकर तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक पहुँच को बढ़ाते हुए, एनआईसी कांगड़ा जिले में एक निर्बाध, समावेशी एवं नागरिक-केंद्रित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें

जिला सूचना विज्ञान अधिकारी
एनआईसी कांगड़ा जिला केंद्र
627, प्रथम तल, जिला कार्यालय
कांगड़ा, धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश – 176215

शेयर करें

यह भी पढ़ें

also-thumb2

छत्तीसगढ़: डिजिटल विकास के साथ जड़ें मजबूत करना

छत्तीसगढ़, जिसे अक्सर "भारत का धान का कटोरा" कहा जाता है, डिजिटल शासन और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण में लगातार अग्रणी बनकर उभरा है। पिछले कुछ वर्षों में, राज्य ने अपनी मुख्यतः ग्रामीण और आदिवासी आबादी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तकनीक का लाभ उठाया है, साथ ही सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित की है।...

और पढ़ें

also-thumb3

अहिल्यानगर, महाराष्ट्र: डिजिटल नवाचार के माध्यम से ई-गवननेंस तेज़ करना

अहिल्यानगर डिजिटल शासन और आईसीटी-संचालित विकास में महाराष्ट्र के अग्रणी जिलों में से एक के रूप में उभरा है। पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवाएँ लाने के दृष्टिकोण से, इस जिले ने वास्तविक समय जल प्रबंधन प्रणालियों से लेकर होम-होम सरकारी सेवाओं की डिलीवरी तक, तकनीकी पहलों की एक विस्तृत श्रृंखला को अपनाया है।

और पढ़ें

also-thumb6

ओडिशा आपदा संसाधन नेटवर्क: हर जीवन अनमोल है

1999 में स्थापित ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए), आपदा प्रबंधन और लचीलापन निर्माण के लिए राज्य का सर्वोच्च निकाय है। ओडिशा आपदा संसाधन नेटवर्क (ओडीआरएन) सभी प्रशासनिक स्तरों पर जनशक्ति, बुनियादी ढाँचे और उपकरणों...

और पढ़ें